VHP organizes event on the 350th martyrdom year of Guru

गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान वर्ष पर विहिप का आयोजन

गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान वर्ष पर विहिप का आयोजन

Indore : विश्व हिंदू परिषद गुरु तेग बहादुर जी के 350 वे बलिदान वर्ष पर सिख समाज के 9 गुरु तेग बहादुर जी के 350 वां बलिदान वर्ष के अवसर पर विश्व हिंदू परिषद इंदौर विभाग द्वारा जाल सभागृह कार्यक्रम आयोजित किया गया.कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री विनीथ जी नवाथे (प्रान्त कारवाहक, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, मालवा प्रान्त ) ने बताया कि गीता जी मे जो उपदेश दिया गया है कि गुरु परंपरा को अपने कर्म मे उतारे। तेगबहादुर जी कि शहादत महर्षि दधीच के बाद दधीच जी जैसी ही शहादत थी जिसे कभी नहीं भुला जा सकता है। उन्होंने बताया कि भारत के बाहर के पंथ और हमारे भारत के पंथ मे यही अंतर है कि हम बंधुत्व को मानते है और यही हमारा सूत्र है और तेगबहादुर जी ने अस्तित्व, अस्मिता के साथ बधुत्व को बढ़ाया। उन्होंने बताया कि सभी चाहते है कि उनका धर्म संप्रदाय बढे पर अपने धर्म का प्रचार प्रचार के बढे, धर्म को कँवर्ट कर कभी भी नहीं बढे। स्वामी विवेकानन्द जी ने भी अन्य देशो मे हमारे धर्म के बारे मे बताया पर कभी किसी भी धर्म को बदल कर दूसरे धर्म मे जाने के लिए नहीं कहा। उन्होंने बताया कि देश मे जितने आक्रांता आये उनमे अधिकतर पंजाब कि और से आये जिसे पंजाब ने अपने उपर झेला और हिन्दुओ कि रक्षा कि। श्री सुरजीत सिंह जी टुटेजा ने कार्यक्रम कि प्रस्तावना रखी जिसमे गुरु टैग बहादुर जी कि बहादुरी एवं बलिदान के बारे मे सभी को बताया एवं जन्म मरण से उपर परोपकार हे का सन्देश दिया। परम गौ सेवी संत श्री अच्युतानद जी महाराज ने अपने उद्बोधन मे हमें हर गुरु ने यही सिख दी है कि हम धर्म के लिए अपना शीश दे सकते है पर कभी धर्म नहीं बदल सकते। उन्होंने बताया कि तेगबहादुर जी ने कहा था कि मेरे बलिदान के बाद भी कई तेगबाहादुर पैदा होंगे और देश के लिए लड़ेंगे.श्री गुरु सिंग सभा इंदौर के अध्यक्ष श्री हरपाल सिंह जी भाटिया मोनू जी ने कहा कि गुरु तेगबहादुर जी के बलिदान को सभी लोगो के बीच रखने के लिए एक भव्य मंचन का आयोजन किया जाना चाहिए जो नेहरू स्टेडियम जैसे जगह पर हो और उसमे कम से कम 50000 लोगो कि उपस्थिति हो। इस बात का सभी ने तालिया बजा कर समर्थन किया. आभार व्यक्त विभाग मंत्री यज्ञेश राठी द्वारा किया गया.कार्यक्रम में मुख्य खगेंद्र भार्गव विनोद शर्मा हुकुमचंद जी सावला अमरजीत सिंह बग्गा सुरजीत सिंह टुटेजा अवतार सिंह सैनी रिकी गांधी रविंद्र श्री होरा कैलाश जी खंडेलवाल विकास जी डागा माला जी ठाकुर चरणजीत सिंह नारंग सतविंदर सिंह मखीजा चरण सिंह नारंग कृष्ण वर्मा अन्नू गेहलोत.

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