54 साल के हुए गांगुली, प्रशंसकों ने दी बधाई
54 साल के हुए गांगुली, प्रशंसकों ने दी बधाई
कोलकाता । भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली आज 54 साल के हो गये हैं। इस अवसर पर उन्हें प्रशंसकों और साथी खिलाड़ियों ने बधाई दी है। गांगुली ऐसे कप्तान रहे हैं जिन्होंने भारतीय क्रिकेट को बदलकर रख दिया। गांगुली ने ही टीम को आक्रामक बनाकर लड़ना सिखाया। इसी का परिणाम है कि अब टीम विदेशी धरती पर भी किसी भी प्रकार के हालात में निडर होकर खेलती है। गांगुली को जब साल 2000 में भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी सौंपी गई थी। तब टीम फिक्सिंग के आरोपों से जूझ रही थी। 83 की विश्व विजेता होने के बावजूद कमजोर टीमों में गिनी जाती थी। विदेशों में जीत तो भारतीय टीम के लिए सपना हुआ करती थी। तभी गांगुली कप्तानी संभालते हैं और अपनी नेतृत्व क्षमता से भारतीय क्रिकेट का चेहरा ही बदल देते हैं। गांगुली को बंगाल टाइगर, दादा, प्रिंस ऑफ कोलकाता जैसे नामों से भी जाना जाता है।
गांगुली की सबसे बड़ी खूबी खिलाड़ियों की परख और उनसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराना थी। कप्तानी संभालने के बाद गांगुली ने उन खिलाड़ियों को अवसर दिया जिन्होंने आगे चलकर भारतीय क्रिकेट को शीर्ष पर पहुंचाया। इनमें स्टार ऑलराउंडर युवराज सिंह, मोहम्मद कैफ, हरभजन सिंह, जहीर खान, आशीष नेहरा, गौतम गंभीर, महेन्द्र सिंह धोनी और वीरेंद्र सहवाग जैसे नाम हैं। इन सभी को अवसर देने में गांगुली की अहम भूमिका थी।
गांगुली की कप्तानी में भारत ने निडर होक क्रिकेट खेलना शुरू किया। इस वजह से टीम को टेस्ट और एकदिवसीय दोनों ही प्रारुपों में बड़ी सफलता मिली
गांगुली की कप्तानी में भारत ने विदेश में जीतना सीखा। नेटवेस्ट ट्रॉफी 2002 के फाइनल में भारतीय टीम ने इंग्लैंड को उसकी धरती पर हराया. भारत ने टेस्ट में विदेश में अपना प्रभाव जमाना और जीतना गांगुली के दौर में ही सीखा. गांगुली 2005 तक कप्तान रहे. पांच साल के अपने कार्यकाल में फिक्सिंग के आरोपों का सामना करने वाली टीम को उन्होंने दुनिया की मजबूत क्रिकेट टीम बना दिया। गांगुली ने धोनी को दिनेश कार्तिक पर प्राथमिकता दी थी। इसके बाद धोनी न सिर्फ भारत के सर्वश्रेष्ठ और सफलतम कप्तान बने।
इसके बाद गांगुली जब बीसीसीआई अध्यक्ष थे, तब विराट की जगह रोहित शर्मा को कप्तान बनाने का फैसला उन्होंने ही लिया था।
