पीओके में बवाल के बीच सेनाध्यक्ष द्विवेदी पहुंचे उत्तरी कमान
पीओके में बवाल के बीच सेनाध्यक्ष द्विवेदी पहुंचे उत्तरी कमान
भारत की सामरिक चेतावनी
नई दिल्ली । पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में खराब हुए हालात, पाकिस्तानी फौज की बर्बर कार्रवाई और सुलगते जनाक्रोश के बीच भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी का उत्तरी कमान मुख्यालय पहुंचना महत्वपूर्ण रणनीतिक संकेत बताया जा रहा है। यह दौरा तब हुआ है, जब पीओके में लोगों पर गोलियां चल रही हैं, जबकि भारतीय सेना अपनी तैयारियों को धार दे रही है।
भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल द्विवेदी ने उधमपुर में मौजूद उत्तरी कमान मुख्यालय में अभियानगत तैयारियों, क्षमता विकास और आधुनिकीकरण अभियानों की गहन समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों के साथ प्रत्यक्ष और डिजिटल माध्यम से चर्चा कर बहुआयामी सैन्य अभियानों,नई तकनीकों के इस्तेमाल और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया। जनरल द्विवेदी ने कहा कि भविष्य की चुनौतियां पारंपरिक नहीं होंगी, इसलिए भारतीय सेना को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम और लचीला बनाना जरुरी है। उन्होंने नवाचार और आधुनिक युद्ध प्रणाली अपनाने पर विशेष जोर दिया।
भारतीय सेना की सक्रियता तब सामने आई है जब पीओके में स्थिति विस्फोटक बनी हुई है। खुफिया दस्तावेजों के अनुसार, 5 से 9 जून के बीच पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा एजेंसियों ने नागरिकों के खिलाफ सुनियोजित हिंसा की। बारमंग पुल गोलीकांड के बाद, आर्थिक सुधारों की मांग कर रही संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) को आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित किया गया। जेएएसी नेता शहजैब हबीब की हत्या ने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया। आधिकारिक तौर पर 11 मौतें बताई जा रही हैं, जबकि खुफिया रिपोर्टों में 19 बच्चों और सात गर्भवती महिलाओं सहित अधिक मौतों का दावा किया गया है। आरोप है कि पाकिस्तान ने मुख्य भूमि से लगभग चौदह हजार अतिरिक्त सैनिक पीओके में उतारे हैं।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने निहत्थे शोक जुलूसों और आम नागरिकों के काफिलों पर सीधे गोलियां चलाईं। पूरे इलाके में संचार सेवाएं, इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क ठप किए गए, जिससे पूर्ण बंद का माहौल बन गया। मीरपुर डिवीजन, खासकर भीमबर और कोटली, में सबसे ज्यादा तनाव देखा गया, जहां से लोग मुजफ्फराबाद मार्च के लिए निकले थे। कायदे आजम स्टेडियम के आसपास भारी भीड़ जमा हुई, जिसके बाद प्रदर्शन और हड़ताल तेज हो गई। पीओके प्रशासन ने जेएएसी के दो नेताओं के खिलाफ राजद्रोह की कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे जन आक्रोश और बढ़ गया है।
