‘Gen-Z शांत मन से नहीं सोचते, जो बात सही लगती, उसी की ओर हो जाते हैं आकर्षित’ – मोहन भागवत
‘Gen-Z शांत मन से नहीं सोचते, जो बात सही लगती, उसी की ओर हो जाते हैं आकर्षित’ – मोहन भागवत
UNN: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि विवाह एक ऐसा अनुशासन है, जो धर्म को स्थापित करता है, जबकि ‘सह-जीवन’ (Co-Living) संबंध की वास्तविकता पूरी दुनिया में देखी जा सकती है। मोहन भागवत ने हैदराबाद के विश्व मांगल्य सभा द्वारा ‘समकालीन मातृत्व’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ये बात कही। साथ ही भागवत ने Gen-Z को लेकर भी बड़ा बयान दिया है।
Gen-Z दूसरों की देखा-देखी चीजें हैं करते
मोहन भागवत ने कहा कि ‘Gen-Z’ वाले दूसरों की देखा-देखी चीजें करते हैं, भावुक होते हैं और शांत मन से नहीं सोचते। भागवत ने कहा कि Gen-Z वालों को जो बात सही लगती है, उसी की ओर वे आकर्षित हो जाते हैं।
विवाह एक अनुशासन, जो धर्म को स्थापित करता है
उन्होंने कहा, ‘विवाह एक अनुशासन है, जो धर्म को स्थापित करता है। इसका विकल्प ‘सह-जीवन’ (Co-Living) संबंध है। इसके परिणाम क्या हैं? हमें जिम्मेदारियां नहीं, बल्कि सिर्फ खुशी चाहिए। जब तक मन हो साथ रहो और जब मन न हो तो अलग हो जाओ। कोई जिम्मेदारी नहीं। इससे क्या बढ़ेगा? क्या बढ़ रहा है, दुनिया भर में यह देखा जा सकता है।’
समय के साथ बदलना भी परंपराओं का नियम
उन्होंने कहा कि हालांकि, आधुनिकता भी जरूरी है। समय के साथ बदलना भी देश की परंपराओं का एक नियम है। ‘सह-जीवन’ संबंध का परोक्ष रूप से उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह पश्चिमी संस्कृति की नकल है।
आधुनिकता का किया जाना चाहिए स्वागत
भागवत ने कहा कि आधुनिकता का स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एलजीबीटीक्यू समुदाय समाज का हिस्सा है और उन्हें हीन दृष्टि से नहीं देखना चाहिए। भागवत ने कहा कि माता-पिता को मोबाइल फोन के उपयोग में अनुशासन अपनाना चाहिए।
