Trump wants his preferred candidate to be the Prime

इराक में अपनी पसंद का PM चाहते हैं ट्रम्प

इराक में अपनी पसंद का PM चाहते हैं ट्रम्प

– नूरी-मलिकी को फिर प्रधानमंत्री बनाया तो कोई मदद नहीं करेंगे

बगदाद । मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि अगर इराक पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी को फिर से प्रधानमंत्री बनाता है, तो अमेरिका इराक से अपना समर्थन वापस ले लेगा। ट्रम्प ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर पोस्ट में लिखा कि मैं सुन रहा हूं कि महान देश इराक बहुत गलत फैसला ले सकता है और नूरी अल-मालिकी को फिर से प्रधानमंत्री बना सकता है। उन्होंने कहा कि मलिकी के पिछले कार्यकाल में इराक गरीबी और हिंसा में डूब गया था। ऐसा दोबारा नहीं होने देना चाहिए।
ट्रम्प ने आगे कहा कि मलिकी की नीतियां और विचारधारा पागलों वाली है। अगर वे चुने गए, तो अमेरिका इराक की मदद नहीं करेगा। बिना अमेरिकी सहायता के इराक के पास सफलता, समृद्धि या आजादी की कोई संभावना नहीं रहेगी।
इराक में प्रधानमंत्री पद पर अटका विवाद
इराक में संसदीय चुनाव 11 नवंबर 2025 को हो चुके हैं। यह इराक के 329 सदस्यों वाली संसद के लिए चुनाव था, जो राष्ट्रपति चुनती है और फिर प्रधानमंत्री की नियुक्ति होती है। प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी की गठबंधन ने सबसे ज्यादा सीटें जीतीं (लगभग 46 सीटें), लेकिन कोई भी गठबंधन बहुमत में नहीं आया। इसलिए सरकार बनाने के लिए गठबंधन और बातचीत चल रही है। राष्ट्रपति चुनाव 28 या 29 जनवरी 2026 को निर्धारित था, लेकिन कुर्द ब्लॉक्स में उम्मीदवार पर सहमति न होने से इसे टाल दिया गया है। शिया गठबंधन ने 24 जनवरी 2026 को पूर्व प्रधानमंत्री मलिकी को प्रधानमंत्री पद के लिए नामित किया है, जिस पर अमेरिका ने नाराजगी जताई है।
मलिकी ने ही सद्दाम हुसैन की फांसी को मंजूरी दी थी
मलिकी इराक के इस्लामिक पार्टी के लंबे समय से नेता रहे हैं। वे 2006 से 2014 तक इराक के प्रधानमंत्री रहे, जो पोस्ट-सद्दाम हुसैन युग में सबसे लंबा कार्यकाल है। उन्होंने दो टर्म पूरे किए। 2003 में अमेरिका के नेतृत्व में सद्दाम हुसैन की सत्ता समाप्त होने के बाद इराक में अराजकता और संप्रदायिक हिंसा बढ़ गई थी। 2006 में इब्राहिम अल-जाफरी के इस्तीफे के बाद मलिकी को समझौते के तौर पर प्रधानमंत्री चुना गया। शुरुआत में उन्होंने राष्ट्रीय एकता सरकार बनाई, जिसमें शिया, सुन्नी और कुर्द शामिल थे। 2006 में ही मलिकी ने सद्दाम हुसैन की फांसी को मंजूरी दी। 2007-2008 में अमेरिकी सैनिकों की बढ़ोतरी के साथ मिलकर उन्होंने अल-कायदा इन इराक और शिया मिलिशिया के खिलाफ कार्रवाई की। 2008 में मिलिशिया के खिलाफ ऑपरेशन खुद लीड किया, जिसे सफल माना गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Releated

गूगल पांच साल में करीब 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर का करेगी निवेश

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱गूगल पांच साल में करीब 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर का करेगी निवेश -एआई इम्पेक्ट समिट-2026 में कई विदेशी कंपनियों से हुई भारत की भारी डील नई दिल्ली। एआई इम्पेक्ट समिट-2026 में भारत को विदेशी कंपनियों से ढेरों निवेश मिले हैं, जिसमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया और क्वालकॉम जैसी कंपनियां शामिल हैं। […]

India AI Impact Summit 2026: PM Modi unveils ‘MANAV’ vision

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱India AI Impact Summit 2026: PM Modi unveils ‘MANAV’ vision नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित एआई-इम्पैक्ट समिट 2026 के चौथे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तस्वीरों की एक श्रृंखला साझा की, जिसमें पीएम मोदी और दुनिया के बड़े और छोटे देशों के माननीय साथ में खड़े थे. सामने […]