Al-Falah University under investigation, over 200 doctors

अल-फलाह यूनिवर्सिटी जांच के दायरे में, 200 से ज्यादा डॉक्टर, लेक्चरर और स्टाफ जांच एजेंसियों के राडार पर

अल-फलाह यूनिवर्सिटी जांच के दायरे में, 200 से ज्यादा डॉक्टर, लेक्चरर और स्टाफ जांच एजेंसियों के राडार पर

जीएमसी में डॉक्टरों-स्टाफ के लॉकरों की जांच शुरू कर दी

नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली के लाल किला के पास हुए कार बम धमाके की जांच ने अब अल-फलाह यूनिवर्सिटी को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है। बताया जा रहा है कि अब यूनिवर्सिटी के 200 से ज्यादा डॉक्टर, लेक्चरर और स्टाफ जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं। उधर, व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल के खुलासे के बाद एजेंसी ने जीएमसी में डॉक्टरों-स्टाफ के लॉकरों की जांच शुरू कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक विश्वविद्यालय के 200 से ज्यादा डॉक्टर, लेक्चरर और स्टाफ जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। इतना ही नहीं हॉस्टल और बाहर रहने वाले छात्रों के कमरों की तलाशी हो रही है। अब तक 1000 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। जांच एजेंसियां ये पता लगाने में जुटी हैं कि दिल्ली ब्लास्ट के बाद कितने लोग यूनिवर्सिटी छोड़कर गए और उनकी पहचान क्या है। कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन का डेटा डिलीट किया है, जिसकी भी गहन जांच होगी।
उधर जांच एजेंसियों ने एक 35 वर्षीय महिला को हिरासत में लिया है, जिसने आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर उन नबी को नूंह की हिदायत कॉलोनी में कमरा किराए पर दिया था। ये आंगनवाड़ी कार्यकर्ता महिला दिल्ली बम धमाकों के बाद से फरार थी। घटना के बाद उसका परिवार भी जांच के दायरे में है। सूत्रों ने बताया कि उमर ने नूह में रहते वक्त कई मोबाइल फोन इस्तेमाल किए थे। ब्लास्ट के बाद अल-फलाह अस्पताल में मरीजों की संख्या आधी रह गई है। पहले रोजाना 200 के करीब ओपीडी मरीज आते थे, अब 100 से कम आ रहे हैं। जांच एजेंसियां ये पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या विश्वविद्यालय के अंदर कोई हैंडलर था, क्योंकि उमर को संस्थान में विशेष सुविधा मिलती थी।
विश्वविद्यालय से एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद यहां अप्रेंटिसशिप कर रहे दो डॉक्टरों ने बताया कि उमर 2023 में बिना किसी छुट्टी और सूचना के करीब छह माह तक अस्पताल और विश्वविद्यालय से गायब रहा। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि घटना का अजीब पहलू ये है कि वापस आते ही वह सीधे ड्यूटी पर लौट आया और उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने बताया कि उमर बहुत कम कक्षा अडेंड करता था। वह हफ़्ते में सिर्फ़ एक या दो लेक्चर लेता था और वहां भी सिर्फ़ 15-20 मिनट के। फिर वह अपने कमरे में वापस चला जाता था। चौंकाने वाले खुलासे में डॉक्टरों ने बताया कि उमर को अस्पताल में हमेशा शाम या रात की शिफ्ट में ही काम मिलाता था। उमर को कभी सुबह की शिफ्ट में काम नहीं दिया गया।
उधर, दिल्ली ब्लास्ट और “व्हाइट कॉलर” आतंकी मॉड्यूल के खुलासे के बाद अनंतनाग स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में बुधवार से डॉक्टरों-स्टाफ के लॉकरों की व्यापक जांच शुरू की गई है। इस महीने की शुरुआत में यहीं डॉ. अदील राथर के लॉकर से एके-47 बरामद हुआ था, जिसके बाद कई डॉक्टरों का आतंकी मॉड्यूल पकड़ा गया और 2900 किलो विस्फोटक बरामद हुआ था।

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