Rahul Gandhi alleges that India has been pushed into a period

राहुल गांधी का आरोप: भाजपा ने मैन्युफैक्चरिंग खत्म कर भारत को बेरोजगारी के दौर में धकेला

राहुल गांधी का आरोप: भाजपा ने मैन्युफैक्चरिंग खत्म कर भारत को बेरोजगारी के दौर में धकेला

नई दिल्ली । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में जर्मनी स्थित बीएमडब्ल्यू फैक्ट्री के अपने दौरे का एक वीडियो साझा करते हुए वैश्विक विनिर्माण रोजगार सृजन और भारत की आर्थिक नीतियों पर विस्तार से चर्चा की। इस चर्चा के केंद्र में बदलती वैश्विक मोबिलिटी और भारत के लिए एक नए विकास मॉडल की आवश्यकता रही। राहुल गांधी के अनुसार, दुनिया इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है, जहां पारंपरिक इंजन (इंटरनल कंबशन इंजन) की जगह इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ले रही है। यह बदलाव केवल तकनीक का नहीं, बल्कि वैश्विक औद्योगिक ढांचे को नया आकार देने वाला है। राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा ने मैन्युफैक्चरिंग खत्म कर भारत को बेरोजगारी के दौर में धकेल दिया है।
देश की आंतरिक आर्थिक स्थिति पर प्रहार करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान नीतियां विनिर्माण को प्रोत्साहित करने के बजाय कुछ चुनिंदा बड़े कॉर्पोरेट समूहों के हाथों में आर्थिक शक्ति को केंद्रित कर रही हैं। उनके अनुसार, भारत में बेरोजगारी की समस्या का समाधान केवल बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग के जरिए ही संभव है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि देश के कुछ प्रमुख औद्योगिक घराने उत्पादन के बजाय व्यापार (ट्रेडिंग) पर अधिक ध्यान दे रहे हैं, जिससे भारत की निर्भरता विदेशी सामानों, विशेषकर चीनी उत्पादों पर लगातार बढ़ती जा रही है। गांधी ने इस बात पर चिंता जताई कि चीन ने इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में समय रहते निवेश करके एक बड़ा प्रतिस्पर्धी लाभ हासिल कर लिया है। उन्होंने तर्क दिया कि मोबिलिटी के इस नए स्वरूप को अपनाकर बीजिंग आज दुनिया के बाजारों में अग्रणी भूमिका में है। हालांकि, उनका मानना है कि भारत जैसे देशों के लिए यह एक चुनौती के साथ-साथ एक बड़ा अवसर भी है। चूंकि भारत को अभी भी बड़े पैमाने पर अपना बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) विकसित करना है, इसलिए हमारे पास पारंपरिक रास्तों को छोड़कर सीधे आधुनिक और टिकाऊ तकनीक की ओर बढ़ने का मौका है।
बर्लिन के हर्टी स्कूल में एक संबोधन का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि भारत के पास विनिर्माण हब बनने के लिए आवश्यक आबादी, प्रतिभा और प्रतिस्पर्धी लागत ढांचा (कॉस्ट स्ट्रक्चर) मौजूद है। समस्या क्षमता की नहीं, बल्कि दृष्टि और नीति की है। उन्होंने अफसोस जताया कि आज भारतीय बाजारों में उपयोग होने वाली अधिकांश वस्तुएं चीन में बनी होती हैं, जो भारत जैसी विशाल अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर संकेत है। राहुल गांधी ने भारतीय विकास के एक ऐसे नए मॉडल का प्रस्ताव रखा जो केवल मुनाफे पर आधारित न होकर समावेशी हो। उनके अनुसार, भारत का अगला विकास मॉडल उत्पादन पर आधारित होना चाहिए, लेकिन वह लोकतांत्रिक मूल्यों, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और सामाजिक न्याय के साथ संतुलित हो। उन्होंने जोर दिया कि आर्थिक खुशहाली ऐसी होनी चाहिए जो समाज के सबसे कमजोर और हाशिये पर पड़े वर्गों तक पहुंचे। उनके विजन के अनुसार, भारत को केवल एक उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि एक ऐसा वैश्विक उत्पादन केंद्र बनना चाहिए जो दुनिया को एक नया और जिम्मेदार विकल्प प्रदान कर सके।
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