Mahalaya 2025 Mahalaya precedes Durga Puja celebrated Bengal

Mahalaya (महालया) 2025 Live : दुर्गा पूजा से पहले महालया, जानें बंगाल में क्यों मानते हैं महालया

Mahalaya 2025 Live

(महालया) 2025 : दुर्गा पूजा से पहले महालया, जानें बंगाल में क्यों मानते हैं महालया

बंगाल में दुर्गा पूजा के प्रमुख त्यौहार के आगमन के रूप में भी जाना जाता है , बंगाल में महालया इस दिन दुर्गा पूजा उत्सव की तैयारी करते हैं।

Kolkata: इस साल 22 सितंबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है. उससे पहले 21 सितंबर को महालया मनाया जाएगा. बंगाल में, महालया को दुर्गा पूजा उत्सव की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. बंगाल में दुर्गा पूजा की शुरुआत महालया से होती है. महालया के साथ ही जहां एक तरफ पितृपक्ष समाप्त होता है तो दूसरी ओर मां दुर्गा की पूजा शुरू होती है. महालया के दिन ही मूर्तिकार मां दुर्गा (Maa Durga) की आंखें तैयार करते हैं. महालया के बाद ही मां दुर्गा की मूर्तियों को अंतिम रूप दिया जाता है और वह पंडालों की शोभा बढ़ाती हैं.

महालया अमावस्या के दिन सुबह पितरों का श्राद्ध और तर्पण करके विदा किया जाता है और शाम के समय मां दुर्गा की पृथ्वी लोक पर आने के लिए पूजा की जाती है। इस बार महालया 21 सितंबर को है और इसके अगले दिन यानी 22 सितंबर से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो जाएंगे। हिंदू धर्म में महालया का विशेष महत्व है और इस दिन से ही दुर्गा पूजा की शुरुआत हो जाती है। बंगाल की धरती पर जिस तरह दुर्गा पूजा का महत्व रहा है, उसी तरह महालया को भी बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। बंगाल में महालया का हर कोई इंतजार करता है क्योंकि यहां पुत्री के रूप में मां भवानी को बुलाया जाता है। इस दिन देवी दुर्गा की प्रतिमा पर रंग चढ़ाया जाता है, उनकी आंखें बनाई जाती हैं और प्रतिमा समेत मंडप को सजाया जाता है। मां दुर्गा की मूर्ति बनाने वाले कारीगर अपना कार्य पहले ही शुरू कर लेते हैं लेकिन महालया के दिन मूर्ति को अंतिम रूप दिया जाता है।
क्या है महालया का इतिहास ?
पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश ने अत्‍याचारी राक्षस महिषासुर के संहार के लिए मां दुर्गा का सृजन किया. महिषासुर को वरदान मिला हुआ था कि कोई देवता या मनुष्‍य उसका वध नहीं कर पाएगा. ऐसा वरदान पाकर महिषासुर राक्षसों का राजा बन गया और उसने देवताओं पर आक्रमण कर दिया. देवता युद्ध हार गए और देवलोकर पर महिषासुर का राज हो गया. महिषासुर से रक्षा करने के लिए सभी देवताओं ने भगवान विष्णु के साथ आदि शक्ति की आराधना की. इस दौरान सभी देवताओं के शरीर से एक दिव्य रोशनी निकली जिसने देवी दुर्गा का रूप धारण कर लिया. शस्‍त्रों से सुसज्जित मां दुर्गा ने महिषासुर से नौ दिनों तक भीषण युद्ध करने के बाद 10वें दिन उसका वध कर दिया. दरसअल, महालया मां दुर्गा के धरती पर आगमन का द्योतक है.
वैसे तो महालया बंगालियों का प्रमुख त्‍योहार है, लेकिन इसे देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है. बंगाल के लोगों के लिए महालया पर्व का विशेष महत्‍व है. मां दुर्गा में आस्‍था रखने वाले लोग साल भर इस दिन का इंतजार करते हैं. महालया से ही दुर्गा पूजा की शुरुआत मानी जाती है. महालया पितृ पक्ष का आखिरी दिन भी है. इसे सर्व पितृ अमावस्‍या भी कहा जाता है. इस दिन सभी पितरों को याद कर उन्‍हें तर्पण दिया जाता है. मान्‍यता है कि ऐसा करने से पितरों की आत्‍मा तृप्‍त होती है और वह खुशी-खुशी विदा होते हैं.

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