Happy Holi – होली 2026 : रंगों में रची आस्था, परंपरा और नवउत्साह की कहानी
Happy Holi – होली 2026 : रंगों में रची आस्था, परंपरा और नवउत्साह की कहानी
मालवा–निमाड़ की रंगीली परंपरा
UNN: मध्यप्रदेश में होली का उत्साह विशेष रूप से जनजातीय अंचलों में देखने को मिलता है। झाबुआ और अलीराजपुर में मनाया जाने वाला भगोरिया पर्व होली से पहले सामाजिक मेल-मिलाप और संस्कृति के उत्सव का अनूठा उदाहरण है। मांदल की थाप, पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य और रंगों की बौछार — भगोरिया हाट में युवा अपने जीवनसाथी चुनने की परंपरा भी निभाते हैं। यह उत्सव प्रेम, स्वतंत्रता और सामाजिक समरसता का प्रतीक है।
फूलों की होली (वृंदावन, उत्तर प्रदेश):
फूलों की होली वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में एकादशी के दिन मनाई जाती है। यहाँ रंगों या गुलाल की जगह ताजे फूलों की पंखुड़ियों का उपयोग किया जाता है। मंदिर के पुजारी भक्तों पर फूल बरसाते हैं। भक्त भगवान पर फूल और गुलाल उड़ाते हैं।
ब्रज की ऐतिहासिक होली
उत्तर प्रदेश के मथुरा–वृंदावन क्षेत्र में होली का आध्यात्मिक स्वरूप अद्भुत होता है। मथुरा और वृंदावन की गलियों में राधा–कृष्ण की लीलाओं की झलक मिलती है। बरसाने की लठमार होली और फूलों की होली विश्वभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
सामाजिक और पर्यावरणीय संदेश
होली हमें सिखाती है—
रिश्तों में जमी धूल को प्रेम के रंगों से साफ करना।
समाज में भाईचारा और एकता को मजबूत करना।
प्राकृतिक और हर्बल रंगों का उपयोग कर पर्यावरण की रक्षा करना।
नई शुरुआत की होली
होली 2026 केवल एक पर्व नहीं, बल्कि एक भाव है—
नई उम्मीदों का, नए सपनों का और जीवन में खुशियों के नए रंग भरने का।
आइए, इस होली पर हम नफरत की जगह प्रेम, दूरी की जगह अपनापन और निराशा की जगह उम्मीद के रंग भरें।
आप सभी को होली 2026 की मंगलमय शुभकामनाएं!

