एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर वित्तीय, डिजिटल और टेक्नोलॉजी कौशल को आवश्यक जीवन कौशल बनाने पर दिया ज़ोर
एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर वित्तीय, डिजिटल और टेक्नोलॉजी कौशल को आवश्यक जीवन कौशल बनाने पर दिया ज़ोर
Mumbai: भारत युवा आबादी के लिहाज़ से विश्व में सबसे आगे है। फिर भी, हर साल लाखों युवा भारतीयों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह नहीं होता कि रोज़गार कैसे हासिल हो, बल्कि सबसे बड़ी गुत्थी यह होती है कि कमाए गए धन का प्रबंधन कैसे किया जाए। आर्थिक रूप से स्वतंत्र कैसे बना जाए? अपने पहले वेतन से क्या करना चाहिए? निवेश कैसे शुरू किया जाए? एआई आधारित दुनिया में कौन सा कौशल खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए आवश्यक होगा? देश के युवा ऐसे सवाल दृढ़ता से पूछ रहे हैं, और एचडीएफसी सिक्योरिटीज का मानना है कि इन पर भी करियर सलाह जितना ही ध्यान दिया जाना चाहिए।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस (इंटरनेशनल यूथ डे) के अवसर पर, वित्तीय वित्तीय साक्षरता को भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण कौशल में से एक के तौर पर रेखांकित कर रही है। जहां डिजिटल साक्षरता, एआई क्षमता और तकनीकी विशेषज्ञता रोज़गार की संभावनाओं को आकार दे रही हैं, वहीं वित्तीय साक्षरता यह तय करती है कि व्यक्ति अपनी आय को दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा में कैसे बदलता है। बजट बनाना, बचत करना, निवेश करना और भविष्य की योजना बनाना अब वैकल्पिक नहीं रह गया है, बल्कि यह ज़रूरी जीवन कौशल बनता जा रहा है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी, धीरज रेल्ली ने इस अवसर पर अपनी टिप्पणी में कहा: “कौशल से अवसर पैदा होते हैं, लेकिन वित्तीय कौशल से मज़बूती आती है। आज युवा देश के कार्यबल में शामिल हो रहे हैं, गिग इकॉनमी, उद्यमशीलता और डिजिटल अर्थव्यवस्था में करियर बना रहे हैं, ऐसे में धन का प्रबंधन करने और अनुशासन के साथ निवेश करने के बारे में जानना उतना ही महत्वपूर्ण हो जाता है जितनी कि पेशेवर विशेषज्ञता हासिल करना। एआई और टेक्नोलॉजी के आधार पर तैयार हो रही दुनिया में, वित्तीय साक्षरता से लोगों को संपत्ति सृजन, सोच-समझकर निर्णय लेने और अपनी शर्तों पर अर्थव्यवस्था में भाग लेने का आत्मविश्वास मिलता है।”उन्होंने कहा: “आज के युवाओं के पास पिछली किसी भी पीढ़ी की तुलना में अधिक जानकारी, निवेश के अवसर और डिजिटल माध्यम (टूल) उपलब्ध हैं। ऐसे में सफल निवेशक बनने के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ जानकारी तक पहुंच नहीं, बल्कि उस जानकारी का समझदारी से उपयोग करने की क्षमता होगी। जल्दी शुरुआत करना, लगातार निवेश करना और दीर्घकालिक नज़रिया बनाए रखना संपत्ति सृजन के लिए बेहद ज़रूरी है। वित्तीय साक्षरता से युवाओं को उनकी वित्तीय यात्रा के दौरान बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलती है, पहले वेतन से लेकर आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करने तक।”
एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने इस ज़रूरत को समझते हुए अपनी प्रमुख पहल नोयोरमनी (केवायएम) के ज़रिये वित्तीय साक्षरता बढ़ाने का प्रयास कर रही है। यह कार्यक्रम विशेष तौर पर उन सवालों के जवाब देने के लिए बनाया गया है जो युवा अक्सर पूछते हैं, जैसे ज़िम्मेदारी से बजट कैसे बनाया जाए, बचत और निवेश कैसे करें, और साथ ही वित्तीय योजना, आपातकालीन स्थिति के लिए कोष और पूंजी बाज़ार से जुड़ी बुनियादी बातों की समझ कैसे हासिल की जाए। केवायएम का लक्ष्य है, वित्तीय शिक्षा को व्यावहारिक, आसान और कारगर बनाना है। इसे इंटरैक्टिव ऐप, क्लासरूम लर्निंग, सामुदायिक कार्यशाला और वैगन्स लर्निंग फाउंडेशन, एम्पावर इंडिया और एक्सेस लाइवलीहुड्स फाउंडेशन जैसे विभिन्न संगठनों के साथ रणनीतिक भागीदारी के ज़रिए लोगों तक पहुंचाया जाता है।
