Defence Minister Singh at DRDO conference

डीआरडीओ के सम्मलेन में रक्षा मंत्री सिंह, इतना बड़ा रक्षा बाजार हमारा इंतजार कर रहा

डीआरडीओ के सम्मलेन में रक्षा मंत्री सिंह, इतना बड़ा रक्षा बाजार हमारा इंतजार कर रहा

हमारा रक्षा बजट कई देशों की सकल घरेलू उत्पाद से भी बड़ा

नई दिल्ली । केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कया। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ ने कहा कि अगर आप हमारे रक्षा बजट का असर की गणना करे तब यह दुनिया के कुछ देशों के सकल घरेलू उत्पाद से भी बड़ा है। जब लोगों की मेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा रक्षा मंत्रालय को आवंटित होता है, तब हमारी जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। हमें प्रभावी विकास की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमारा रक्षा व्यय ऐसा होना चाहिए कि न केवल बजट बढ़े, बल्कि हम इसका सही तरीके से उपयोग भी कर सकें, सही समय पर सही उद्देश्य के लिए उचित तैनाती के ज़रिए।
रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि रक्षा अधिग्रहण परिषद ने पहली बार जेएम पोर्टल से पूंजीगत खरीद की अनुमति दी है, यह एक सराहनीय कदम है। मुझे बताया गया है कि विभाग रक्षा कर्मियों के लिए व्यापक वेतन प्रणाली और केंद्रीकृत डेटाबेस प्रबंधन पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दुनिया हमारे रक्षा क्षेत्र की ओर देख रही है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे सैनिकों ने जो पराक्रम दिखाया है, साथ ही जिस तरह से हमने अपने घरेलू उपकरणों की ताकत दिखाई है, उससे हमारे स्वदेशी रक्षा उत्पादों की मांग में वृद्धि हुई है। 2024 में विश्व सैन्य व्यय बढ़कर 2.7 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया है, इतना बड़ा रक्षा बाजार हमारा इंतजार कर रहा है।
रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि मुझे ऐसा लगता है कि हमारे विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ कागजों पर हिसाब-किताब रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के सुरक्षा ढांचे का एक अहम हिस्सा है। जब आप अपना काम ईमानदारी और क्षमता के साथ करते हैं, तब उसका असर सीमा पर तैनात जवानों तक होता है। उन्हें भरोसा होता है, कि उनके पीछे एक मजबूत व्यवस्था है, जो हर परिस्थिति में उनका साथ देगी। उन्होंने कहा कि रक्षा लेखा विभाग का नया आदर्श वाक्य ही अपने आप में बहुत कुछ कह देता है। अब इस संस्थान का आदर्श वाक्य- सतर्क, चुस्त, अनुकूल है। ये शब्द अपने आप में आपके कार्य संस्कृति का सार है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी भी संगठन में, परिवर्तनकारी सुधार लाने के दो तरीके होते हैं। कई बार हम देखते हैं, कि कई संगठन, बाहरी रिपोर्ट के माध्यम से इस कार्य को करते हैं। जिसमें कई बार परामर्शदाता कंपनियाँ की भी मदद ली जाती है। कई बार कुछ सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंपी जाती है। यह एक अच्छी बात है, इससे कई बार कुछ नए ताज़ा विचार इन संस्थानों में आते हैं, और इनकी उत्पादकता निश्चित रूप से बढ़ती है।

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Date : 08 July 2025 Posted By : EDITOR
डीआरडीओ के सम्मलेन में रक्षा मंत्री सिंह, इतना बड़ा रक्षा बाजार हमारा इंतजार कर रहा
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डीआरडीओ के सम्मलेन में रक्षा मंत्री सिंह, इतना बड़ा रक्षा बाजार हमारा इंतजार कर रहा

हमारा रक्षा बजट कई देशों की सकल घरेलू उत्पाद से भी बड़ा

नई दिल्ली । केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कया। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ ने कहा कि अगर आप हमारे रक्षा बजट का असर की गणना करे तब यह दुनिया के कुछ देशों के सकल घरेलू उत्पाद से भी बड़ा है। जब लोगों की मेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा रक्षा मंत्रालय को आवंटित होता है, तब हमारी जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। हमें प्रभावी विकास की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमारा रक्षा व्यय ऐसा होना चाहिए कि न केवल बजट बढ़े, बल्कि हम इसका सही तरीके से उपयोग भी कर सकें, सही समय पर सही उद्देश्य के लिए उचित तैनाती के ज़रिए।
रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि रक्षा अधिग्रहण परिषद ने पहली बार जेएम पोर्टल से पूंजीगत खरीद की अनुमति दी है, यह एक सराहनीय कदम है। मुझे बताया गया है कि विभाग रक्षा कर्मियों के लिए व्यापक वेतन प्रणाली और केंद्रीकृत डेटाबेस प्रबंधन पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दुनिया हमारे रक्षा क्षेत्र की ओर देख रही है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे सैनिकों ने जो पराक्रम दिखाया है, साथ ही जिस तरह से हमने अपने घरेलू उपकरणों की ताकत दिखाई है, उससे हमारे स्वदेशी रक्षा उत्पादों की मांग में वृद्धि हुई है। 2024 में विश्व सैन्य व्यय बढ़कर 2.7 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया है, इतना बड़ा रक्षा बाजार हमारा इंतजार कर रहा है।
रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि मुझे ऐसा लगता है कि हमारे विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ कागजों पर हिसाब-किताब रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के सुरक्षा ढांचे का एक अहम हिस्सा है। जब आप अपना काम ईमानदारी और क्षमता के साथ करते हैं, तब उसका असर सीमा पर तैनात जवानों तक होता है। उन्हें भरोसा होता है, कि उनके पीछे एक मजबूत व्यवस्था है, जो हर परिस्थिति में उनका साथ देगी। उन्होंने कहा कि रक्षा लेखा विभाग का नया आदर्श वाक्य ही अपने आप में बहुत कुछ कह देता है। अब इस संस्थान का आदर्श वाक्य- सतर्क, चुस्त, अनुकूल है। ये शब्द अपने आप में आपके कार्य संस्कृति का सार है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी भी संगठन में, परिवर्तनकारी सुधार लाने के दो तरीके होते हैं। कई बार हम देखते हैं, कि कई संगठन, बाहरी रिपोर्ट के माध्यम से इस कार्य को करते हैं। जिसमें कई बार परामर्शदाता कंपनियाँ की भी मदद ली जाती है। कई बार कुछ सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंपी जाती है। यह एक अच्छी बात है, इससे कई बार कुछ नए ताज़ा विचार इन संस्थानों में आते हैं, और इनकी उत्पादकता निश्चित रूप से बढ़ती है।

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