Tu Yaa Main Movie Review: ‘तू या मैं’ के बीच शनाया कपूर-आदर्श गौरव
Tu Yaa Main Movie Review: ‘तू या मैं’ के बीच शनाया कपूर-आदर्श गौरव
कलाकार – आदर्श गौरव , शनाया कपूर , क्षिति जोग , अंश विकास चोपड़ा और पारुल गुलाटी
लेखक – अभिषेक बांदेकर
निर्देशक – बेजॉय नांबियार
निर्माता – आनंद एल. राय , हिमांशु शर्मा , विनोद भानुशाली और कमलेश भानुशाली
रेटिंग 2/5
UNN@ वर्षा पारीख। बेजॉय नांबियार की ‘तू या मैं’ एक रिलेशनशिप ड्रामा से शुरू होकर सर्वाइवल थ्रिलर में बदलने वाली फिल्म है। इसमें शनाया कपूर और आदर्श गौरव मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म थाई फिल्म ‘द पूल’ का आधिकारिक अडैप्टेशन है, लेकिन इसे भारतीय सामाजिक और डिजिटल माहौल के हिसाब से ढाला गया है।
कहानी
दो बिल्कुल अलग बैकग्राउंड के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर एक साथ मिलकर काम करते हैं, लेकिन उन्हें प्यार हो जाता है और उनकी जिंदगी में एक अचानक हैरान करने वाला मोड़ आ जाता है। कहानी अवनी शाह (शनाया कपूर) और मारुति कदम (आदर्श गौरव) पर आधारित है। दोनों सोशल मीडिया की दुनिया में उभरते हुए नाम हैं। अवनी, जिसे ऑनलाइन मिस वैनिटी के नाम से जाना जाता है। वह अमीर परिवार से हैं। उसके लाखों फॉलोअर्स हैं और उनके पीछे एक प्रोफेशनल टीम है। मारुति, जिसे आला फ्लोपारा के नाम से भी जाना जाता है। वह नालासोपारा का एक रैपर और कंटेंट क्रिएटर होता है, जो अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ी मेहनत करता हैं। वे एक म्यूजिक इवेंट में मिलते हैं, जहां मारुति को एक मौका मिलता है और वह साथ काम करने का सुझाव देता है। बार-बार की मुलाकातें प्यार में बदल जाती हैं और जल्द ही उन्हें प्यार हो जाता है। अवनी, मारुति के परिवार के करीब आ जाती है और अपनी दुनिया से बहुत अलग दुनिया में कदम रखती है। परेशानी तब शुरू होती है, जब उनके परिवार में तनाव पैदा होता है और वे अपने करियर को प्राथमिकता देने का फैसला करते हैं। स्थिति को आसान बनाने की उम्मीद में उनका परिवार कपल को गोवा भेज देता है। वहां, उनकी जिंदगी अचानक बदल जाती हैं जब दोनों खुद को एक खाली, गहरे स्विमिंग पूल में फंसा हुआ पाते हैं, जिसमें एक मगरमच्छ है और बचने का कोई रास्ता नहीं है। क्या अवनी और मारुति इस मुश्किल हालात में टिक पाएंगे? जीत किसकी होगी मगरमच्छ या मोहब्बत?
निर्देशन
बेजॉय नांबियार ने फिल्म के सर्वाइवल हिस्से को तकनीकी रूप से मजबूत बनाया है। पूल का सेटअप साफ दिखता है और ऑडियंस समझ पाती है कि खतरा कहां है। सीमित लोकेशन के बावजूद कैमरा वर्क क्लियर है। साउंड डिजाइन तनाव बनाए रखने में मदद करता है।
