
प्रहार मूवी रिव्यू: ‘प्रहार’, न्याय की जंग और अनकही कहानी!
डायरेक्टर: अविनाश अरुण
कास्ट: राजकुमार राव, वामिका गब्बी, ललित प्रभाकर, जयदीप अहलावत, सिकंदर खेर, आशीष विद्यार्थी
रेटिंग: 4.5
फिल्म की कहानी
UNN @ Varsha Parikh : फिल्म की कहानी सरकारी वकील उज्ज्वल निकम और अजमल कसाब के मुकदमे के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है. इसमें 1993 के बॉम्बे बम धमाकों के मामले का भी जिक्र किया गया है. अदालत में सबूत पेश करने, दलीलें रखने और मुकदमे की रणनीति बनाने के बीच कहानी न्याय की प्रक्रिया की जटिलताओं को सामने लाती है. हालांकि, फिल्म का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष निकम की निजी जिंदगी है. काम के प्रति उनकी प्रतिबद्धता इतनी गहरी है कि परिवार के साथ उनका भावनात्मक जुड़ाव प्रभावित होता है. खासतौर पर बेटे अनिकेत के साथ उनके रिश्ते में यह दूरी साफ दिखाई देती है. बेटा अपने पिता से समय, स्नेह और मार्गदर्शन चाहता है, लेकिन निकम अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देते हैं. यहीं फिल्म एक अहम सवाल उठाती है कि दूसरों को न्याय दिलाने के लिए लगातार संघर्ष करने वाला व्यक्ति अपने परिवार की भावनात्मक जरूरतों को पूरा करने में क्यों पीछे रह जाता है.
26/11 मुंबई आतंकी हमलों की दर्दनाक यादों और उसके बाद इंसाफ की लंबी कानूनी लड़ाई को पर्दे पर उतारती फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ एक प्रभावशाली कोर्टरूम ड्रामा है। निर्देशक अविनाश अरुण ने फिल्म में अदालत की तीखी बहसों, सबूतों और न्याय की जटिल प्रक्रिया को दिलचस्प अंदाज में पेश किया है। फिल्म में राजकुमार राव सरकारी वकील उज्ज्वल निकम की भूमिका में नजर आते हैं। उनकी दमदार डायलॉग डिलीवरी, गंभीर अभिनय और कोर्टरूम में आत्मविश्वास से भरी मौजूदगी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। वहीं, ललित प्रभाकर अजमल कसाब, सिकंदर खेर बचाव पक्ष के वकील और जयदीप अहलावत महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आते हैं। फिल्म की कहानी सिर्फ अदालत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उज्ज्वल निकम के निजी जीवन और पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच संघर्ष को भी दिखाती है। दमदार अभिनय, भावनात्मक गहराई और कानूनी दांवपेच के साथ ‘प्रहार’ इंसाफ की लड़ाई को एक अलग नजरिए से पेश करती है।