Indore This is share happiness young Divyanshu Patel

Indore : MP – खुशी बांटने का एक तरीका यह भी – युवा दिव्यांशु पटेल

 

Indore : MP – खुशी बांटने का एक तरीका यह भी – युवा दिव्यांशु पटेल

अपना 23वां जन्मदिन माता-पिता के साथ मिलकर गौ सेवा के नाम से मनाया

इंदौर – आधुनिकता की इस चकाचौंध में जहां आजकल लोग अपने जन्मदिन बड़े-बड़े होटलों में धूमधाम से मानते है। वहीं इस भाग दौड़ व चकाचौंध को छोड़कर अपने जन्मदिन को सादगी से मनाने वालों की भी कमी नहीं है। वही आज के युवा दिव्यांशु पटेल ने गोशाला में जाकर सादगी से अपना जन्मदिन मनाया है। यह एक दिलचस्प और सकारात्मक बदलाव है, युवाओं द्वारा जन्मदिन गोशाला (गायों के आश्रय स्थल) में जाकर समाज की भलाई और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को दर्शाता है। गोशाला में जन्मदिन मनाने से युवाओं में इस परंपरा को आगे बढ़ाने की भावना पैदा होती है।

दिव्यांशु पटेल का कहना है की भारतीय संस्कृति में गायों को विशेष स्थान प्राप्त है, गोशाला में जाकर गायों को चारा, पानी या दान देना समाज के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराता है। कहना है गायों की गोबर और गौमूत्र का उपयोग जैविक खेती और अन्य पारंपरिक कार्यों में होता है, जो पर्यावरण के लिए लाभकारी होते हैं। दिव्यांशु पटेल ने अपने जन्मदिन पर गोशाला में गायों को केला, गुड़, खल,कपासिया, चारा खिलाकर अपने कुल देवता को नमन करने के बाद माता-पिता से आशीर्वाद लिया है।
गोशाला में जाकर आज के युवा समाज से जुड़ने और साथ में कुछ अच्छा करने का अनुभव प्राप्त करते हैं, जिससे उनकी सामाजिक और मानसिक दृष्टि भी विकसित होती है।

 

 

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Date : 11 November 2024 Posted By : EDITOR
Indore : MP – खुशी बांटने का एक तरीका यह भी – युवा दिव्यांशु पटेल
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Indore : MP - खुशी बांटने का एक तरीका यह भी - युवा दिव्यांशु पटेल

अपना 23वां जन्मदिन माता-पिता के साथ मिलकर गौ सेवा के नाम से मनाया

इंदौर - आधुनिकता की इस चकाचौंध में जहां आजकल लोग अपने जन्मदिन बड़े-बड़े होटलों में धूमधाम से मानते है। वहीं इस भाग दौड़ व चकाचौंध को छोड़कर अपने जन्मदिन को सादगी से मनाने वालों की भी कमी नहीं है। वही आज के युवा दिव्यांशु पटेल ने गोशाला में जाकर सादगी से अपना जन्मदिन मनाया है। यह एक दिलचस्प और सकारात्मक बदलाव है, युवाओं द्वारा जन्मदिन गोशाला (गायों के आश्रय स्थल) में जाकर समाज की भलाई और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को दर्शाता है। गोशाला में जन्मदिन मनाने से युवाओं में इस परंपरा को आगे बढ़ाने की भावना पैदा होती है।

दिव्यांशु पटेल का कहना है की भारतीय संस्कृति में गायों को विशेष स्थान प्राप्त है, गोशाला में जाकर गायों को चारा, पानी या दान देना समाज के प्रति जिम्मेदारी का अहसास कराता है। कहना है गायों की गोबर और गौमूत्र का उपयोग जैविक खेती और अन्य पारंपरिक कार्यों में होता है, जो पर्यावरण के लिए लाभकारी होते हैं। दिव्यांशु पटेल ने अपने जन्मदिन पर गोशाला में गायों को केला, गुड़, खल,कपासिया, चारा खिलाकर अपने कुल देवता को नमन करने के बाद माता-पिता से आशीर्वाद लिया है।
गोशाला में जाकर आज के युवा समाज से जुड़ने और साथ में कुछ अच्छा करने का अनुभव प्राप्त करते हैं, जिससे उनकी सामाजिक और मानसिक दृष्टि भी विकसित होती है।

 

 

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