Young lawyers will get an opportunity to present arguments during

ग्रीष्मावकाश में युवा वकीलों को पक्ष रखने का मिलेगा मौका

ग्रीष्मावकाश में युवा वकीलों को पक्ष रखने का मिलेगा मौका

-सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर अधिवक्ताओं पर लगाई रोक

-जस्टिस विक्रम नाथ बोले- छुट्टियों के दौरान केवल एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड और जूनियर वकील ही रख सकेंगे दलीलें

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीष्मावकाश के दौरान सुनवाई की प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। शीर्ष अदालत के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट किया है कि आंशिक न्यायालय कार्य दिवसों के दौरान उनकी पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ताओं (सीनियर एडवोकेट्स) को न तो मामलों का उल्लेख करने और न ही दलीलें रखने की अनुमति दी जाएगी। इस अवधि में केवल युवा वकील और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (एओआर) ही अदालत में पक्ष रख सकेंगे।
सोमवार को सुनवाई शुरू होते ही जस्टिस विक्रम नाथ ने यह घोषणा की। उन्होंने जस्टिस पीबी वराले के साथ गठित पीठ की अध्यक्षता करते हुए कहा कि ग्रीष्मावकाश के दौरान युवा वकीलों को अधिक अवसर देने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की जा रही है। जब एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने मामले का उल्लेख करने की कोशिश की, तो अदालत ने स्पष्ट किया कि इस अवधि में वरिष्ठ वकीलों को सुनवाई में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने कहा कि संबंधित मामले में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड या निर्देश देने वाले वकील को पेश किया जाए, जिसे सुना जाएगा।
अन्य पीठ ने भी यही रुख अपनाया
इसी तरह की व्यवस्था जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने भी अपनाई। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि यदि कनिष्ठ वकील मामलों में दलीलें रखेंगे तो उन्हें अदालत में अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलेगा। वहीं जस्टिस संजय करोल की अध्यक्षता वाली पीठ ने भी इसी रुख का समर्थन किया। कानूनी हलकों में इस कदम को युवा अधिवक्ताओं को प्रोत्साहन देने और उन्हें अदालत में स्वतंत्र रूप से अपनी पैरवी प्रस्तुत करने का अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में 1 जून से 12 जुलाई तक ग्रीष्मावकाश
सुप्रीम कोर्ट में 1 जून से 12 जुलाई तक ग्रीष्मावकाश चल रहा है। हालांकि अब इसे आंशिक न्यायालय कार्य दिवस कहा जाता है और इस दौरान हर सप्ताह तीन से चार पीठें नियमित रूप से मामलों की सुनवाई करती हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मामलों में वरिष्ठ अधिवक्ता पेश हो रहे हैं, उन्हें खारिज नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों को सामान्य न्यायिक कार्य शुरू होने के बाद जुलाई में सूचीबद्ध किया जाएगा।

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Date : 02 June 2026 Posted By : EDITOR
ग्रीष्मावकाश में युवा वकीलों को पक्ष रखने का मिलेगा मौका
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ग्रीष्मावकाश में युवा वकीलों को पक्ष रखने का मिलेगा मौका

-सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर अधिवक्ताओं पर लगाई रोक

-जस्टिस विक्रम नाथ बोले- छुट्टियों के दौरान केवल एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड और जूनियर वकील ही रख सकेंगे दलीलें

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीष्मावकाश के दौरान सुनवाई की प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। शीर्ष अदालत के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट किया है कि आंशिक न्यायालय कार्य दिवसों के दौरान उनकी पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ताओं (सीनियर एडवोकेट्स) को न तो मामलों का उल्लेख करने और न ही दलीलें रखने की अनुमति दी जाएगी। इस अवधि में केवल युवा वकील और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (एओआर) ही अदालत में पक्ष रख सकेंगे।
सोमवार को सुनवाई शुरू होते ही जस्टिस विक्रम नाथ ने यह घोषणा की। उन्होंने जस्टिस पीबी वराले के साथ गठित पीठ की अध्यक्षता करते हुए कहा कि ग्रीष्मावकाश के दौरान युवा वकीलों को अधिक अवसर देने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की जा रही है। जब एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने मामले का उल्लेख करने की कोशिश की, तो अदालत ने स्पष्ट किया कि इस अवधि में वरिष्ठ वकीलों को सुनवाई में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने कहा कि संबंधित मामले में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड या निर्देश देने वाले वकील को पेश किया जाए, जिसे सुना जाएगा।
अन्य पीठ ने भी यही रुख अपनाया
इसी तरह की व्यवस्था जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने भी अपनाई। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि यदि कनिष्ठ वकील मामलों में दलीलें रखेंगे तो उन्हें अदालत में अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलेगा। वहीं जस्टिस संजय करोल की अध्यक्षता वाली पीठ ने भी इसी रुख का समर्थन किया। कानूनी हलकों में इस कदम को युवा अधिवक्ताओं को प्रोत्साहन देने और उन्हें अदालत में स्वतंत्र रूप से अपनी पैरवी प्रस्तुत करने का अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में 1 जून से 12 जुलाई तक ग्रीष्मावकाश
सुप्रीम कोर्ट में 1 जून से 12 जुलाई तक ग्रीष्मावकाश चल रहा है। हालांकि अब इसे आंशिक न्यायालय कार्य दिवस कहा जाता है और इस दौरान हर सप्ताह तीन से चार पीठें नियमित रूप से मामलों की सुनवाई करती हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मामलों में वरिष्ठ अधिवक्ता पेश हो रहे हैं, उन्हें खारिज नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों को सामान्य न्यायिक कार्य शुरू होने के बाद जुलाई में सूचीबद्ध किया जाएगा।

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