India's three stalwarts Jaishankar, Vikram and Hardeep Duniya

भारत के तीन धुरधंर…जयशंकर, विक्रम और हरदीप दुनिया के अलग-अलग देशों में कूटनीतिक बिसात बिछा रहे

भारत के तीन धुरधंर….जयशंकर, विक्रम और हरदीप दुनिया के अलग-अलग देशों में कूटनीतिक बिसात बिछा रहे

ईरान-अमेरिका जंग में सीजफायर के बाद लगातार सक्रिय दिख रही भारत की कूटनीति

नई दिल्ली । नई दिल्ली से लेकर पश्चिम एशिया, अमेरिका और हिंद महासागर क्षेत्र तक भारत की सक्रिय कूटनीति इन दिनों वैश्विक स्तर पर चर्चा का केंद्र बनी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विक्रम मिसरी और हरदीप सिंह पुरी की अलग-अलग दिशाओं में कूटनीतिक पहल कर रहे है, कि भारत अब केवल वैश्विक घटनाओं का दर्शक नहीं, बल्कि एक निर्णायक खिलाड़ी बन चुका है।
सबसे पहले, जयशंकर की मॉरिशस यात्रा के बारे में चर्चा करे, यह भारत की समुद्री और सामरिक नीति का अहम हिस्सा है। पोर्ट लुईस में उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया संकट ने ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग को और महत्वपूर्ण बना दिया है। भारत और मॉरिशस के बीच तेल और गैस आपूर्ति समझौता अंतिम चरण में है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती देगा। इसके साथ रक्षा सहयोग, स्वास्थ्य, शिक्षा और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में बढ़ता तालमेल हिंद महासागर में भारत की बढ़ती पकड़ को दर्शाता है। वहीं मारिशस के अलावा जयशंकर की संयुक्त अरब अमीरात यात्रा भी बेहद अहम है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर बढ़ते खतरे के बीच भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि तेल और गैस की आपूर्ति बाधित न हो। यह दौरा ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
दूसरी ओर, विक्रम मिसरी की वाशिंगटन यात्रा भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा दे रही है। उनकी मुलाका मार्को रुबियो सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों से हुई, जिसमें व्यापार, रक्षा, क्वाड, सेमीकंडक्टर, एआई और महत्वपूर्ण खनिज जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। यह स्पष्ट संकेत है कि भारत और अमेरिका अब केवल साझेदार नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोगी बनते जा रहे हैं। तकनीकी सहयोग, मजबूत सप्लाई चेन और सुरक्षा साझेदारी इस रिश्ते को और गहरा कर रही है। विक्रम मिसरी की अमेरिका यात्रा के बारे में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि विदेश सचिव ने अमेरिका के आर्थिक मामलों के अवर विदेश सचिव जैकब हेलबर्ग के साथ भारत-अमेरिका के बीच तकनीकी सहयोग को और गहरा करने पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने मज़बूत सप्लाई चेन के लिए साझा दृष्टिकोण और सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, क्वांटम, एआई, परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग, तथा पैक्स सिलिका पहल को लागू करने की दिशा में अगले कदमों पर बातचीत की। इसके पहले मिसरी की मुलाकात एफबीआई के निदेशक काश पटेल से भी हुई। इस बारे में वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि दोनों के बीच आतंकवाद, संगठित अपराध और नशीले पदार्थों की रोकथाम में भारत-अमेरिका के मज़बूत सहयोग पर विचारों का सार्थक आदान-प्रदान हुआ।
वहीं, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की दोहा यात्रा ऊर्जा कूटनीति का सबसे व्यावहारिक पक्ष है। कतर में जारी संकट और एलएनजी उत्पादन में बाधा ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। भारत, जो कतर से बड़ी मात्रा में गैस आयात करता है, इस स्थिति को लेकर गंभीर है। इस यात्रा के दौरान ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर और सुरक्षित बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।
अगर इन तीनों कूटनीतिक प्रयासों को देखा जाए, तब यह स्पष्ट होता है कि भारत बहुस्तरीय रणनीति पर काम कर रहा है। एक ओर वह हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, दूसरी ओर अमेरिका के साथ तकनीकी और रक्षा संबंधों को गहरा कर रहा है, और साथ ही खाड़ी देशों के साथ ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। अंततः भारत अब वैश्विक राजनीति में संतुलन बनाने वाला नहीं, बल्कि संतुलन तय करने वाला देश बनता जा रहा है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह नई कूटनीतिक रणनीति भारत को एक ऐसी शक्ति के रूप में स्थापित कर रही है, जो न केवल अपने हितों की रक्षा करती है, बल्कि वैश्विक परिदृश्य को भी प्रभावित करने की क्षमता रखती है।

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