Forests of State are Priceless Heritage of Nation CM Dr. Yadav

Madhya Pradesh: प्रदेश के वन राज्य ही नहीं राष्ट्र की भी हैं बड़ी धरोहर : CM डॉ. मोहन यादव

Madhya Pradesh: प्रदेश के वन राज्य ही नहीं राष्ट्र की भी हैं बड़ी धरोहर : CM डॉ. मोहन यादव

वन विभाग का “विजन@2047 री-इमेजिनिग फॉरेस्ट रिसोर्सेस फॉर द क्लाइमेट रेसिलियंट फ्यूचर” महत्वपूर्ण डाक्यूमेंट

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत@2047 के लक्ष्य की पूर्ति में प्रदेश की ओर से हर संभव योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके परिणामस्वरुप ही समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 के लिए प्रदेश में सभी क्षेत्रों में समग्र विकास को दृष्टिगत रखते हुए कार्य किया जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के वन केवल राज्य ही नहीं अपितु राष्ट्र की अत्यंत महत्वपूर्ण धरोहर हैं। वर्ष 2047 में देश की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने के दृष्टिगत प्रदेश के वन संसाधनों के संरक्षण, उनके समुदाय आधारित प्रबंधन और 21वीं सदी में भारत के पर्यावरणीय तथा विकास लक्ष्यों में वनों के योगदान संबंधी दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित करते हुए कार्य योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में जैव विविधता, समृद्ध सामुदायिक सहभागिता आधारित वन प्रबंधन की दीर्घकालिक रूपरेखा “विजन @2047 री-इमैजिनिंग फॉरेस्ट रिसोर्सेस फॉर द क्लाइमेट रेसिलियंट फ्यूचर” महत्वपूर्ण डाक्यूमेंट है।
मध्यप्रदेश, विविध और समृद्ध वनों से परिपूर्ण है। यहां घने वनों से लेकर अर्ध-शुष्क वन और नदी तटीय पारिस्थितिक तंत्र तक विद्यमान हैं। ये वन असंख्य वनस्पतियों और वन्य जीवों को आश्रय प्रदान करते हैं तथा प्रमुख नदियों के उद्गम क्षेत्र बनकर लाखों लोगों की जल सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। प्रदेश के वन, जनजातियों एवं वन-आश्रित समुदायों की आजीविका का आधार हैं, जिनकी संस्कृति और पहचान, वन पारिस्थितिकी से परस्पर जुड़ी है। इन वनों की सुरक्षा केवल पर्यावरणीय दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक अनिवार्यता भी है।
विजन@2047 इस विश्वास पर आधारित है कि केवल नियमन और संरक्षण पर आधारित पारंपरिक वन प्रबंधन पद्धतियाँ अब पर्याप्त नहीं हैं। बदलते वर्षा पैटर्न, बढ़ता तापमान, वनों में लगने वाली आग और भूमि उपयोग का दबाव व्यापक एवं दूरदर्शी समाधान की मांग करते हैं। इस संदर्भ में यह विज़न पारिस्थितिकी-आधारित, जलवायु- अनुकूल, विज्ञान-आधारित दृष्टिकोण को अपनाता है।
विजन@2047 का प्रमुख आधार समुदायों की भागीदारी है। विजन में वन-आश्रित समुदायों को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि वन संसाधनों के सह-प्रबंधक एवं संरक्षक के रूप में देखा गया है। जब समुदायों को वनों से प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होता है, तो वे उनके सबसे सशक्त संरक्षक बन जाते हैं। इस विश्वास के साथ यह विज़न समावेशी विकास को बढ़ावा देता है। यह विज़न वन प्रबंधन के आधुनिकीकरण पर भी विशेष बल देता है। शासकीय प्रक्रियाओं में डिजिटल प्रौद्योगिकी के माध्यम से पारदर्शिता, कार्यकुशलता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने पर विजन डॉक्यूमेंट में विशेष महत्व दिया गया है।
संस्थागत सुधार और क्षमता निर्माण विज़न@2047 की आधारशिला हैं। नीतियों को प्रभावी परिणामों में परिवर्तित करने के लिए एक दक्ष, प्रशिक्षित और प्रेरित कार्यबल अत्यंत आवश्यक है। विभाग प्रशिक्षण, नेतृत्व विकास, वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार में सतत निवेश करेगा।
विजन@2047 को 5 अध्यायों में विभाजित किया गया है। इसमें वन विभाग के इतिहास और संरचना, विभाग की दृष्टि- मिशन और नीति निर्देशक सिद्धांतों, वर्ष 2024 तक के लक्ष्यों पर विशेष अध्याय शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही विजन@2024 को क्रियान्वित करने के प्रमुख 11 स्तंभों क्रमश: वन प्रबंधन, वन्य जीव संरक्षण, वन संरक्षण, वन संसाधनों का श्रेष्ठतम उपयोग, वन भूमि के बाहर हरित आच्छादन, सामुदायिक वानिकी और आजिविका, पर्यावरण पर्यटन और प्रकिृत शिक्षा, जलवायु सहनशीलता, कार्बन एवं परिस्थितिकीय तंत्र सेवाएं, नीतिगत एवं विधिक सुधार, मानव संसाधन- क्षमता एवं कल्याण और डिजिटल एवं डेटा रूपांतरण की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। विजन@2047 ऐसा दस्तावेज है, जो समय के साथ उभरती चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप आकार लेता रहेगा। यह दृष्टि पत्र 33% हरित आच्छादन के लक्ष्य तथा वर्ष 2017 तक नेट जीरो उत्सर्जन के राष्ट्रीय संकल्प के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के वन आने वाले वाली पीढियों के लिए स्वस्थ, उत्पादक और सम सामयिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहे।

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Date : 01 March 2026 Posted By : EDITOR
Madhya Pradesh: प्रदेश के वन राज्य ही नहीं राष्ट्र की भी हैं बड़ी धरोहर : CM डॉ. मोहन यादव
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Madhya Pradesh: प्रदेश के वन राज्य ही नहीं राष्ट्र की भी हैं बड़ी धरोहर : CM डॉ. मोहन यादव

वन विभाग का "विजन@2047 री-इमेजिनिग फॉरेस्ट रिसोर्सेस फॉर द क्लाइमेट रेसिलियंट फ्यूचर" महत्वपूर्ण डाक्यूमेंट

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत@2047 के लक्ष्य की पूर्ति में प्रदेश की ओर से हर संभव योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके परिणामस्वरुप ही समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 के लिए प्रदेश में सभी क्षेत्रों में समग्र विकास को दृष्टिगत रखते हुए कार्य किया जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के वन केवल राज्य ही नहीं अपितु राष्ट्र की अत्यंत महत्वपूर्ण धरोहर हैं। वर्ष 2047 में देश की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने के दृष्टिगत प्रदेश के वन संसाधनों के संरक्षण, उनके समुदाय आधारित प्रबंधन और 21वीं सदी में भारत के पर्यावरणीय तथा विकास लक्ष्यों में वनों के योगदान संबंधी दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित करते हुए कार्य योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में जैव विविधता, समृद्ध सामुदायिक सहभागिता आधारित वन प्रबंधन की दीर्घकालिक रूपरेखा "विजन @2047 री-इमैजिनिंग फॉरेस्ट रिसोर्सेस फॉर द क्लाइमेट रेसिलियंट फ्यूचर" महत्वपूर्ण डाक्यूमेंट है।
मध्यप्रदेश, विविध और समृद्ध वनों से परिपूर्ण है। यहां घने वनों से लेकर अर्ध-शुष्क वन और नदी तटीय पारिस्थितिक तंत्र तक विद्यमान हैं। ये वन असंख्य वनस्पतियों और वन्य जीवों को आश्रय प्रदान करते हैं तथा प्रमुख नदियों के उद्गम क्षेत्र बनकर लाखों लोगों की जल सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। प्रदेश के वन, जनजातियों एवं वन-आश्रित समुदायों की आजीविका का आधार हैं, जिनकी संस्कृति और पहचान, वन पारिस्थितिकी से परस्पर जुड़ी है। इन वनों की सुरक्षा केवल पर्यावरणीय दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक अनिवार्यता भी है।
विजन@2047 इस विश्वास पर आधारित है कि केवल नियमन और संरक्षण पर आधारित पारंपरिक वन प्रबंधन पद्धतियाँ अब पर्याप्त नहीं हैं। बदलते वर्षा पैटर्न, बढ़ता तापमान, वनों में लगने वाली आग और भूमि उपयोग का दबाव व्यापक एवं दूरदर्शी समाधान की मांग करते हैं। इस संदर्भ में यह विज़न पारिस्थितिकी-आधारित, जलवायु- अनुकूल, विज्ञान-आधारित दृष्टिकोण को अपनाता है।
विजन@2047 का प्रमुख आधार समुदायों की भागीदारी है। विजन में वन-आश्रित समुदायों को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि वन संसाधनों के सह-प्रबंधक एवं संरक्षक के रूप में देखा गया है। जब समुदायों को वनों से प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होता है, तो वे उनके सबसे सशक्त संरक्षक बन जाते हैं। इस विश्वास के साथ यह विज़न समावेशी विकास को बढ़ावा देता है। यह विज़न वन प्रबंधन के आधुनिकीकरण पर भी विशेष बल देता है। शासकीय प्रक्रियाओं में डिजिटल प्रौद्योगिकी के माध्यम से पारदर्शिता, कार्यकुशलता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने पर विजन डॉक्यूमेंट में विशेष महत्व दिया गया है।
संस्थागत सुधार और क्षमता निर्माण विज़न@2047 की आधारशिला हैं। नीतियों को प्रभावी परिणामों में परिवर्तित करने के लिए एक दक्ष, प्रशिक्षित और प्रेरित कार्यबल अत्यंत आवश्यक है। विभाग प्रशिक्षण, नेतृत्व विकास, वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार में सतत निवेश करेगा।
विजन@2047 को 5 अध्यायों में विभाजित किया गया है। इसमें वन विभाग के इतिहास और संरचना, विभाग की दृष्टि- मिशन और नीति निर्देशक सिद्धांतों, वर्ष 2024 तक के लक्ष्यों पर विशेष अध्याय शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही विजन@2024 को क्रियान्वित करने के प्रमुख 11 स्तंभों क्रमश: वन प्रबंधन, वन्य जीव संरक्षण, वन संरक्षण, वन संसाधनों का श्रेष्ठतम उपयोग, वन भूमि के बाहर हरित आच्छादन, सामुदायिक वानिकी और आजिविका, पर्यावरण पर्यटन और प्रकिृत शिक्षा, जलवायु सहनशीलता, कार्बन एवं परिस्थितिकीय तंत्र सेवाएं, नीतिगत एवं विधिक सुधार, मानव संसाधन- क्षमता एवं कल्याण और डिजिटल एवं डेटा रूपांतरण की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। विजन@2047 ऐसा दस्तावेज है, जो समय के साथ उभरती चुनौतियों और अवसरों के अनुरूप आकार लेता रहेगा। यह दृष्टि पत्र 33% हरित आच्छादन के लक्ष्य तथा वर्ष 2017 तक नेट जीरो उत्सर्जन के राष्ट्रीय संकल्प के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के वन आने वाले वाली पीढियों के लिए स्वस्थ, उत्पादक और सम सामयिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहे।

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