The cultivation of the Aparajita flower, known for its medicinal

भारत में औषधि गुणों के अपराजिता फूल की खेती बढ़ी

भारत में औषधि गुणों के अपराजिता फूल की खेती बढ़ी

– अच्छी कमाई के कारण किसानों की रुचि बढ़ी

नईदिल्ली । अपराजिता फूल जिसे भारत में बटरफ्लाई पी के नाम से जाना जाता है।भारतीय किसान अच्छे दाम मिलने के कारण इस फूल की खेती कर रहे हैं। भारतीय किसान थाईलैंड और इंडोनेशिया को अब टक्कर देने की स्थिति में आ गए हैं।
अमेरिका और यूरोप के देशों में कृत्रिम रंगों पर कड़े नियम के कारण नीले फूलों की मांग बड़ी तेजी के साथ बढ़ रही है। यह फूल अपने औषधि गुणों और रंग के कारण पहचाना जा रहा है। इसकी मांग निरंतर बढ़ रही है।
इस फूल को गर्म पानी में डालने पर पानी का रंग नीला हो जाता है। इसमें नींबू डाल देने से इसका रंग बैगनी हो जाता है। अभी तक इसकी खेती थाईलैंड और इंडोनेशिया के किसान करते थे। जिस तरह से इसकी मांग वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है। भारतीय किसानों ने इसका उत्पादन बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया है।
औषधि गुण
अपराजिता के फूलों पर विभिन्न रूप से अध्ययन किया जा रहा है। मद्रास के रामचंद्र इंस्टीट्यूट की एसोसिएट प्रोफेसर वी सुप्रिया का कहना है। डायबिटीज के लोगों ने जब इस फूल से बनी चाय पी, तो उनके शुगर लेबल में बड़े परिवर्तन देखने को मिले हैं।2021 में अमेरिका के फुड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने अपराजिता फूल को फूड एडिटिव के रूप में मंजूरी दी है।
असम में इस फूल की खेती बड़े पैमाने पर होने लगी है।यह एक साधारण बेल वाला पौधा है।यहां पर अब इसकी व्यावसायिक खेती का चलन बढ़ता चला जा रहा है। भारत में इसका उपयोग डायबिटीज के मरीज बड़ी मात्रा में करने लगे हैं। प्राकृतिक रंगों के कारण इसकी वैश्विक स्तर पर मांग बढ़ रही है।

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