Mamata attacks Election Commission levels allegations

चुनाव आयोग पर हमलावार ममता का आरोप………..अघोषित आपातकाल और राष्ट्रपति शासन जैसे हालात

चुनाव आयोग पर हमलावार ममता का आरोप………..अघोषित आपातकाल और राष्ट्रपति शासन जैसे हालात

कोलकाता । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को चुनाव आयोग की कार्रवाई पर तीखा हमला बोला है। सीएम ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बंगाल को निशाना बनाकर अभूतपूर्व और चिंताजनक कदम उठा रहा है। ममता ने पोस्ट के द्वारा कहा कि चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले ही राज्य के 50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को अचानक और मनमाने तरीके से हटाया गया, जिसमें मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी, एडीजी, आईजी, डीआईजी, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक शामिल हैं। उन्होंने इस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि उच्च स्तर की राजनीतिक दखलअंदाजी करार दिया। ममता ने आरोप लगाया कि निष्पक्ष रहने वाली संस्थाओं का राजनीतिकरण हो रहा है, जो कि संविधान पर सीधा हमला है। एक ओर जहां कथित तौर पर त्रुटिपूर्ण एसआईआर प्रक्रिया हो रही है और अब तक 200 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, वहीं चुनाव आयोग का रवैया पक्षपातपूर्ण दिखाता है। अब तक अनुपूरक मतदाता सूची जारी नहीं की गई है, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की सीधी अनदेखी है। इससे लोगों में चिंता और असमंजस का माहौल है। ममता ने आरोप लगाया कि आईबी, एसटीएफ और सीआईडी जैसे महत्वपूर्ण विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को चुनिंदा तरीके से हटकर बाहर भेजा जा रहा है, इससे प्रशासनिक ढांचे को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधकर सवाल उठाया कि आखिर भाजपा इतनी बेचैन क्यों है और बंगाल को बार-बार टारगेट क्या किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी के 78 साल बाद भी लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए लाइन में खड़ा करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री ममता ने चुनाव आयोग के फैसलों में विरोधाभास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक ओर आयोग कहता है कि हटाए गए अधिकारियों को चुनाव ड्यूटी में नहीं लगाया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ कुछ ही घंटों में उन्हें चुनाव पर्यवेक्षक बनाकर बाहर भेज दिया जाता है।
उन्होंने सिलीगुड़ी और बिधाननगर के पुलिस कमिश्नरों को बिना विकल्प दिए पर्यवेक्षक नियुक्त करने पर सवाल उठाए, जिससे ये दोनों अहम शहर कुछ समय के लिए बिना नेतृत्व के रहे। हालांकि, बाद में इस गलती को सुधारा गया। ममता बनर्जी ने इस अघोषित आपातकाल और राष्ट्रपति शासन जैसे हालात बताया। साथ ही कहा कि भाजपा जनता का भरोसा जीतने में नाकाम रही है, इसलिए दबाव, डर और संस्थाओं के दुरुपयोग के जरिए सत्ता हासिल करना चाहती है। ममता ने कहा कि बंगाल कभी डर के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने साफ कहा, बंगाल लड़ेगा, विरोध करेगा और हर साजिश को नाकाम करेगा।

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