MADHYA PRADESH SEX WORKERS LAWS 2025

मध्यप्रदेश पुलिस का बड़ा फैसला : होटल (Hotel ) और ढाबों से पकड़ी गईं सेक्स वर्कर्स (Sex Worker ) अब नहीं होंगी गिरफ्तार

मध्यप्रदेश पुलिस का बड़ा फैसला : होटल (Hotel ) और ढाबों से पकड़ी गईं सेक्स वर्कर्स (Sex Worker ) अब नहीं होंगी गिरफ्तार

मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसके तहत ढाबों, होटलों और अन्य स्थानों पर संचालित वेश्यालयों से पकड़ी जाने वाली महिला सेक्स वर्कर्स को अब आरोपी नहीं माना जाएगा। 4 अप्रैल 2025 को जारी इस निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों और भोपाल-इंदौर के पुलिस आयुक्तों को पत्र लिखकर सख्त अनुपालन के आदेश दिए हैं। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुरूप है और महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है.

भोपाल: अब तक मध्य प्रदेश में Sex Workers की सूचना मिलने पर पुलिस कार्रवाई करती थी और इसमें संलिप्त महिलाओं को गिरफ्तार किया जाता था. इन महिलाओं को आरोपी बनाने के साथ इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती थी. लेकिन अब स्वेच्छा से वेश्यावृत्ति करने वाली महिलाओं को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकेगी. न ही ऐसी महिलाओं को आपराधिक मामले में आरोपी बनाया जाएगा. इस संबंध में 3 अप्रैल 2025 को मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने आदेश जारी किया है.
पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा) प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव की ओर से ये आदेश जारी किया गया है. इसमें लिखा है कि सर्वोच्च न्यायालय क्रिमिनल अपील क्रमांक 135/2010 बुद्धदेव कर्मास्कर विरुद्ध पश्चिम बंगाल राज्य और अन्य में पारित आदेशानुसार वैश्यालयों पर दबिश की दशा में स्वैच्छिक लैंगिक कार्य अवैध नहीं है. केवल वैश्यालय चलाना अवैध है. ऐसे में सेक्स वर्कर को दंडित अथवा पेरशान नहीं करना चाहिए. वहीं आदेश में अनैतिक व्यापार अधिनियम, 1956 के अपराध में सुदृढ़ता एवं कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने को कहा है.
अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम, 1956 के तहत वैश्यालय चालना अवैध है. लेकिन उसमें लिप्त महिलाओं को सजा देना न्याय संगत नहीं है. विशेष तौर पर तब जब वो इस धंधे को अपनी मर्जी से कर रही हों. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार किसी महिला की सहमति से बने शारीरिक संबंधों को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश में स्पष्ट है कि स्वैच्छिक यौन संबंध गैरकानूनी नहीं है. केवल वैश्यालय चलाना अपराध है. सेक्स वर्कर को पुलिस गिरफ्तार या परेशान नहीं कर सकती. हर महिला को सम्मनपूर्वक जीवन जीने का संवैधानिक अधिकार है.

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Date : 06 April 2025 Posted By : EDITOR
मध्यप्रदेश पुलिस का बड़ा फैसला : होटल (Hotel ) और ढाबों से पकड़ी गईं सेक्स वर्कर्स (Sex Worker ) अब नहीं होंगी गिरफ्तार
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मध्यप्रदेश पुलिस का बड़ा फैसला : होटल (Hotel ) और ढाबों से पकड़ी गईं सेक्स वर्कर्स (Sex Worker ) अब नहीं होंगी गिरफ्तार

मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसके तहत ढाबों, होटलों और अन्य स्थानों पर संचालित वेश्यालयों से पकड़ी जाने वाली महिला सेक्स वर्कर्स को अब आरोपी नहीं माना जाएगा। 4 अप्रैल 2025 को जारी इस निर्देश के बाद पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों और भोपाल-इंदौर के पुलिस आयुक्तों को पत्र लिखकर सख्त अनुपालन के आदेश दिए हैं। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुरूप है और महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है.

भोपाल: अब तक मध्य प्रदेश में Sex Workers की सूचना मिलने पर पुलिस कार्रवाई करती थी और इसमें संलिप्त महिलाओं को गिरफ्तार किया जाता था. इन महिलाओं को आरोपी बनाने के साथ इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती थी. लेकिन अब स्वेच्छा से वेश्यावृत्ति करने वाली महिलाओं को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकेगी. न ही ऐसी महिलाओं को आपराधिक मामले में आरोपी बनाया जाएगा. इस संबंध में 3 अप्रैल 2025 को मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने आदेश जारी किया है.
पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा) प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव की ओर से ये आदेश जारी किया गया है. इसमें लिखा है कि सर्वोच्च न्यायालय क्रिमिनल अपील क्रमांक 135/2010 बुद्धदेव कर्मास्कर विरुद्ध पश्चिम बंगाल राज्य और अन्य में पारित आदेशानुसार वैश्यालयों पर दबिश की दशा में स्वैच्छिक लैंगिक कार्य अवैध नहीं है. केवल वैश्यालय चलाना अवैध है. ऐसे में सेक्स वर्कर को दंडित अथवा पेरशान नहीं करना चाहिए. वहीं आदेश में अनैतिक व्यापार अधिनियम, 1956 के अपराध में सुदृढ़ता एवं कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने को कहा है.
अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम, 1956 के तहत वैश्यालय चालना अवैध है. लेकिन उसमें लिप्त महिलाओं को सजा देना न्याय संगत नहीं है. विशेष तौर पर तब जब वो इस धंधे को अपनी मर्जी से कर रही हों. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार किसी महिला की सहमति से बने शारीरिक संबंधों को अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश में स्पष्ट है कि स्वैच्छिक यौन संबंध गैरकानूनी नहीं है. केवल वैश्यालय चलाना अपराध है. सेक्स वर्कर को पुलिस गिरफ्तार या परेशान नहीं कर सकती. हर महिला को सम्मनपूर्वक जीवन जीने का संवैधानिक अधिकार है.

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