Global brokerage firm Bernstein writes to PM Modi, calls for

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने पीएम मोदी को लिखा पत्र कहा- आर्थिक चुनौतियों का समाधान हो

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने पीएम मोदी को लिखा पत्र कहा- आर्थिक चुनौतियों का समाधान हो

नई दिल्ली । वैश्विक ब्रोकरेज कंपनी बर्नस्टीन ने भारत की आर्थिक विकास दर को लेकर अपनी ताजा रणनीतिक टिप्पणी में कुछ महत्वपूर्ण जोखिमों की ओर इशारा किया है। ‘प्रधानमंत्री को खुला पत्र’ शीर्षक वाले इस नोट में आगाह किया गया है कि यदि प्रमुख नीतिगत बाधाओं को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो भारत अपनी वास्तविक क्षमता से कमतर प्रदर्शन कर सकता है। जानकारों का मानना है कि इस तरह की टिप्पणियां वैश्विक निवेशकों के लिए दीर्घकालिक जोखिमों और अवसरों को समझने का एक माध्यम होती हैं।
बर्नस्टीन के अनुसार, भारत ने पूंजीगत व्यय पर ध्यान केंद्रित कर स्थिरता और आय वृद्धि को समर्थन देने का सही निर्णय लिया है, लेकिन वर्तमान सफलताओं के आधार पर भविष्य के प्रति अत्यधिक निश्चिंत होना जोखिम भरा हो सकता है। रिपोर्ट में विशेष रूप से बुनियादी ढांचे की कमी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए भारत की तैयारी पर सवाल उठाए गए हैं। एआई के बढ़ते प्रभाव से रोजगार के उन अवसरों पर संकट मंडरा रहा है, जो सीधे स्वचालन से प्रभावित हो सकते हैं। चेतावनी दी गई है कि भारत इन तकनीकों का केवल उपभोक्ता बनकर रह सकता है, जबकि इनके आर्थिक लाभ का बड़ा हिस्सा उसके हाथ से निकल सकता है। विनिर्माण क्षेत्र के संदर्भ में रिपोर्ट कहती है कि ‘चीन+1’ रणनीति का भारत को अब तक सीमित लाभ ही मिला है। आपूर्ति श्रृंखलाओं की कमजोरी, उन्नत विनिर्माण में कुशल प्रतिभा की कमी और धीमी क्रियान्वयन प्रक्रिया प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की रफ्तार को बाधित कर रही है। वहीं कृषि क्षेत्र में भी गंभीर संरचनात्मक अक्षमताएं देखी गई हैं, जहां देश की आधी कार्यशक्ति का जुड़ाव होने के बावजूद जीडीपी में इसका योगदान काफी कम है। सिंचाई और भंडारण में भारी निवेश की तत्काल आवश्यकता बताई गई है। रिपोर्ट में बढ़ते कल्याणकारी खर्च और नकद हस्तांतरण योजनाओं पर भी चिंता जताई गई है। बर्नस्टीन का तर्क है कि राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित इन योजनाओं में फंसा धन अनुसंधान एवं विकास और बुनियादी ढांचे के निर्माण में बाधा बन रहा है। वर्तमान में भारत का अनुसंधान पर खर्च जीडीपी का मात्र 0.6-0.7 प्रतिशत है, जो वैश्विक मानकों से बहुत पीछे है। अंत में, ब्रोकरेज फर्म ने ऊर्जा, परिवहन और कराधान जैसे क्षेत्रों में अधिक निर्णायक नीतिगत कार्रवाई की मांग की है, ताकि भारत अपने विकास मॉडल को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत बना सके।

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Date : 24 April 2026 Posted By : EDITOR
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने पीएम मोदी को लिखा पत्र कहा- आर्थिक चुनौतियों का समाधान हो
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ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने पीएम मोदी को लिखा पत्र कहा- आर्थिक चुनौतियों का समाधान हो

नई दिल्ली । वैश्विक ब्रोकरेज कंपनी बर्नस्टीन ने भारत की आर्थिक विकास दर को लेकर अपनी ताजा रणनीतिक टिप्पणी में कुछ महत्वपूर्ण जोखिमों की ओर इशारा किया है। ‘प्रधानमंत्री को खुला पत्र’ शीर्षक वाले इस नोट में आगाह किया गया है कि यदि प्रमुख नीतिगत बाधाओं को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो भारत अपनी वास्तविक क्षमता से कमतर प्रदर्शन कर सकता है। जानकारों का मानना है कि इस तरह की टिप्पणियां वैश्विक निवेशकों के लिए दीर्घकालिक जोखिमों और अवसरों को समझने का एक माध्यम होती हैं।
बर्नस्टीन के अनुसार, भारत ने पूंजीगत व्यय पर ध्यान केंद्रित कर स्थिरता और आय वृद्धि को समर्थन देने का सही निर्णय लिया है, लेकिन वर्तमान सफलताओं के आधार पर भविष्य के प्रति अत्यधिक निश्चिंत होना जोखिम भरा हो सकता है। रिपोर्ट में विशेष रूप से बुनियादी ढांचे की कमी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए भारत की तैयारी पर सवाल उठाए गए हैं। एआई के बढ़ते प्रभाव से रोजगार के उन अवसरों पर संकट मंडरा रहा है, जो सीधे स्वचालन से प्रभावित हो सकते हैं। चेतावनी दी गई है कि भारत इन तकनीकों का केवल उपभोक्ता बनकर रह सकता है, जबकि इनके आर्थिक लाभ का बड़ा हिस्सा उसके हाथ से निकल सकता है। विनिर्माण क्षेत्र के संदर्भ में रिपोर्ट कहती है कि ‘चीन+1’ रणनीति का भारत को अब तक सीमित लाभ ही मिला है। आपूर्ति श्रृंखलाओं की कमजोरी, उन्नत विनिर्माण में कुशल प्रतिभा की कमी और धीमी क्रियान्वयन प्रक्रिया प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की रफ्तार को बाधित कर रही है। वहीं कृषि क्षेत्र में भी गंभीर संरचनात्मक अक्षमताएं देखी गई हैं, जहां देश की आधी कार्यशक्ति का जुड़ाव होने के बावजूद जीडीपी में इसका योगदान काफी कम है। सिंचाई और भंडारण में भारी निवेश की तत्काल आवश्यकता बताई गई है। रिपोर्ट में बढ़ते कल्याणकारी खर्च और नकद हस्तांतरण योजनाओं पर भी चिंता जताई गई है। बर्नस्टीन का तर्क है कि राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित इन योजनाओं में फंसा धन अनुसंधान एवं विकास और बुनियादी ढांचे के निर्माण में बाधा बन रहा है। वर्तमान में भारत का अनुसंधान पर खर्च जीडीपी का मात्र 0.6-0.7 प्रतिशत है, जो वैश्विक मानकों से बहुत पीछे है। अंत में, ब्रोकरेज फर्म ने ऊर्जा, परिवहन और कराधान जैसे क्षेत्रों में अधिक निर्णायक नीतिगत कार्रवाई की मांग की है, ताकि भारत अपने विकास मॉडल को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत बना सके।

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