After LPG, are dark clouds now looming over CNG and PNG i

देश में एलपीजी के बाद अब सीएनजी और पीएनजी पर भी संकट के बादल?

देश में एलपीजी के बाद अब सीएनजी और पीएनजी पर भी संकट के बादल?

-रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज के पास कतर के दो एलएनजी टैंकरों को रोका

नई दिल्ली। एलपीजी सिलेंडर की किल्लत और कीमतों में उछाल के बाद अब देशभर के घरों-वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी और पीएनजी पर भी संकट मंडरा रहा हैं। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर रखा है, जहां से भारत के ज्यादातर एलएनजी आयात होते हैं। नेचुरल गैस लिक्विफाइड फॉर्म (एलएनजी) में ही आयात किया जाता है। इसे टैंकरों से भारत लाया जाता है, फिर रिगैसीफाई करके पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) और सीएनजी (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) में बदला जाता है। दरअसल ये आशंका ईरान की ताजा कार्रवाई के बाद बढ़ी है।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के समुद्री रास्ते की ओर जा रहे कतर के दो एलएनजी टैंकरों को रोक दिया है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई बुरी तरह प्रभावित है। सूत्र के मुताबिक ईरान ने पिछले सप्ताह पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका के साथ हुए एक समझौते के तहत इन जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी थी। नाम न छापने की शर्त पर सूत्र ने बताया कि यह कदम उसी बातचीत का हिस्सा था।
हालांकि, शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक सोमवार तक दोनों जहाज संयुक्त अरब अमीरात के तट पर तैनात थे और उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार नहीं किया था। यदि ये जहाज सफलतापूर्वक इस जलमार्ग को पार कर लेते, तो युद्ध के बाद से इस मार्ग से गुजरने वाला यह पहला एलएनजी कार्गो होता। बता दें 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के साथ इस युद्ध की शुरुआत हुई थी। इस संघर्ष में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है।
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद कतर ने मार्च 2026 से एक्सपोर्ट रोक दिया है। होर्मुज से गुजरने वाले एलएनजी टैंकरों की बीमा कवरेज तक मुश्किल हो गई है। नतीजा? भारत के एलएनजी टर्मिनल्स पर स्टॉक खत्म हो सकते हैं। एलपीजी की तरह अब पीएनजी और सीएनजी भी कीमतों के चक्रव्यूह में फंस सकते हैं। हालांकि एक राहत की बात ये है कि ईरान ने भारत को मित्र देशों की लिस्ट में रखा है। जिसका मतलब है कि भारत के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत है। लेकिन कलर से होने वाली सप्लाई अभी भी मेन बाधा बनी हुई है।
पिछले दिनों भारत सरकार ने पीएनजी और सीएनजी को प्राथमिकता दी है। घरों और पेट्रोल पंपों को 100फीसदी सप्लाई का वादा है, जबकि इंडस्ट्री और कमर्शियल यूजर्स को 20-70फीसदी कटौती झेलनी पड़ रही है। गुजरात गैस और जीएसपीसी जैसी कंपनियां पहले से ही इंडस्ट्रियल कस्टमर्स को आधा या उससे कम गैस दे रही हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि अगर युद्ध लंबा चला तो प्राथमिकता वाले सेक्टर भी प्रभावित होंगे। एनालिस्ट बताते हैं कि अभी सप्लाई पूरी तरह ठप नहीं हुई है, लेकिन होर्मुज पर निर्भरता भारत की कमजोरी है। स्टोरेज की कमी के कारण रातोंरात संकट आ सकता है।

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