International Women's Day Celebrating struggles, honours

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: संघर्ष, सम्मान और उपलब्धियों का जश्न

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: संघर्ष, सम्मान और उपलब्धियों का जश्न

UNN: कुछ तारीखें ऐसी होती हैं जो धीरे-धीरे दुनिया के कैलेंडर का स्थायी हिस्सा बन जाती हैं। 8 मार्च भी ऐसी ही एक तारीख है। हर साल इस दिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है, जब समानता, अवसर और सम्मान को लेकर चर्चा होती है। दुनिया भर में महिलाओं के योगदान, संघर्ष और उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए हर साल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. यह दिन महिलाओं के अधिकारों, समानता और सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक बेहतरीन मौका होता है. सभी जानते हैं कि समाज, परिवार और देश के विकास में महिलाओं की भूमिका बेहद अहम रही है. हर फील्ड में महिलाओं ने अपनी ताकत, समझ और मेहनत से ऊंचाइयां हासिल की है. घर पर रहने वाली महिलाएं भी पूरा दिन मेहनत करके अपने परिवार की हर तरह की सुविधाओं का ख्याल रखती हैं. यानी महिलाएं चाहे घर पर रहें या फिर नौकरी करें…हर तरह से अपनी जिम्मेदारियों को निभाना जानती हैं.
कई जगह यह दिन उत्सव की तरह दिखाई देता है, जहां फूल दिए जाते हैं, संदेश भेजे जाते हैं और महिलाओं की सराहना की जाती है। लेकिन इन सबके पीछे इस दिन का एक लंबा इतिहास है, जो सामाजिक बदलाव और महिलाओं के अधिकारों के आंदोलनों से जुड़ा हुआ है। समय के साथ यह दिवस और भी व्यापक हो गया है। सरकारें, कार्यस्थल, स्कूल और सामुदायिक संगठन इसे अपने-अपने तरीके से मनाते हैं। कुछ लोग महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाते हैं, जबकि कुछ लोग लैंगिक समानता से जुड़ी चुनौतियों पर ध्यान दिलाते हैं। इस तरह अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एक तरफ उत्सव है और दूसरी तरफ यह याद दिलाता है कि सामाजिक प्रगति अपने आप नहीं होती, इसके लिए लगातार प्रयास करने पड़ते हैं।
दुनिया भर में इस दिन महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों को सम्मान दिया जाता है। साथ ही यह दिन इस बात पर भी सोचने का अवसर देता है कि लैंगिक समानता हासिल करने के लिए अभी कितना काम बाकी है। इस अवसर पर कार्यस्थलों पर चर्चा, शैक्षणिक कार्यक्रम, जनजागरूकता अभियान और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हर साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एक वैश्विक थीम के साथ मनाया जाता है। यह थीम लोगों को किसी खास मुद्दे पर ध्यान देने और जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है। अक्सर इन थीम का उद्देश्य लैंगिक समानता को तेज करना, महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देना और समावेशी विकास को प्रोत्साहित करना होता है। संस्थाएं और सामाजिक संगठन इस थीम को आधार बनाकर पूरे महीने चर्चा, कार्यक्रम और अभियान चलाते हैं। इसका उद्देश्य केवल प्रतीकात्मक रूप से उत्सव मनाना नहीं, बल्कि वास्तविक बदलाव के लिए लोगों को प्रेरित करना होता है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का महत्व
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का महत्व दो बातों में छिपा है, सम्मान और आत्ममंथन। यह दिन विज्ञान, राजनीति, शिक्षा, खेल और कला जैसे कई क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान करता है। साथ ही यह उन चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाता है जो आज भी मौजूद हैं, जैसे असमान वेतन, नेतृत्व पदों पर कम प्रतिनिधित्व और दुनिया के कई हिस्सों में शिक्षा की सीमित पहुंच। इस तरह यह दिन समाज को यह याद दिलाता है कि जहां एक तरफ काफी प्रगति हुई है, वहीं दूसरी तरफ लैंगिक समानता की यात्रा अभी भी जारी है। यह लोगों, संगठनों और सरकारों को ऐसी नीतियों और कदमों का समर्थन करने के लिए प्रेरित करता है जो समान अवसर सुनिश्चित कर सकें।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत 20वीं सदी की शुरुआत से जुड़ी है। उस समय मजदूर आंदोलनों और महिलाओं के अधिकारों की मांग तेजी से बढ़ रही थी। इस आंदोलन से जुड़ा एक शुरुआती कार्यक्रम 1909 में अमेरिका में हुआ था, जब महिलाओं के श्रमिक अधिकारों और मतदान के अधिकार को लेकर राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। इसके बाद यह विचार धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल गया। 1910 में कामकाजी महिलाओं के एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में महिलाओं के लिए एक वैश्विक दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा गया। पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के कार्यक्रम 1911 में कई यूरोपीय देशों में आयोजित किए गए। समय के साथ यह दिवस दुनिया के कई हिस्सों में फैल गया। संयुक्त राष्ट्र ने 1975 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को आधिकारिक मान्यता दी, जिससे इसकी वैश्विक पहचान और मजबूत हुई। आज यह दिन दुनिया के दर्जनों देशों में जागरूकता अभियानों, चर्चाओं और सामुदायिक कार्यक्रमों के साथ मनाया जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत कब हुई थी?
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत 20वीं सदी की शुरुआत में महिलाओं के अधिकारों के लिए चल रहे आंदोलनों से हुई थी. उस समय कई देशों में महिलाएं बेहतर कामकाजी परिस्थितियों, समान वेतन और मतदान के अधिकार की मांग कर रही थीं. साल 1908 में अमेरिका में हजारों महिला मजदूरों ने अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन किया, जिसके बाद महिलाओं के अधिकारों को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो गई.इसके बाद 1910 में डेनमार्क के कोपेनहेगन में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में जर्मन समाजवादी नेता Clara Zetkin ने महिलाओं के लिए एक खास दिन मनाने का प्रस्ताव रखा. इस प्रस्ताव का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों और समानता के मुद्दों को दुनिया भर में सामने लाना था. इसी विचार के बाद कई देशों में महिला दिवस मनाने की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे यह एक वैश्विक आंदोलन बन गया.
महिलाओं के सामने कई चुनौतियां
1. शिक्षा में असमानता- आज महिलाएं कई क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं लेकिन फिर भी वह कई चुनौतियों का सामना कर रही हैं। कई जगह लड़कियों को शिक्षा के समान अवसर नहीं मिलते।
2. सुरक्षा और हिंसा- कई महिलाओं को घर, स्कूल या कार्यस्थल में हिंसा और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।
3. सामाजिक और पारिवारिक दबाव- कुछ परिवार और समाज महिलाओं से केवल घरेलू जिम्मेदारियां निभाने की उम्मीद रखते हैं।
भारत की सफल महिला उद्यमी
विभिन्न चुनौतियों के बावजूद, ये महिलाएं भारत में सफल उद्यमी बन गई हैं:
किरण मजूमदार शॉ: भारतीय बायोटेक इंडस्ट्री की दिग्गज, किरण मजूमदार शॉ भारत की सबसे अमीर सेल्फ-मेड महिलाओं में से एक है और उन्होंने पुरुष-प्रधान क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने 1978 में आयरलैंड की बायोकॉन बायोकेमिकल लिमिटेड के साथ एक जॉइंट वेंचर के रूप में कंपनी की स्थापना की।
इसके अलावा, कंपनी एक ग्लोबल बायोफार्मास्युटिकल दिग्गज बन गई है, जो उपभोक्ताओं को सस्ते हेल्थकेयर सॉल्यूशन प्रदान करने पर केंद्रित है। नोवल बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर और API मैन्युफैक्चरिंग में कंपनी के इनोवेटिव दृष्टिकोण ने इसे एक अग्रणी हेल्थकेयर प्रदाता के रूप में स्थापित किया है।
इसके अलावा, उन्हें भारत के फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में योगदान के लिए 2005 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
फाल्गुनी नायर: भारत के ब्यूटी और वेलनेस इंडस्ट्री को बदलने वाली एक प्रसिद्ध शख्सियत। उन्होंने एक छोटे स्टार्ट-अप, नाइका (Nykaa) को एक ई-कॉमर्स दिग्गज में बदल दिया, जो फैशन, ब्यूटी और वेलनेस प्रोडक्ट्स को लाखों उपभोक्ताओं तक पहुंचाता है, और इसे भारत में एक घरेलू नाम बना दिया है।
2021 में नाइका का IPO एक महत्वपूर्ण इवेंट था, जिसमें FSN ई-कॉमर्स वेंचर्स लिमिटेड (नाइका) के शेयर्स ने 1,125 रुपये के अंतिम IPO प्राइस से 78% प्रीमियम पर शुरुआत की, जिससे इन्होने अपनी इंडस्ट्री में लीडर होने की स्थिति को मजबूत किया।
रोशनी नड्डर मल्होत्रा: भारत की तीसरी सबसे बड़ी IT कंपनी HCL टेक्नोलॉजीज लिमिटेड की चेयरपर्सन रोशनी नड्डर मल्होत्रा के नेतृत्व में यह कंपनी भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तेजी से बढ़ी है। क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और AI-आधारित सॉल्यूशंस में कंपनी ने उनकी दृष्टि और नेतृत्व के तहत महत्वपूर्ण विस्तार किया है।
उन्होंने जुलाई, 2020 में HCL टेक्नोलॉजीज में अपना सफर शुरू किया, और उनके नेतृत्व में FY24 में कंपनी ने पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का रेवेन्यू दर्ज किया। रोशनी इस बात का उदाहरण हैं कि कैसे महिलाएं टेक इंडस्ट्री में बदलाव ला सकती हैं, व्यावसायिक समझ को सामाजिक प्रभाव के साथ जोड़कर।
विनीता सिंह: विनीता सिंह न केवल शार्क टैंक इंडिया की प्रसिद्ध शार्क्स में से एक हैं, बल्कि भारत के सबसे तेजी से बढ़ते D2C ब्यूटी ब्रांड्स में से एक, शुगर कॉस्मेटिक्स की सह-संस्थापक भी हैं। उन्होंने 2012 में अपने पति कौशिक मुखर्जी के साथ कंपनी शुरू की। कंपनी के प्रोडक्ट भारत में मिलेनियल्स और Gen-Z के बीच महत्वपूर्ण मार्केट हिस्सेदारी के साथ एक प्रमुख नाम बन गए हैं।
जनवरी 2025 तक, विनीता सिंह की वर्तमान नेट वर्थ लगभग 300 करोड़ रुपये है।
उपासना टाकू: वन मोबिक्विक सिस्टम्स लिमिटेड या मोबिक्विक की संस्थापक, जो एक प्रमुख डिजिटल बैंकिंग प्लेटफॉर्म है, जो उपभोक्ताओं और मर्चेंट्स दोनों के लिए वित्तीय प्रोडक्ट्स की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है।
2009 में, उपासना टाकु ने भारत में मोबिक्विक की सह-स्थापना की, और अब यह एक फिनटेक यूनिकॉर्न है, जिसकी वर्तमान मार्केट कैपिटलाइजेशन 5 मार्च 2025 तक ₹2,146.86 करोड़ से अधिक है। पेटीएम और गूगल पे जैसे प्रमुख प्लेयर्स की मौजूदगी के बावजूद, मोबिक्विक ने BNPL (बाय नाउ, पे लेटर) सर्विसेज पर ध्यान केंद्रित करते हुए स्थिर वृद्धि बनाए रखी है।
दिसंबर 2024 के शेयरहोल्डिंग डेटा के अनुसार, उपासना टाकू के पास कंपनी में लगभग 10% हिस्सेदारी है।

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Date : 08 March 2026 Posted By : EDITOR
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: संघर्ष, सम्मान और उपलब्धियों का जश्न
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: संघर्ष, सम्मान और उपलब्धियों का जश्न

UNN: कुछ तारीखें ऐसी होती हैं जो धीरे-धीरे दुनिया के कैलेंडर का स्थायी हिस्सा बन जाती हैं। 8 मार्च भी ऐसी ही एक तारीख है। हर साल इस दिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है, जब समानता, अवसर और सम्मान को लेकर चर्चा होती है। दुनिया भर में महिलाओं के योगदान, संघर्ष और उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए हर साल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. यह दिन महिलाओं के अधिकारों, समानता और सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक बेहतरीन मौका होता है. सभी जानते हैं कि समाज, परिवार और देश के विकास में महिलाओं की भूमिका बेहद अहम रही है. हर फील्ड में महिलाओं ने अपनी ताकत, समझ और मेहनत से ऊंचाइयां हासिल की है. घर पर रहने वाली महिलाएं भी पूरा दिन मेहनत करके अपने परिवार की हर तरह की सुविधाओं का ख्याल रखती हैं. यानी महिलाएं चाहे घर पर रहें या फिर नौकरी करें…हर तरह से अपनी जिम्मेदारियों को निभाना जानती हैं.
कई जगह यह दिन उत्सव की तरह दिखाई देता है, जहां फूल दिए जाते हैं, संदेश भेजे जाते हैं और महिलाओं की सराहना की जाती है। लेकिन इन सबके पीछे इस दिन का एक लंबा इतिहास है, जो सामाजिक बदलाव और महिलाओं के अधिकारों के आंदोलनों से जुड़ा हुआ है। समय के साथ यह दिवस और भी व्यापक हो गया है। सरकारें, कार्यस्थल, स्कूल और सामुदायिक संगठन इसे अपने-अपने तरीके से मनाते हैं। कुछ लोग महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाते हैं, जबकि कुछ लोग लैंगिक समानता से जुड़ी चुनौतियों पर ध्यान दिलाते हैं। इस तरह अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एक तरफ उत्सव है और दूसरी तरफ यह याद दिलाता है कि सामाजिक प्रगति अपने आप नहीं होती, इसके लिए लगातार प्रयास करने पड़ते हैं।
दुनिया भर में इस दिन महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों को सम्मान दिया जाता है। साथ ही यह दिन इस बात पर भी सोचने का अवसर देता है कि लैंगिक समानता हासिल करने के लिए अभी कितना काम बाकी है। इस अवसर पर कार्यस्थलों पर चर्चा, शैक्षणिक कार्यक्रम, जनजागरूकता अभियान और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हर साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एक वैश्विक थीम के साथ मनाया जाता है। यह थीम लोगों को किसी खास मुद्दे पर ध्यान देने और जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है। अक्सर इन थीम का उद्देश्य लैंगिक समानता को तेज करना, महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देना और समावेशी विकास को प्रोत्साहित करना होता है। संस्थाएं और सामाजिक संगठन इस थीम को आधार बनाकर पूरे महीने चर्चा, कार्यक्रम और अभियान चलाते हैं। इसका उद्देश्य केवल प्रतीकात्मक रूप से उत्सव मनाना नहीं, बल्कि वास्तविक बदलाव के लिए लोगों को प्रेरित करना होता है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का महत्व
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का महत्व दो बातों में छिपा है, सम्मान और आत्ममंथन। यह दिन विज्ञान, राजनीति, शिक्षा, खेल और कला जैसे कई क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों का सम्मान करता है। साथ ही यह उन चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाता है जो आज भी मौजूद हैं, जैसे असमान वेतन, नेतृत्व पदों पर कम प्रतिनिधित्व और दुनिया के कई हिस्सों में शिक्षा की सीमित पहुंच। इस तरह यह दिन समाज को यह याद दिलाता है कि जहां एक तरफ काफी प्रगति हुई है, वहीं दूसरी तरफ लैंगिक समानता की यात्रा अभी भी जारी है। यह लोगों, संगठनों और सरकारों को ऐसी नीतियों और कदमों का समर्थन करने के लिए प्रेरित करता है जो समान अवसर सुनिश्चित कर सकें।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत 20वीं सदी की शुरुआत से जुड़ी है। उस समय मजदूर आंदोलनों और महिलाओं के अधिकारों की मांग तेजी से बढ़ रही थी। इस आंदोलन से जुड़ा एक शुरुआती कार्यक्रम 1909 में अमेरिका में हुआ था, जब महिलाओं के श्रमिक अधिकारों और मतदान के अधिकार को लेकर राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। इसके बाद यह विचार धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल गया। 1910 में कामकाजी महिलाओं के एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में महिलाओं के लिए एक वैश्विक दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा गया। पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के कार्यक्रम 1911 में कई यूरोपीय देशों में आयोजित किए गए। समय के साथ यह दिवस दुनिया के कई हिस्सों में फैल गया। संयुक्त राष्ट्र ने 1975 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को आधिकारिक मान्यता दी, जिससे इसकी वैश्विक पहचान और मजबूत हुई। आज यह दिन दुनिया के दर्जनों देशों में जागरूकता अभियानों, चर्चाओं और सामुदायिक कार्यक्रमों के साथ मनाया जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत कब हुई थी?
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत 20वीं सदी की शुरुआत में महिलाओं के अधिकारों के लिए चल रहे आंदोलनों से हुई थी. उस समय कई देशों में महिलाएं बेहतर कामकाजी परिस्थितियों, समान वेतन और मतदान के अधिकार की मांग कर रही थीं. साल 1908 में अमेरिका में हजारों महिला मजदूरों ने अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन किया, जिसके बाद महिलाओं के अधिकारों को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो गई.इसके बाद 1910 में डेनमार्क के कोपेनहेगन में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में जर्मन समाजवादी नेता Clara Zetkin ने महिलाओं के लिए एक खास दिन मनाने का प्रस्ताव रखा. इस प्रस्ताव का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों और समानता के मुद्दों को दुनिया भर में सामने लाना था. इसी विचार के बाद कई देशों में महिला दिवस मनाने की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे यह एक वैश्विक आंदोलन बन गया.
महिलाओं के सामने कई चुनौतियां
1. शिक्षा में असमानता- आज महिलाएं कई क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं लेकिन फिर भी वह कई चुनौतियों का सामना कर रही हैं। कई जगह लड़कियों को शिक्षा के समान अवसर नहीं मिलते।
2. सुरक्षा और हिंसा- कई महिलाओं को घर, स्कूल या कार्यस्थल में हिंसा और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।
3. सामाजिक और पारिवारिक दबाव- कुछ परिवार और समाज महिलाओं से केवल घरेलू जिम्मेदारियां निभाने की उम्मीद रखते हैं।
भारत की सफल महिला उद्यमी
विभिन्न चुनौतियों के बावजूद, ये महिलाएं भारत में सफल उद्यमी बन गई हैं:
किरण मजूमदार शॉ: भारतीय बायोटेक इंडस्ट्री की दिग्गज, किरण मजूमदार शॉ भारत की सबसे अमीर सेल्फ-मेड महिलाओं में से एक है और उन्होंने पुरुष-प्रधान क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने 1978 में आयरलैंड की बायोकॉन बायोकेमिकल लिमिटेड के साथ एक जॉइंट वेंचर के रूप में कंपनी की स्थापना की।
इसके अलावा, कंपनी एक ग्लोबल बायोफार्मास्युटिकल दिग्गज बन गई है, जो उपभोक्ताओं को सस्ते हेल्थकेयर सॉल्यूशन प्रदान करने पर केंद्रित है। नोवल बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर और API मैन्युफैक्चरिंग में कंपनी के इनोवेटिव दृष्टिकोण ने इसे एक अग्रणी हेल्थकेयर प्रदाता के रूप में स्थापित किया है।
इसके अलावा, उन्हें भारत के फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में योगदान के लिए 2005 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
फाल्गुनी नायर: भारत के ब्यूटी और वेलनेस इंडस्ट्री को बदलने वाली एक प्रसिद्ध शख्सियत। उन्होंने एक छोटे स्टार्ट-अप, नाइका (Nykaa) को एक ई-कॉमर्स दिग्गज में बदल दिया, जो फैशन, ब्यूटी और वेलनेस प्रोडक्ट्स को लाखों उपभोक्ताओं तक पहुंचाता है, और इसे भारत में एक घरेलू नाम बना दिया है।
2021 में नाइका का IPO एक महत्वपूर्ण इवेंट था, जिसमें FSN ई-कॉमर्स वेंचर्स लिमिटेड (नाइका) के शेयर्स ने 1,125 रुपये के अंतिम IPO प्राइस से 78% प्रीमियम पर शुरुआत की, जिससे इन्होने अपनी इंडस्ट्री में लीडर होने की स्थिति को मजबूत किया।
रोशनी नड्डर मल्होत्रा: भारत की तीसरी सबसे बड़ी IT कंपनी HCL टेक्नोलॉजीज लिमिटेड की चेयरपर्सन रोशनी नड्डर मल्होत्रा के नेतृत्व में यह कंपनी भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तेजी से बढ़ी है। क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और AI-आधारित सॉल्यूशंस में कंपनी ने उनकी दृष्टि और नेतृत्व के तहत महत्वपूर्ण विस्तार किया है।
उन्होंने जुलाई, 2020 में HCL टेक्नोलॉजीज में अपना सफर शुरू किया, और उनके नेतृत्व में FY24 में कंपनी ने पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का रेवेन्यू दर्ज किया। रोशनी इस बात का उदाहरण हैं कि कैसे महिलाएं टेक इंडस्ट्री में बदलाव ला सकती हैं, व्यावसायिक समझ को सामाजिक प्रभाव के साथ जोड़कर।
विनीता सिंह: विनीता सिंह न केवल शार्क टैंक इंडिया की प्रसिद्ध शार्क्स में से एक हैं, बल्कि भारत के सबसे तेजी से बढ़ते D2C ब्यूटी ब्रांड्स में से एक, शुगर कॉस्मेटिक्स की सह-संस्थापक भी हैं। उन्होंने 2012 में अपने पति कौशिक मुखर्जी के साथ कंपनी शुरू की। कंपनी के प्रोडक्ट भारत में मिलेनियल्स और Gen-Z के बीच महत्वपूर्ण मार्केट हिस्सेदारी के साथ एक प्रमुख नाम बन गए हैं।
जनवरी 2025 तक, विनीता सिंह की वर्तमान नेट वर्थ लगभग 300 करोड़ रुपये है।
उपासना टाकू: वन मोबिक्विक सिस्टम्स लिमिटेड या मोबिक्विक की संस्थापक, जो एक प्रमुख डिजिटल बैंकिंग प्लेटफॉर्म है, जो उपभोक्ताओं और मर्चेंट्स दोनों के लिए वित्तीय प्रोडक्ट्स की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है।
2009 में, उपासना टाकु ने भारत में मोबिक्विक की सह-स्थापना की, और अब यह एक फिनटेक यूनिकॉर्न है, जिसकी वर्तमान मार्केट कैपिटलाइजेशन 5 मार्च 2025 तक ₹2,146.86 करोड़ से अधिक है। पेटीएम और गूगल पे जैसे प्रमुख प्लेयर्स की मौजूदगी के बावजूद, मोबिक्विक ने BNPL (बाय नाउ, पे लेटर) सर्विसेज पर ध्यान केंद्रित करते हुए स्थिर वृद्धि बनाए रखी है।
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