Major Political Rajya Sabha MPs Raghav Chadha Join BJP

आप में बड़ा सियासी भूचाल: राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल

आप में बड़ा सियासी भूचाल: राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल

– 22 दिन में आप में टूट, दो-तिहाई सांसदों ने किया बीजेपी में विलय का ऐलान, आप को झटका
– घायल हूं, इसलिए घातक हूं” : राघव चड्ढा
– ईडी कार्रवाई के बीच अशोक मित्तल का इस्तीफा,
– राज्यसभा में आप कमजोर, BJP की ताकत बढ़ी
– आप में अंदरूनी कलह आई सामने

नई दिल्ली । आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर चल रहा सियासी संकट अब बड़े राजनीतिक भूचाल में बदल गया है। पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को इस्तीफा देते हुए भाजपा में शामिल होने का ऐलान कर दिया। उनके साथ संदीप पाठक, अशोक मित्तल समेत कुल सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया है।
राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आप के 10 राज्यसभा सांसदों में से दो-तिहाई यानी सात सांसदों ने संविधान के प्रावधानों के तहत भाजपा में विलय का फैसला किया है। उनके साथ हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रमजीत साहनी भी भाजपा में शामिल होंगे।
इस घटनाक्रम की शुरुआत 2 अप्रैल 2026 को हुई थी, जब पार्टी ने राघव चड्ढा के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटा दिया था। इसके बाद से ही पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आने लगी थीं। राघव ने उस समय बयान दिया था कि “मैं घायल हूं, इसलिए घातक हूं” और “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझना”, जिसने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक रहस्यमय बना दिया था। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व को राघव चड्ढा की सक्रियता में कमी और कुछ मुद्दों पर उनकी चुप्पी को लेकर आपत्ति थी। वहीं, चड्ढा समर्थक इसे अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व संकट का परिणाम बता रहे हैं। अशोक मित्तल का पार्टी छोड़ना भी चर्चा में है, क्योंकि उनके यहां हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई हुई थी। इसके बाद उनका इस्तीफा राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर रहा है। आप के लिए यह घटनाक्रम खासतौर पर पंजाब में बड़ा झटका माना जा रहा है, जहां पार्टी की मजबूत स्थिति रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि 2027 के विधानसभा चुनावों में इस राजनीतिक बदलाव का क्या असर पड़ेगा। भाजपा के लिए यह घटनाक्रम राज्यसभा में मजबूती बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है, जबकि AAP को अपने संगठन और नेतृत्व को लेकर गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

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