Awarapan 2 Review: ‘आवारापन 2’ रिव्यू: इमरान हाशमी की दमदार वापसी, लेकिन पुराना जादू गायब
Awarapan 2 Review: ‘आवारापन 2’ रिव्यू: इमरान हाशमी की दमदार वापसी, लेकिन पुराना जादू गायब
कास्टः इमरान हाशमी, दिशा पाटनी
डायरेक्टर: नितिन कक्कड़
Rating – 3 / 5
‘आवारापन 2’ की कहानी
UNN @ Varsha Parikh : कहानी वहीं से आगे बढ़ती है, जहां शिवम पंडित (इमरान हाशमी) मौत को मात देने के बाद गुमनाम जिंदगी जी रहा है। लेकिन भारतीय इंटरपोल अधिकारी समर्थ उसे खोज निकालता है और बैंकॉक के एक खतरनाक चाइल्ड ट्रैफिकिंग रैकेट से मासूम बच्चों को बचाने में मदद मांगता है। अनाथ बच्ची आलिया से भावनात्मक जुड़ाव शिवम को इस मिशन में उतरने के लिए मजबूर कर देता है। बच्चों तक पहुंचने के लिए वह गैंगस्टर नफीसा से दुश्मनी मोल लेता है और उसके प्रतिद्वंद्वी अमृत सिंह के बेटे जोरावर के गैंग में शामिल हो जाता है। गैंगवार, धोखे और खतरों के बीच शिवम का मिशन सिर्फ बच्चों को बचाना नहीं, बल्कि उन्हें उस नर्क से आजाद कराना है। अब वह अपने मिशन में कामयाब होता है या नहीं, यही फिल्म की कहानी का सबसे बड़ा सस्पेंस है।
मूवी रिव्यू: ‘आवारापन 2’
2007 में आई ‘आवारापन’ ने इमरान हाशमी की ‘सीरियल किसर’ वाली इमेज से अलग उनकी एक रूहानी और दर्दभरी आशिक की पहचान बनाई थी। फिल्म भले ही बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं कर पाई, लेकिन ‘तेरा मेरा रिश्ता’ और ‘तो फिर आओ’ जैसे गानों ने इसे बाद में कल्ट क्लासिक बना दिया। अब करीब 19 साल बाद भट्ट कैंप ‘आवारापन 2’ के जरिए उसी पुराने नॉस्टैल्जिया को पर्दे पर वापस लाने की कोशिश करता है। इमरान हाशमी की शिवम पंडित के रूप में वापसी निश्चित तौर पर फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष है। उनकी आंखों में दर्द, एक्शन में गुस्सा और किरदार में इंटेंसिटी आज भी असर छोड़ती है।
