चंपत भूमिका पर फैसला होगा जल्द, गवाह या सह-आरोपी बनने पर सस्पेंस
चंपत भूमिका पर फैसला होगा जल्द, गवाह या सह-आरोपी बनने पर सस्पेंस
– राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला
अयोध्या। श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले के खुलासे के बाद ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय की भूमिका अब जांच के निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पूर्व महासचिव चंपत राय के बयान और गवाही को इस पूरे मामले में अभियोजन पक्ष के लिए बेहद मजबूत साक्ष्य माना जा रहा है। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जल्द ही यह तय हो जाएगा कि चंपत राय मुकदमे में मुख्य गवाह बनेंगे या फिर सह-आरोपी। हालांकि, अब तक की जांच में उनका पूरा सहयोग रहा है और उनके बयानों के आधार पर ही आरोपियों से पूछताछ की गई है, जिससे उनके मुख्य साक्षी बनने की संभावना अधिक दिखाई दे रही है।
एसआईटी और पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, दानपात्रों के चढ़ावे की गणना के दौरान बाथरूम में कुछ रुपये मिलने के बाद इस चोरी का खुलासा हुआ था। इसके बाद सक्रिय हुए चंपत राय ने संदिग्धों की तलाश की और 5 जून को पुलिस के साथ निकलकर करीब 80 लाख रुपये बरामद करवाए थे। इसके बाद ही एसआईटी का गठन हुआ और ट्रस्टी कृष्णमोहन की शिकायत पर 8 नामजद समेत अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। यद्यपि शुरुआती स्तर पर मामले को दबाने के प्रयास और चंपत राय द्वारा दी गई सफाई के कारण उनकी भूमिका पर सवाल उठने लगे थे, लेकिन बाद में विवाद बढ़ने पर उन्होंने ही राज्य सरकार से एसआईटी जांच की सिफारिश की थी।
कानूनी दृष्टिकोण से चंपत राय की गवाही इस पूरे मुकदमे की नींव बनेगी। उन्होंने पूछताछ के दौरान एसआईटी और पुलिस को हर सवाल का बेबाकी से जवाब दिया है और सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं। जांच अधिकारियों का मानना है कि यदि वह अदालत में आधिकारिक तौर पर गवाही देते हैं, तो आरोपियों पर दोष सिद्ध करना आसान हो जाएगा और मुकदमा बेहद मजबूत होगा। वहीं दूसरी ओर, यदि वह कानूनी तौर पर गवाही देने से पीछे हटते हैं, तो उन्हें भी इस मामले में सह-आरोपी बनाया जा सकता है। फिलहाल पुलिस और एसआईटी उनकी गवाही के आधार पर ही चार्जशीट को अंतिम रूप देने में जुटी है।
