MP: इंदौर में 350 करोड़ की जमीन पर बड़ा फैसला, अयोध्यापुरी रहवासी संघ का दावा खारिज
इंदौर में 350 करोड़ की जमीन पर बड़ा फैसला, अयोध्यापुरी रहवासी संघ का दावा खारिज
जिला कोर्ट ने कंपनी के पक्ष में सुनाया फैसला, अब हाईकोर्ट पहुंचेगा रहवासी संघ
इंदौर की अयोध्यापुरी कॉलोनी की करीब 350 करोड़ रुपये कीमत वाली चार एकड़ बेशकीमती जमीन को लेकर कानूनी लड़ाई में बड़ा फैसला आया है। जिला कोर्ट ने सिम्पलेक्स इन्वेस्टमेंट एंड मेगा फाइनेंस कंपनी के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए अयोध्यापुरी रहवासी कल्याण संघ और देवी अहिल्या संस्था के दावों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने 2007 में कंपनी के पक्ष में हुई रजिस्ट्री को वैध माना है। फैसले से असंतुष्ट रहवासी संघ ने अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही है, वहीं जिला प्रशासन भी आदेश का अध्ययन करने के बाद आगे की कार्रवाई तय करेगा।
इंदौर: अयोध्यापुरी की चार एकड़ जमीन रहवासियों के हाथ से फिसल गई है। जिला कोर्ट ने जमीन अयोध्यापुरी रहवासी कल्याण संघ और देवी अहिल्या संस्था के जमीन पर दावे को खारिज कर दिया है। ‘ कोर्ट ने सिंपलेक्स इंवेस्टमेंट एंड मेगा फाइनेंस कंपनी के पक्ष में निर्णय दिया है। इंदौर के अयोध्यापुरी कॉलोनी की करीब चार एकड़ बेशकीमती जमीन के स्वामित्व को लेकर चल रहे विवाद में जिला कोर्ट ने सिम्पलेक्स इन्वेस्टमेंट एंड मेगा फाइनेंस कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने रजिस्ट्री को वैध माना
जिला न्यायाधीश डॉ. शुभ्रा सिंह ने 65 पेज के फैसले में देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था द्वारा कंपनी के पक्ष में की गई रजिस्ट्री को वैध माना और अयोध्यापुरी रहवासी कल्याण संघ के दावों को खारिज कर दिया। इस जमीन की मौजूदा कीमत करीब 350 करोड़ रुपए बताई जा रही है। विवादित जमीन को लेकर पूर्व कलेक्टर मनीष सिंह के कार्यकाल में प्रशासन ने कार्रवाई की पहल की थी। सहकारिता विभाग के माध्यम से रजिस्ट्री निरस्त कराने के लिए कोर्ट में आवेदन भी दिया गया था।
2007 की रजिस्ट्री को कानूनी रूप से वैध माना- कोर्ट ने 24 फरवरी 2007 को सिम्पलेक्स कंपनी के पक्ष में की गई जमीन की रजिस्ट्री को वैध माना। फैसले के मुताबिक, संस्था की वार्षिक आमसभा में प्रस्ताव पारित करने के बाद जमीन बेचने की प्रक्रिया पूरी की गई थी।
अतिरिक्त जमीन पर सदस्यों के प्लॉट होने के प्रमाण नहीं मिले
रहवासी कल्याण संघ ऐसा ठोस दस्तावेज, लेआउट या नक्शा पेश नहीं कर सका, जिससे साबित हो कि विवादित अतिरिक्त जमीन पर संस्था के किसी सदस्य का व्यक्तिगत भूखंड था। संस्था के पास कुल 6.75 लाख वर्गफीट जमीन थी। सदस्यों को प्लॉट आवंटित करने के बाद बची जमीन कंपनी को बेचे जाने का पक्ष रखा गया।
संस्था और कंपनी के बीच धोखाधड़ी के प्रमाण नहीं मिले
कोर्ट ने संस्था और कंपनी के बीच हुए अनुबंध तथा रजिस्ट्री में धोखाधड़ी के पर्याप्त प्रमाण नहीं पाए। इसी आधार पर जमीन के हस्तांतरण को अवैध ठहराने की मांग स्वीकार नहीं की गई।
कलेक्टर बोले- आदेश देखकर तय करेंगे आगे की कार्रवाई
कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि अभी आदेश की प्रति नहीं मिली है। निचली अदालत ने जो फैसला दिया है, उसका अध्ययन किया जाएगा। यदि फैसला प्रशासन के पक्ष में नहीं है, तो ऊपरी अदालत में अपील करने के विकल्प पर विचार किया जाएगा।
रहवासी संघ बोला- पहली रजिस्ट्री हमारी, हाईकोर्ट जाएंगे
फैसले से असंतुष्ट अयोध्यापुरी रहवासी कल्याण संघ ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। संघ के सचिव एमके सिंह का दावा है कि जमीन की पहली रजिस्ट्री संस्था के नाम हुई थी और कंपनी ने गलत तरीके से जमीन हासिल कर दोहरी रजिस्ट्री कराई। उनका कहना है कि विवादित जमीन पर सदस्यों को प्लॉट आवंटित किए जाने हैं।
