Centre's argument Common people will save Rs 8,400 annually

केंद्र का तर्क…… आम लोगों को सालाना 8,400 की बचत

केंद्र का तर्क…… आम लोगों को सालाना 8,400 की बचत

-1600 का सिलेंडर 900 में मिल रहा

नई दिल्ली । हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, इसके बाद केंद्र सरकार ने दावा किया है कि उपभोक्ताओं को अब भी भारी राहत दी जा रही है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की वास्तविक लागत 1,600 से अधिक है, जबकि उपभोक्ताओं को यह मात्र 942 में दिया जा रहा है। केंद्र सरकार के तर्क के अनुसार, आम उपभोक्ताओं को हर सिलेंडर पर लगभग 700 की अप्रत्यक्ष राहत मिल रही है। इस हिसाब से, अगर कोई परिवार साल में 12 सिलेंडर खर्च करता है, तब उस परिवार को अप्रत्यक्ष रूप से सालाना 8,400 की बचत हो रही है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण खनूजा ने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 300 की अतिरिक्त सब्सिडी भी मिलती है। इसके बाद उन्हें प्रति सिलेंडर कुल लगभग 1,000 का लाभ मिल रहा है, जो सालाना 12 सिलेंडरों पर 12,000 तक पहुंच जाता है।
हालांकि, इन अप्रत्यक्ष लाभों के बीच, आम आदमी के किचन बजट पर प्रत्यक्ष रूप से पड़ने वाले बोझ को भी समझना महत्वपूर्ण है। यदि जनवरी 2026 से दिसंबर 2026 तक की अवधि के दौरान कोई परिवार हर महीने एक सिलेंडर लेता है, तब मार्च और जून में हुई कीमत वृद्धि के कारण उसकी जेब पर सीधा असर पड़ा है। मार्च से मई तक 120 और जून में 89 का अतिरिक्त खर्च आया। यदि दिसंबर तक कीमतें स्थिर रहती हैं, तब इस साल आम उपभोक्ताओं को अपने किचन बजट पर 803 का सीधा अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए स्थिति और भी जटिल है। एक ओर, उन्हें बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ रहा है, और दूसरी ओर, सब्सिडी में कटौती की दोहरी मार भी झेलनी पड़ रही है। पहले उन्हें नौ सिलेंडर पर कुल 2,700 की सब्सिडी मिलती थी, जो अब घटाकर केवल चार सिलेंडर पर 1,200 कर दी गई है। इसका मतलब है कि उन्हें सीधे 1,500 का नुकसान हो रहा है। इस प्रकार, यदि कोई उज्ज्वला लाभार्थी साल में 12 सिलेंडर का उपयोग करता है, तब बढ़ी हुई कीमतों के 803 के बोझ के साथ-साथ सब्सिडी कटौती के कारण 1,500 का भी नुकसान होगा। कुल मिलाकर, इस श्रेणी के उपभोक्ताओं पर सालाना 2,303 का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि उज्ज्वला योजना के तहत 300 प्रति सिलेंडर की सब्सिडी साल के पहले चार रिफिल तक सीमित है, क्योंकि उनका तर्क है कि औसतन उज्ज्वला परिवार साल में 4-5 सिलेंडर ही उपयोग करते हैं। मंत्रालय ने 29 की हालिया बढ़ोतरी को भी बहुत मामूली बताया है, इसे प्रति दिन लगभग 1 के बराबर बताया है। कुल मिलाकर, केंद्र सरकार का दावा अपनी जगह सही हो सकता है कि उपभोक्ताओं को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल रहा है, लेकिन वास्तविक धरातल पर ग्राहकों और उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों, दोनों की ही जेब पर सीधा और स्पष्ट बोझ बढ़ रहा है।

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