The claim of 'saffron in every grain' has become a problem

‘दाने-दाने में केसर’ दावा बना मुसीबत, बॉलीवुड सितारों के दावे पर जनता ने उठाई उंगली

‘दाने-दाने में केसर’ दावा बना मुसीबत, बॉलीवुड सितारों के दावे पर जनता ने उठाई उंगली

– राज्य उपभोक्ता आयोग ने अजय, शाहरुख, अक्षय और टाइगर को किया तलब

– गुना के बिट्टल ने हिलाया बॉलीवुड का सिंहासन

गुना । क्या 10 के पान मसाले में वह केसर हो सकता है जिसकी कीमत बाजार में 4 से 4.5 लाख रुपए प्रति किलो है? क्या दाने-दाने में केसर का दम कहने वाले बॉलीवुड के महानायक जनता को गुमराह कर रहे हैं? इन सुलगते सवालों के बीच मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए फिल्म जगत के दिग्गजों और पान मसाला निर्माता कंपनी को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
सुपरस्टारों की बढ़ी मुश्किलें, 5 मार्च को होना होगा पेश
गुना के जागरूक नागरिक बिट्टल अहिरवार की अपील पर सुनवाई करते हुए राज्य उपभोक्ता आयोग ने विमल पान मसाला की निर्माता कंपनी जेब इंडस्ट्रीज के साथ-साथ इसके ब्रांड एंबेसडर अजय देवगन, शाहरुख खान, अक्षय कुमार और टाइगर श्रॉफ को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा गुना के रसीला पान भंडार को भी पक्षकार बनाया गया है। आयोग ने पहले इन्हें 20 जनवरी 2026 को तलब किया था, लेकिन किसी के उपस्थित न होने पर अब 5 मार्च 2026 को पेश होकर जवाब देने का अंतिम आदेश दिया है।
केसर के दम पर बिट्टल का बड़ा सवाल
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब बिट्टल अहिरवार ने अपने मित्र के लिए विमल का पाउच खरीदा। विज्ञापनों में दाने-दाने में केसर का दावा करने वाले इस ब्रांड के पैकेट पर जब बिट्टल ने कंटेंट्स (सामग्री सूची) देखी, तो वहां केसर का कोई नामोनिशान नहीं था। बिट्टल ने अपने अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह यादव के माध्यम से पहले जिला उपभोक्ता फोरम में परिवाद लगाया था, जहाँ से तकनीकी कारणों से मामला खारिज होने के बाद उन्होंने अधिवक्ता अनुराग खासकलम के माध्यम से राज्य आयोग में अपील एफए/25/1678 दायर की। बिट्टल का तर्क सीधा और दमदार है जब असली केसर 4 लाख किलो है, तो 10 के पाउच में इसका दम कैसे आ सकता है?
पद्मश्री लौटाने और विज्ञापनों पर रोक की मांग
अपीलकर्ता ने आयोग के समक्ष दलील दी है कि ये चारों सुपरस्टार देश के युवाओं के रोल मॉडल हैं। लोग इन्हें अपना आदर्श मानकर इनके द्वारा प्रचारित उत्पादों का सेवन शुरू कर देते हैं, जिससे कम उम्र में ही युवा कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों और शारीरिक कमजोरी का शिकार हो रहे हैं। बिट्टल ने मांग की है कि भ्रामक प्रचार करने वाले इन सितारों से राष्ट्रपति द्वारा दिए गए पद्मश्री जैसे सम्मान वापस लिए जाने चाहिए। जनता को गुमराह करने वाले इन विज्ञापनों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगनी चाहिए। दावा साबित न होने पर कंपनी और सितारों पर भारी जुर्माना लगाया जाए।
प्रशासनिक और कानूनी गलियारों में हलचल
गुना के एक छोटे से पाउच से शुरू हुई यह लड़ाई अब बॉलीवुड के गलियारों तक पहुँच गई है। यदि कंपनी और ये सितारे आयोग के समक्ष यह साबित करने में नाकाम रहे कि उनके उत्पाद में वाकई केसर है, तो उन्हें न केवल लाखों का जुर्माना भरना पड़ सकता है, बल्कि उनकी साख पर भी बड़ा बट्टा लगेगा।

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