International Conference ‘Mahakal The Master of Time’ to Ujjain

Madhya Pradesh: उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल को होगा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम”

Madhya Pradesh: उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल को होगा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम”

प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान पर होगा वैश्विक मंथन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव सम्मेलन में होंगे शामिल

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आगामी 3 अप्रैल को उज्जैन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” के उद्घाटन सत्र में शामिल होंगे। यह सम्मेलन 3 से 5 अप्रैल तक उज्जैन के समीप डोंगला में होगा। सम्मेलन का उद्घाटन उज्जैन स्थित तारामंडल परिसर में होगा। कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन, जो प्राचीन काल से समय गणना और खगोल विज्ञान की वैश्विक धुरी रही है, एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक और बौद्धिक संगम का केंद्र बनेगी। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के समन्वय पर केंद्रित यह सम्मेलन देश-विदेश के वैज्ञानिकों, खगोलविदों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों तथा अंतरिक्ष क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। कार्यक्रम में साइंस सेंटर का उद्घाटन भी किया जाएगा। साथ ही यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) एवं आरसी (रिमोट कंट्रोल) और सैटेलाइट मेकिंग (उपग्रह निर्माण) विषयों पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जो युवाओं में तकनीकी कौशल, नवाचार क्षमता तथा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि को प्रोत्साहित करेंगी।
तीन दिवसीय कार्यक्रम मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सह-आयोजक संस्थाओं में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, वीर भारत न्यास और दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान कार्यक्रम की सह-आयोजक संस्थाएं हैं।
डोंगला का ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक महत्व
उज्जैन से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित डोंगला प्राचीन काल से खगोल एवं ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। कर्क रेखा के यहां से गुजरने के कारण इसे काल गणना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। सम्मेलन में उज्जैन-डोंगला को वैश्विक मेरिडियन (मध्यान रेखा) के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी।
इन प्रमुख विषयों पर होगा विचार-विमर्श
सम्मेलन में आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। प्रमुख विषयों में विकसित भारत में स्पेस इकोनॉमी की भूमिका, खगोल विज्ञान, एस्ट्रोफिजिक्स एवं कॉस्मोलॉजी की नवीनतम तकनीक, भारतीय काल गणना पद्धति का वैज्ञानिक आधार, कालचक्र की अवधारणा और स्पेस सेक्टर से जुड़ी रणनीतियां शामिल हैं।
विविध कार्यक्रम होंगे आयोजन के आकर्षण
तीन दिवसीय सम्मेलन में मुख्य व्याख्यान, उच्च स्तरीय पैनल चर्चा, तकनीकी सत्र, ओपन सेशन, टेक्नोलॉजी एक्सपो, स्टार्टअप कॉन्फ्रेंस, डोंगला वेधशाला का भ्रमण, कार्यशालाएं, पुस्तक विमोचन, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
डॉ. विक्रम साराभाई के विज़न को मिलेगा विस्तार
उज्जैन प्राचीन काल से समय मापन का प्रमुख केंद्र रहा है। महान खगोलविद आचार्य वराहमिहिर ने उज्जैन को खगोलीय गणनाओं का आधार बनाया था। यहां विकसित कालचक्र की अवधारणा आज भी आधुनिक खगोल विज्ञान को प्रेरित करती है। यह सम्मेलन डॉ. विक्रम साराभाई के उस विज़न को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की परिकल्पना की गई थी।
उज्जैन को वैश्विक टाइम स्केल सेंटर बनाने की पहल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश स्पेस टेक्नोलॉजी और नवाचार के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार उज्जैन को पुनः वैश्विक “टाइम स्केल सेंटर” के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही आधुनिक साइंस सेंटर और प्रस्तावित साइंस सिटी के माध्यम से युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को मिलेगा बल
उज्जैन आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ भव्य रूप कर रहा है। सम्मेलन में इसरो, सीएसआईआर, डीआरडीओ, नीति आयोग सहित देश-विदेश के प्रमुख शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों की सहभागिता प्रस्तावित है।

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Date : 31 March 2026 Posted By : EDITOR
Madhya Pradesh: उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल को होगा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम”
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Madhya Pradesh: उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल को होगा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम”

प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान पर होगा वैश्विक मंथन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव सम्मेलन में होंगे शामिल

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आगामी 3 अप्रैल को उज्जैन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” के उद्घाटन सत्र में शामिल होंगे। यह सम्मेलन 3 से 5 अप्रैल तक उज्जैन के समीप डोंगला में होगा। सम्मेलन का उद्घाटन उज्जैन स्थित तारामंडल परिसर में होगा। कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन, जो प्राचीन काल से समय गणना और खगोल विज्ञान की वैश्विक धुरी रही है, एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक और बौद्धिक संगम का केंद्र बनेगी। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के समन्वय पर केंद्रित यह सम्मेलन देश-विदेश के वैज्ञानिकों, खगोलविदों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों तथा अंतरिक्ष क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। कार्यक्रम में साइंस सेंटर का उद्घाटन भी किया जाएगा। साथ ही यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) एवं आरसी (रिमोट कंट्रोल) और सैटेलाइट मेकिंग (उपग्रह निर्माण) विषयों पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जो युवाओं में तकनीकी कौशल, नवाचार क्षमता तथा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि को प्रोत्साहित करेंगी।
तीन दिवसीय कार्यक्रम मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सह-आयोजक संस्थाओं में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, वीर भारत न्यास और दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान कार्यक्रम की सह-आयोजक संस्थाएं हैं।
डोंगला का ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक महत्व
उज्जैन से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित डोंगला प्राचीन काल से खगोल एवं ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। कर्क रेखा के यहां से गुजरने के कारण इसे काल गणना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। सम्मेलन में उज्जैन-डोंगला को वैश्विक मेरिडियन (मध्यान रेखा) के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी।
इन प्रमुख विषयों पर होगा विचार-विमर्श
सम्मेलन में आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। प्रमुख विषयों में विकसित भारत में स्पेस इकोनॉमी की भूमिका, खगोल विज्ञान, एस्ट्रोफिजिक्स एवं कॉस्मोलॉजी की नवीनतम तकनीक, भारतीय काल गणना पद्धति का वैज्ञानिक आधार, कालचक्र की अवधारणा और स्पेस सेक्टर से जुड़ी रणनीतियां शामिल हैं।
विविध कार्यक्रम होंगे आयोजन के आकर्षण
तीन दिवसीय सम्मेलन में मुख्य व्याख्यान, उच्च स्तरीय पैनल चर्चा, तकनीकी सत्र, ओपन सेशन, टेक्नोलॉजी एक्सपो, स्टार्टअप कॉन्फ्रेंस, डोंगला वेधशाला का भ्रमण, कार्यशालाएं, पुस्तक विमोचन, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
डॉ. विक्रम साराभाई के विज़न को मिलेगा विस्तार
उज्जैन प्राचीन काल से समय मापन का प्रमुख केंद्र रहा है। महान खगोलविद आचार्य वराहमिहिर ने उज्जैन को खगोलीय गणनाओं का आधार बनाया था। यहां विकसित कालचक्र की अवधारणा आज भी आधुनिक खगोल विज्ञान को प्रेरित करती है। यह सम्मेलन डॉ. विक्रम साराभाई के उस विज़न को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की परिकल्पना की गई थी।
उज्जैन को वैश्विक टाइम स्केल सेंटर बनाने की पहल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश स्पेस टेक्नोलॉजी और नवाचार के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार उज्जैन को पुनः वैश्विक “टाइम स्केल सेंटर” के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही आधुनिक साइंस सेंटर और प्रस्तावित साइंस सिटी के माध्यम से युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को मिलेगा बल
उज्जैन आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ भव्य रूप कर रहा है। सम्मेलन में इसरो, सीएसआईआर, डीआरडीओ, नीति आयोग सहित देश-विदेश के प्रमुख शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों की सहभागिता प्रस्तावित है।

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