Dr. sharad pagare – डॉ. शरद पगारे प्रथम पुण्य स्मरण : शरद स्मृति प्रसंग 28 जून को ( Indore Press Club) इंदौर प्रेस क्लब में
Dr. sharad pagare – डॉ. शरद पगारे प्रथम पुण्य स्मरण : शरद स्मृति प्रसंग 28 जून को ( Indore Press Club) इंदौर प्रेस क्लब में
डॉ पगारे को 2020 के व्यास सम्मान से सम्मानित किया गया है. वे मध्यप्रदेश के पहले ऐसे साहित्यकार हैं जिन्हें देश के इस प्रतिष्ठित व्यास सम्मान से विभूषित किया गया.
इंदौर। वरिष्ठ साहित्यकार, प्रतिष्ठित व्यास सम्मान से सम्मानित डॉ. शरद पगारे के प्रथम पुण्य स्मरण पर इंदौर प्रेस क्लब सारस्वत आयोजन कर रहा है।शरद स्मृति प्रसंग के नाम से आयोजित यह कार्य क्रम 28 जून को शाम 5 बजे प्रेस क्लब के राजेंद्र माथुर सभाग्रह् में होगा। समारोह के मुख्य अतिथि ख्यात क्रिकेट कमेन्टेटर पद्मश्री सुशील दोषी होंगे। अध्यक्षता करेगे मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे। विशेष अतिथि होंगे इलाहबाद विश्वविधालय, प्रयागराज के हिंदी विभाग के प्रो. सुनील विक्रम सिंह। यह जानकारी सयोजक डॉ. सुशीम पगारे ने दी।

डॉ शरद पगारे ने अब तक का जीवन अध्ययन-अध्यापन, लेखन में व्यतीत किया है. वे इतिहास के जानेमाने विद्वान, जिज्ञासु शोधकर्ता और उम्दा प्राध्यापक रहे और शासकीय महाविद्यालय से सेवानिवृत्त होकर स्वतंत्र लेखन में संलग्न हैं. इतिहास विषय में एम.ए. और पी-एच.डी. की उपाधि हासिल करने वाले डॉ. पगारे को अपने सृजन कर्म के लिए मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी, भोपाल का विश्वनाथ सिंह पुरस्कार तथा वागीश्वरी पुरस्कार, अखिल भारतीय अंबिका प्रसाद ‘दिव्य’ पुरस्कार, सागर, मध्य प्रदेश लेखक संघ का भोपाल का अक्षर आदित्य अलंकरण जैसे कई पुरस्कार व सम्मान मिल चुके हैं. कुछ समय के लिए उन्होंने बैंकॉक के शिल्पकर्ण विश्वविद्यालय में भी विजिटिंग प्रोफेसर के रुप में अपनी सेवाएं दीं.
गौरतलब है कि डॉ पगारे ने अपने उपन्यासों में इतिहास की कई गुमनाम स्त्रियों को पहचान दी है. ‘पाटलीपुत्र की सम्राज्ञी’ में चक्रवर्ती सम्राट अशोक की माता धर्मा के जीवन के अनछुए पहलुओं को दर्शाया, तो गुमनामी के अंधेरे में ही डूबे एक और पात्र ‘गुलारा बेगम’ पर भी लिखा. शाहजहां की प्रेमिका ‘गुलारा बेगम’ पर आधारित इस उपन्यास के 11 संस्करण छप चुके हैं. इस उपन्यास का मराठी, गुजराती, मलयालम, उर्दू, पंजाबी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है. गुलारा बेगम की ही तरह आलमगीर कहलाने वाले सख्त मिजाज औरंगजेब की प्रेमकथा को भी उन्होंने उपन्यास का रूप दिया है. बेगम जैनाबादी, जो औरंगजेब की प्रेमिका थी, का नाम और उनकी रुमानी दास्तां भी इतिहास के पन्नों में कहीं खो चुकी थी. डॉ पगारे ने अपनी कलम से इस खो चुकी सच्ची रूमानी कहानी को भी अमर करने का प्रयास किया है.
इतिहास विषय से इतर डॉ पगारे के नक्सली समस्या पर लिखे गए उपन्यास ‘उजाले की तलाश’ भी खूब चर्चित रहा, इसका अनुवाद अंग्रेजी में भी किया गया है. इसके अंग्रेजी उपन्यास की चर्चा, हिंदी उपन्यास से कहीं ज्यादा रही है. डॉ पगारे के अब तक 8 उपन्यास और 10 कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. डॉ पगारे ने भारत के ऐतिहासिक महत्त्व की 16 कहानियों पर एक किताब लिखी है, जिन्हें वह भारत की श्रेष्ठ प्रेम कहानियां कहते हैं. उनका दावा है कि विश्व साहित्य या किसी अन्य देश में ऐसी कोई किताब नहीं है, जिसमें प्रेम पर आधारित 16 कहानियों का संकलन हो और इन कहानियों का ऐतिहासिक प्रमाण भी मिलता हो.
