Morocco: मोरोक्को के कासाब्लांका इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भारतीय फिल्मों की धूम
Morocco: मोरोक्को के कासाब्लांका इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भारतीय फिल्मों की धूम
इंडियन फिल्म प्रोग्राम में लघु फिल्म ‘द गर्ल विद क्लोज्ड लिप्स’ को मिला बेस्ट चाइल्ड एक्ट्रेस और बेस्ट बैकग्राउंड म्यूजिक का अवार्ड
UNN: दुनिया भर में भारतीय फिल्मों का डंका बजता रहा है और अरब देशों में बॉलीवुड और उसके सितारे हमेशा से बहुत पॉपुलर रहे हैं। अरबी लोग चाहे हिंदी नहीं बोल सकते हों लेकिन वो हिंदी फिल्मों के संवाद और उनके गीत बहुत साफ़ गाते बजाते दिखेंगे। इसका एक ताजा उदाहरण तब आमने आया जब मोरोक्को के अटलांटिक्स महासागर के किनारे बसे खूबसूरत शहर कासाब्लांका में १३वें कासाब्लांका इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दुनिया भर के सिनेमा के साथ भारतीय फिल्म प्रोग्राम के तहत दो हिंदी की और एक मलयालम की फिल्म के साथ एक लघु फिल्म भी दिखाई गई। हिंदी में केतन मेहता की ‘मांझी : द माउंटेन मैन , यशपाल शर्मा की ‘ दादा लख्मी ‘ निर्देशक मनोज टी यादव की मलयालम फिल्म ‘झंकार” भी दिखाई गई। लेकिन इनमें सबसे चर्चित रही पत्रकार और फ़िल्मकार रामकिशोर पारचा द्वारा लिखी निर्देशित लघु फिल्म ‘द गर्ल विद क्लोज्ड लिप्स’और जिसे बेस्ट चाइल्ड एक्ट्रेस और बेस्ट बैकग्राउंड म्यूजिक के अवार्ड से नवाजा गया। इससे पहले उत्तर कोरिया के प्योंगयोंग इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में में भी मनोज टी यादव की मलयालम फिल्म ‘झंकार’ को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवार्ड मिल चुका है। केतन मेहता की ‘मांझी : द माउंटेन मैन और यशपाल शर्मा की ‘दादा लख्मी’ को भारत में राष्ट्रीय अवार्ड मिल चुका है।

गौरतलब है कि यह इंडियन फिल्म प्रोग्राम दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल द्वारा आयोजित किया जाता है और जिसे इंडियन एम्बेसी के सहयोग से किया जाता है। दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल दुनिया का पहला ऐसा फिल्म फेस्टिवल है जो फेस्टिवल टू फेस्टिवल कोल्बोरेशन के साथ काम करता है. साथ ही दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल एकमात्र ऐसा भारतीय फिल्म फेस्टिवल भी है जो विदेशों में होने वाले फिल्म फेस्टिवल्स को इंडियन फिल्म प्रोग्राम भी उपलब्ध करवाता है. हाल में ही दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ने मिस्र, मोरक्को और उत्तर कोरिया के पेन्योंग फिल्म फेस्टिवल्स के दौरान भारतीय फिल्मों के साथ भागेदारी की है. दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल एक ऐसा फेस्टिवल भी है जो भारत से बाहर फेस्टिवल्स में इंडियन एंड ब्रोडकास्टिंग मिनिस्ट्री की गवर्नमेंट कॉम्पोनेन्ट बॉडी की तरह भी काम करता है. इस साल मिस्र, उत्तर कोरिया और मोरोक्को के कासाब्लांका इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में ये इसकी तीसरी कड़ी थी। इसके बाद कुछ और भारतीय फ़िल्में आने वाले इंडियन फिल्म प्रोग्राम के तहत मोरोक्को, मिस्र , लेबनॉन और कनाडा में दिखाई जाएँगी। ये इंडियन फिल्म प्रोग्राम दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के आयोजक और संस्थापक रामकिशोर पारचा के अथक प्रयास और उनके ४० साल के भारतीय सिनेमा के विकास में योगदान का परिणाम है.
कासाब्लांका में १३वें कासाब्लांका इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में करीब ४५ देशों की ७० फ़िल्में दिखाई गई लेकिन सबसे ज़ायदा चर्चा हुई भारतीय फिल्मों की। इसके साथ ही भारतीय राजदूत महामहिम श्री संजय राणा की मौजूदगी में कासाब्लांका इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के बीच एक समझौते पर भी दस्तख़त किये गए जिसके तहत आपसी फिल्म निर्माण के सहयोग और सिनेमा के साथ सांस्कृतिक आदान प्रदान भी किया जायेगा। साथ ही दोनों फेस्टिवल के आपसी सहयोग से बनने वाली नयी फिल्म की घोषणा भी की गई। अप्रैल के पहले सप्ताह में इंदिरा गाँधी कला केंद्र के सहयोग से होने वाले दिल्ली इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी इस आपसी सहयोग और फिल्म निर्माण से संबंधित वर्कशॉप और प्रेस वार्ता आयोजित की जाएगी। साथ ही इंडियन मोरोक्को को प्रोडक्शन के लिए भी नए मंच तलाश किये जायेंगे।
लेखक और निर्देशक रामकिशोर पारचा की लघु फिल्म ‘द गर्ल विद क्लोज्ड लिप्स’ एक सच्ची कहानी से प्रेरित है. ‘द गर्ल विद क्लोज्ड लिप्स’ 9 साल की एंजी की कहानी है, जो जन्म से ही बहरी और गूंगी है। उसकी माँ चाहती है कि वह साइन लैंग्वेज सीखे और ज़िंदगी में आगे बढ़े, लेकिन उसके पिता चाहते हैं कि वह स्पीच थेरेपी स्कूल जाए क्योंकि उसके दादा भी बहरे और गूंगे थे और सुन या बोल नहीं सकते थे। आखिरकार, एंजी की माँ उसे साइन लैंग्वेज टीचर अनुराग को सौंप देती है. अनुराग उसे सिखाना शुरू करता है और तीन महीने का समय मांगता है. समस्या तब बड़ी हो जाती है जब एंजी के पिता उसे जबरदस्ती एक नार्मल स्कूल में दाखिल करवा देते हैं। इस बीच, कम समय और एंजी की वंशानुगत समस्या के कारण कई और रुकावटें आती हैं। लेकिन अंजलि और अनुराग के टीचर और स्टूडेंट के भावनातमक रिश्ते के साथ-साथ, ‘द गर्ल विद क्लोज्ड लिप्स’ एंजी के उसके घर लौटने और साइन लैंग्वेज के ज़रिए ज़िंदगी जीने की एक सच्ची कहानी भी है। इस फिल्म में आराध्या राजपूत को बेस्ट बाल कलाकार और डॉक्टर सुशील जैन को बेस्ट बैकग्राउंड म्यूजिक डायरेक्टर का अवार्ड दिया गया है। फिल्म की अवधि २७ मिनट १६ सेकंड है। फिल्म में
भरत शर्मा, सरिता दहिया, धर्मेन्द्र डांगी और रामकिशोर पारचा की भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं हैं। फिल्म के निर्माता मुकुल झांजी और राजन झांजी के साथ और लोबसांग फुंटसोक पोंटसांग हैं और इसे भारत, मिस्र, फ्रांस और मोरोक्को के सहयोग से बनाया गया है।

