केरल कलाक्षेत्रम् (वसई) द्वारा भव्य भरतनाट्यम् आरंगेत्रम् प्रस्तुति
केरल कलाक्षेत्रम् (वसई) द्वारा भव्य भरतनाट्यम् आरंगेत्रम् प्रस्तुति
Mumbai: मुंबई के प्रसिद्ध लता मंगेशकर सभागार में 31 अक्तूबर को केरल कलाक्षेत्रम् (वसई) की ओर से दस युवा किशोर नर्तकियों की भरतनाट्यम् आरंगेत्रम् (प्रथम प्रस्तुति) भव्य रूप से आयोजित की गई।
यह अवसर उन सभी नवोदित नृत्यांगनाओं के लिए एक सपने के साकार होने जैसा था, जब वे पहली बार मंच पर अपने गुरु, माता-पिता और दर्शकों के आशीर्वाद के साथ उतरीं। वातावरण में उत्साह और भावनाओं का सुंदर संगम झलक रहा था। संस्थान का नेतृत्व प्रख्यात भरतनाट्यम् गुरु कलामंडलम राजीथा नायर कर रही हैं, जो पिछले 17 वर्षों से भरतनाट्यम्, मोहिनीयाट्टम् और कुचिपुड़ी की शिक्षा दे रही हैं। उनके शिष्य अखिल भारतीय गंधर्व महाविद्यालय मंडल से अपनी परीक्षाएँ उत्तीर्ण करते हैं। कार्यक्रम की शुरुआत पुष्पांजलि से हुई, जिसमें नर्तकियों ने भगवान नटराज, गणेश और सरस्वती को नमन किया। इसके बाद आलारिप्पू, जतिस्वरम, शब्दम, तथा भगवान कृष्ण को समर्पित सुंदर वर्णम प्रस्तुत किया गया। फिर भगवान विष्णु के दस अवतारों पर आधारित दशावतारम को नाटकीय शैली में प्रस्तुत किया गया और समापन स्वाति तिरुनाल की धनाश्री तिल्लाना से हुआ। सभी प्रस्तुतियाँ ताल, लय और भाव की दृष्टि से अत्यंत मनमोहक थीं। इस अवसर पर मंच को सुशोभित करने वाली नर्तकियाँ थीं — श्रीनिधि अमरदासन नायर, आनामिका जयराज, अणिका महेश, अन्वी श्रीवास्तव, आर्या ए. नायर, नंदिनी एन. पाटिल, सृष्टि मंचेकर, सुहाना मैती, स्वस्ती नाइक और वेदा एस. कुमार। संगीतमय ऑर्केस्ट्रा का नेतृत्व गुरु राजीथा नायर ने नत्तुवांगम पर किया। साथ में वोकल पर डॉ. ओमनाकुट्टन नायर, मृदंगम पर आर. शक्तिधरण, वायलिन पर शेखर तंजोरकर और बाँसुरी पर राघवेन्द्र बालिगा थे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे — भरतनाट्यम् गुरु सुमित्रा राजगुरु, कुचिपुड़ी विशेषज्ञ एवं कला समीक्षक विजय शंकर और समाजसेवी दीपक त्रिपाठी। कार्यक्रम का संचालन ऐश्वर्या नायर ने किया।
