CNH has stepped up initiatives to promote crop residue

सीएनएच ने भारत में पराली प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की पहल तेज की

सीएनएच ने भारत में पराली प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की पहल तेज की

Mumbai: सीएनएच की पराली प्रबंधन से जुड़ी सीएसआर पहल ने एक दशक पूरा किया। पंजाब के कल्लर माजरी गांव से शुरू हुई यह पहल अब राष्ट्रीय कार्यक्रम बन चुकी है।
पंजाब और हरियाणा के किसानों को समय पर कलपुर्जे उपलब्ध कराने के लिए लुधियाना में नया कलपुर्जा भंडार शुरू किया गया।
सीएनएच ने बेलर मशीनों की पूरी श्रृंखला के माध्यम से कृषि में मशीनीकरण को बढ़ावा देना जारी रखा है। इससे भारत में सीबीजी संयंत्रों को भी सहायता मिल रही है।
लुधियाना: कृषि और निर्माण उपकरणों के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी कंपनी सीएनएच ने आज पराली प्रबंधन से जुड़ी अपनी सीएसआर पहल के 10 साल पूरे होने का अवसर मनाया। इस पहल की शुरुआत पंजाब के कल्लर माजरी गांव से हुई थी, जो अब राष्ट्रीय स्तर पर संचालित कार्यक्रम बन चुकी है। कंपनी ने इस अवसर पर लुधियाना में एक समर्पित स्पेयर पार्ट्स वेयरहाउस खोलने की भी घोषणा की। इन पहलों के जरिए सीएनएच का उद्देश्य मशीनीकरण, बिक्री के बाद भरोसेमंद सेवाओं और टिकाऊ खेती के तरीकों को देशभर के किसानों तक पहुंचाकर पराली प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
सीएनएच इंडिया के प्रेसिडेंट एवं मनेजिंग डायरेक्टर नरिंदर मित्तल ने कहा, “टिकाऊ खेती के लिए सही मशीनों और समय पर सहायता की उपलब्धता जरूरी है। जिन क्षेत्रों में धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच बहुत कम समय होता है, वहां फसल अवशेषों को जलाने से बचाने के लिए ट्रैक्टर, बेलर और असली स्पेयर पार्ट्स बेहद महत्वपूर्ण हैं। कल्लर माजरी से राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम तक का हमारा 10 साल का सफर सामूहिक प्रयासों के प्रभाव को दर्शाता है। वहीं, लुधियाना में नया वेयरहाउस महत्वपूर्ण कृषि सीजन के दौरान किसानों को बेहतर सहायता उपलब्ध कराएगा। हम टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के साथ कृषि उत्पादकता में सुधार के लिए प्रतिबद्ध हैं।
कल्लर माजरी से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची पहल
अक्टूबर 2017 में शुरू की गई इस सीएसआर पहल का पहला केंद्र पंजाब का कल्लर माजरी गांव था। बाद में इसे सीएनएच के व्यापक सस्टेनेबल एनवायरनमेंट सॉल्यूशन (एसईएस) कार्यक्रम के तहत शामिल किया गया। कल्लर माजरी में लगातार 10 वर्षों से पराली जलाने पर रोक की स्थिति बरकरार है।
पंजाब के एक गांव से शुरू हुई यह पहल अब 11 राज्यों के 25 स्थानों तक पहुंच चुकी है। इनमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तराखंड शामिल हैं। इसके अलावा, कर्नाटक के सिंधानूर और हुबली, आंध्र प्रदेश के नेल्लोर स्थित गुडूर मनाल और तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली स्थित लालगुड़ी को भी इस कार्यक्रम में शामिल किया गया है।
कार्यक्रम की शुरुआत से अब तक इसके तहत लगभग 60,000 टन धान के पुआल की बेलिंग की जा चुकी है। इससे करीब 39,900 एकड़ जमीन पर पराली जलाने से बचाव हुआ है और 7,500 से अधिक किसानों को लाभ मिला है। अनुमान है कि इस पहल के कारण लगभग 97,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का उत्सर्जन रोका जा सका। इसके अलावा, 16,000 से 20,000 परिवारों के सदस्यों और ग्रामीणों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिला।
देशभर के 25 अलग-अलग स्थानों पर 3,000 से 4,000 किसानों ने इन समाधानों के प्रदर्शन कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को पराली के टिकाऊ प्रबंधन के तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
भारत में 1998 से मौजूद न्यू हॉलैंड ने देश में फसल अवशेषों की बेलिंग को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभाई है। आज सीएनएच पराली प्रबंधन के लिए व्यापक उत्पाद रेंज उपलब्ध कराती है। इसमें न्यू हॉलैंड के ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर, स्क्वायर और राउंड बेलर, गायरो रेक, मल्चर, चॉपर और चारा काटने वाली हार्वेस्टिंग मशीनें शामिल हैं।.
किसानों के करीब पहुंचेंगे स्पेयर पार्ट्स और सर्विस
पराली प्रबंधन में सहायता और कटाई के सीमित समय के दौरान कृषि कार्यों को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से सीएनएच ने पंजाब और हरियाणा के ग्राहकों के लिए लुधियाना में नया स्पेयर पार्ट्स वेयरहाउस स्थापित किया है। यह केंद्र बड़े ट्रैक्टरों और बेलर के स्पेयर पार्ट्स की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया है। यहां सीएनएच के असली स्पेयर पार्ट्स समय पर उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे महत्वपूर्ण कृषि सीजन के दौरान मशीनों को लंबे समय तक चालू रखने में मदद मिलेगी। यह वेयरहाउस सप्ताह के सातों दिन काम करेगा। इसके लिए जीपीएस से लैस विशेष परिवहन बेड़ा तैयार किया गया है, जिसके जरिए भेजे जाने वाले सामान की स्थिति की रियल-टाइम ट्रैकिंग की जा सकेगी। कंपनी का लक्ष्य अधिकांश ग्राहकों तक 24 घंटे के भीतर स्पेयर पार्ट्स पहुंचाना है। इससे डिलीवरी में लगने वाला समय और मशीनों के बंद रहने की अवधि कम होगी। यह नया वेयरहाउस भारत में सीएनएच के 600 से अधिक डीलरों और 1,000 से ज्यादा संपर्क केंद्रों वाले नेटवर्क को और मजबूत करेगा।
ये दोनों पहल कृषि क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी तकनीक, विशेषज्ञता और साझेदारियों का उपयोग करने की सीएनएच की व्यापक रणनीति को दर्शाती हैं। भारत में मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के साथ कंपनी किसानों की बदलती जरूरतों के अनुरूप तकनीक आधारित समाधान उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ अधिक टिकाऊ खेती को भी प्रोत्साहित करना है।
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Date : 31 October 2026 Posted By : EDITOR
सीएनएच ने भारत में पराली प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की पहल तेज की
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सीएनएच ने भारत में पराली प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की पहल तेज की

Mumbai: सीएनएच की पराली प्रबंधन से जुड़ी सीएसआर पहल ने एक दशक पूरा किया। पंजाब के कल्लर माजरी गांव से शुरू हुई यह पहल अब राष्ट्रीय कार्यक्रम बन चुकी है।
पंजाब और हरियाणा के किसानों को समय पर कलपुर्जे उपलब्ध कराने के लिए लुधियाना में नया कलपुर्जा भंडार शुरू किया गया।
सीएनएच ने बेलर मशीनों की पूरी श्रृंखला के माध्यम से कृषि में मशीनीकरण को बढ़ावा देना जारी रखा है। इससे भारत में सीबीजी संयंत्रों को भी सहायता मिल रही है।
लुधियाना: कृषि और निर्माण उपकरणों के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी कंपनी सीएनएच ने आज पराली प्रबंधन से जुड़ी अपनी सीएसआर पहल के 10 साल पूरे होने का अवसर मनाया। इस पहल की शुरुआत पंजाब के कल्लर माजरी गांव से हुई थी, जो अब राष्ट्रीय स्तर पर संचालित कार्यक्रम बन चुकी है। कंपनी ने इस अवसर पर लुधियाना में एक समर्पित स्पेयर पार्ट्स वेयरहाउस खोलने की भी घोषणा की। इन पहलों के जरिए सीएनएच का उद्देश्य मशीनीकरण, बिक्री के बाद भरोसेमंद सेवाओं और टिकाऊ खेती के तरीकों को देशभर के किसानों तक पहुंचाकर पराली प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
सीएनएच इंडिया के प्रेसिडेंट एवं मनेजिंग डायरेक्टर नरिंदर मित्तल ने कहा, “टिकाऊ खेती के लिए सही मशीनों और समय पर सहायता की उपलब्धता जरूरी है। जिन क्षेत्रों में धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच बहुत कम समय होता है, वहां फसल अवशेषों को जलाने से बचाने के लिए ट्रैक्टर, बेलर और असली स्पेयर पार्ट्स बेहद महत्वपूर्ण हैं। कल्लर माजरी से राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम तक का हमारा 10 साल का सफर सामूहिक प्रयासों के प्रभाव को दर्शाता है। वहीं, लुधियाना में नया वेयरहाउस महत्वपूर्ण कृषि सीजन के दौरान किसानों को बेहतर सहायता उपलब्ध कराएगा। हम टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के साथ कृषि उत्पादकता में सुधार के लिए प्रतिबद्ध हैं।
कल्लर माजरी से राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची पहल
अक्टूबर 2017 में शुरू की गई इस सीएसआर पहल का पहला केंद्र पंजाब का कल्लर माजरी गांव था। बाद में इसे सीएनएच के व्यापक सस्टेनेबल एनवायरनमेंट सॉल्यूशन (एसईएस) कार्यक्रम के तहत शामिल किया गया। कल्लर माजरी में लगातार 10 वर्षों से पराली जलाने पर रोक की स्थिति बरकरार है।
पंजाब के एक गांव से शुरू हुई यह पहल अब 11 राज्यों के 25 स्थानों तक पहुंच चुकी है। इनमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तराखंड शामिल हैं। इसके अलावा, कर्नाटक के सिंधानूर और हुबली, आंध्र प्रदेश के नेल्लोर स्थित गुडूर मनाल और तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली स्थित लालगुड़ी को भी इस कार्यक्रम में शामिल किया गया है।
कार्यक्रम की शुरुआत से अब तक इसके तहत लगभग 60,000 टन धान के पुआल की बेलिंग की जा चुकी है। इससे करीब 39,900 एकड़ जमीन पर पराली जलाने से बचाव हुआ है और 7,500 से अधिक किसानों को लाभ मिला है। अनुमान है कि इस पहल के कारण लगभग 97,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का उत्सर्जन रोका जा सका। इसके अलावा, 16,000 से 20,000 परिवारों के सदस्यों और ग्रामीणों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिला।
देशभर के 25 अलग-अलग स्थानों पर 3,000 से 4,000 किसानों ने इन समाधानों के प्रदर्शन कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को पराली के टिकाऊ प्रबंधन के तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
भारत में 1998 से मौजूद न्यू हॉलैंड ने देश में फसल अवशेषों की बेलिंग को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभाई है। आज सीएनएच पराली प्रबंधन के लिए व्यापक उत्पाद रेंज उपलब्ध कराती है। इसमें न्यू हॉलैंड के ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर, स्क्वायर और राउंड बेलर, गायरो रेक, मल्चर, चॉपर और चारा काटने वाली हार्वेस्टिंग मशीनें शामिल हैं।.
किसानों के करीब पहुंचेंगे स्पेयर पार्ट्स और सर्विस
पराली प्रबंधन में सहायता और कटाई के सीमित समय के दौरान कृषि कार्यों को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से सीएनएच ने पंजाब और हरियाणा के ग्राहकों के लिए लुधियाना में नया स्पेयर पार्ट्स वेयरहाउस स्थापित किया है। यह केंद्र बड़े ट्रैक्टरों और बेलर के स्पेयर पार्ट्स की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया है। यहां सीएनएच के असली स्पेयर पार्ट्स समय पर उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे महत्वपूर्ण कृषि सीजन के दौरान मशीनों को लंबे समय तक चालू रखने में मदद मिलेगी। यह वेयरहाउस सप्ताह के सातों दिन काम करेगा। इसके लिए जीपीएस से लैस विशेष परिवहन बेड़ा तैयार किया गया है, जिसके जरिए भेजे जाने वाले सामान की स्थिति की रियल-टाइम ट्रैकिंग की जा सकेगी। कंपनी का लक्ष्य अधिकांश ग्राहकों तक 24 घंटे के भीतर स्पेयर पार्ट्स पहुंचाना है। इससे डिलीवरी में लगने वाला समय और मशीनों के बंद रहने की अवधि कम होगी। यह नया वेयरहाउस भारत में सीएनएच के 600 से अधिक डीलरों और 1,000 से ज्यादा संपर्क केंद्रों वाले नेटवर्क को और मजबूत करेगा।
ये दोनों पहल कृषि क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी तकनीक, विशेषज्ञता और साझेदारियों का उपयोग करने की सीएनएच की व्यापक रणनीति को दर्शाती हैं। भारत में मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के साथ कंपनी किसानों की बदलती जरूरतों के अनुरूप तकनीक आधारित समाधान उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ अधिक टिकाऊ खेती को भी प्रोत्साहित करना है।

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