भारत-नेपाल सीमा पर ‘भंसार’ और ईंधन विवाद से बढ़ा तनाव
भारत-नेपाल सीमा पर ‘भंसार’ और ईंधन विवाद से बढ़ा तनाव
नेपाल में नए नियमों और ईंधन संकट से सीमा पर आर्थिक-प्रशासनिक टकराव गहराया
नई दिल्ली । भारत और नेपाल के बीच सीमा क्षेत्रों में इन दिनों ईंधन और कर नीति को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। नेपाल में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण वहां के वाहन चालक बड़ी संख्या में भारतीय सीमावर्ती इलाकों, खासकर बिहार में सस्ता ईंधन भरवाने पहुंच रहे हैं।
इस बढ़ती भीड़ के कारण स्थानीय पेट्रोल पंपों पर दबाव बढ़ गया है और भारतीय उपभोक्ताओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए नेपाली वाहनों के लिए ईंधन की आपूर्ति सीमित कर दी है। नेपाल में भारत के मुकाबले प्रेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण सस्ता ईंधन भरवाने नेपाली वाहन चालक बिहार का रुख कर रहे हैं। नए नियमों के तहत दोपहिया वाहनों को अधिकतम 3 लीटर, चारपहिया वाहनों को 10 लीटर और बड़े वाहनों को 20 लीटर तक ही ईंधन दिया जा रहा है। कुछ क्षेत्रों में यह सीमा और भी कम कर दी गई है, जिससे सीमा पर असंतोष बढ़ने की आशंका है।
इससे पहले नेपाल सरकार द्वारा भारतीय नंबर प्लेट वाली गाड़ियों पर ‘भंसार’ (कस्टम ड्यूटी) लागू करने के फैसले ने भी विवाद को जन्म दिया था। इस कदम को भारत की ओर से आर्थिक दबाव के रूप में देखा जा रहा है, जबकि नेपाल इसे राजस्व और नियंत्रण के उपाय के तौर पर पेश कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद अब केवल ईंधन आपूर्ति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच आर्थिक और प्रशासनिक टकराव का रूप लेता जा रहा है। सीमा क्षेत्रों में हालात संवेदनशील बने हुए हैं और स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। भारत और नेपाल के बीच पारंपरिक रूप से मजबूत संबंध रहे हैं, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने यह संकेत दिया है कि छोटे-छोटे आर्थिक फैसले भी द्विपक्षीय रिश्तों पर बड़ा असर डाल सकते हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच संवाद और समन्वय बेहद जरूरी हो गया है, ताकि सीमा पर सामान्य स्थिति बहाल की जा सके।
