Barwani Madhya Pradesh Mission Green Commando began right

मध्य प्रदेश: बड़वानी- जहाँ सड़कें खत्म, वहीं से शुरू हुआ ‘मिशन ग्रीन कमांडो’… दुर्गम पहाड़ियों तक पहुँची स्वास्थ्य सेवाएँ

मध्य प्रदेश: बड़वानी – जहाँ सड़कें खत्म, वहीं से शुरू हुआ ‘मिशन ग्रीन कमांडो’… दुर्गम पहाड़ियों तक पहुँची स्वास्थ्य सेवाएँ

बड़वानी की 9 ग्राम पंचायतों के 2,500 घरों तक पहुँची 200 टीमें, टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की जांच और स्वास्थ्य जागरूकता पर विशेष फोकस।

इंदौर : सुबह की पहली किरण के साथ इंदौर संभाग के बड़वानी जिले के पाटी विकासखंड के दुर्गम बोकराटा सेक्टर में एक अलग ही हलचल दिखाई दी। पहाड़ों से घिरे, विरल आबादी वाले इस क्षेत्र में गुरूवार 16 जुलाई को सैकड़ों लोग किसी आयोजन के लिए नहीं, बल्कि एक संकल्प को पूरा करने के लिए निकले थे, यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे, कोई भी गर्भवती महिला आवश्यक स्वास्थ्य जाँच से दूर न रह जाए और कोई भी जरूरतमंद परिवार शासन की स्वास्थ्य सेवाओं से अछूता न रह जाए। साथ ही इस बदले मौसम में कैसे बीमारियों से सुरक्षित किया जा सके। सतपुड़ा की दुर्गम पहाड़ियों और विभिन्न फलियों में बसे ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के उद्देश्य से बड़वानी कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह के निर्देशन में मिशन ग्रीन कमांडो अभियान का सफलतापूर्वक संचालन किया गया।
संकल्प के साथ आज ‘मिशन ग्रीन कमांडो’ के अंतर्गत बोकराटा सेक्टर की 9 ग्राम पंचायतों में फैले लगभग 2,500 घरों तक पहुँचने के लिए करीब 200 टीमों को मैदान में उतारा गया। इन टीमों में नोडल अधिकारी, मेडिकल ऑफिसर, एएनएम, सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, पटवारी और स्थानीय स्वयंसेवक शामिल रहे। सभी टीमों को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई, ताकि कोई भी घर छूटने न पाए।


इस अभियान का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना नहीं था, बल्कि प्रत्येक परिवार तक विश्वास और सुरक्षा का संदेश पहुँचाना भी था। टीमों ने घर-घर जाकर बच्चों के टीकाकरण की स्थिति का सत्यापन किया, छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण सुनिश्चित किया, गर्भवती महिलाओं का एएनसी पंजीयन एवं स्वास्थ्य परीक्षण किया तथा सिकल सेल रोग की स्क्रीनिंग की। इसके साथ ही गंभीर कुपोषित, मध्यम कुपोषित, गंभीर रूप से कम वजन वाले बच्चों तथा अन्य चिन्हित जोखिम वाले मामलों की पहचान कर उन्हें आगे की चिकित्सा एवं पोषण सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई।
बरसात के मौसम में फैलने वाली बीमारियों की आशंका को देखते हुए प्रत्येक परिवार को आवश्यक दवाइयों की किट तथा ओआरएस पैकेट भी उपलब्ध कराए गए। स्वास्थ्य कर्मियों ने ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल, हाथों की स्वच्छता, पोषण, मलेरिया, डायरिया तथा अन्य मौसमी बीमारियों से बचाव के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।
इस विशाल अभियान की सफलता के पीछे व्यापक और सुनियोजित व्यवस्थाएँ भी रहीं। स्वास्थ्य टीमों को सड़क की अंतिम सीमा तक पहुँचाने के लिए 10 बसों, लगभग 100 शासकीय वाहनों तथा स्थानीय सरपंचों, पटवारियों, पटेलों एवं ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराई गई मोटरसाइकिलों का उपयोग किया गया। जहाँ वाहनों का रास्ता समाप्त हुआ, वहाँ से स्वास्थ्यकर्मियों ने दवा किट, टीकाकरण सामग्री और आवश्यक उपकरण अपने साथ लेकर कठिन पहाड़ी रास्तों पर पैदल यात्रा की। कई टीमों ने घंटों पैदल चलकर उन घरों तक पहुँच बनाई, जहाँ स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचना सामान्य दिनों में अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
इस दौरान स्वास्थ्यकर्मियों का समर्पण प्रेरणादायक रहा। उनके कंधों पर केवल टीकाकरण सामग्री या दवा किट नहीं थीं, बल्कि उन दूरस्थ परिवारों के बेहतर स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी थी, जिनके लिए स्वास्थ्य सेवाओं का हर कदम अमूल्य है। दूसरी ओर ग्रामीणों ने भी पूरे उत्साह के साथ अभियान का स्वागत किया और स्वास्थ्य परीक्षण तथा टीकाकरण में सक्रिय सहयोग दिया।
‘मिशन ग्रीन कमांडो’ ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि अच्छा प्रशासन केवल कार्यालयों में बैठकर नहीं, बल्कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में अंतिम व्यक्ति तक पहुँचकर अपनी जिम्मेदारी निभाने से स्थापित होता है। पाटी की दुर्गम पहाड़ियों में आज यह अभियान केवल स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने का माध्यम नहीं बना, बल्कि शासन की उस संवेदनशील सोच का प्रतीक भी बना, जो मानती है कि विकास का वास्तविक अर्थ तभी है, जब उसकी रोशनी समाज के सबसे दूर बसे घर तक पहुँचे।
दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित परिवारों तक पहुंची स्वास्थ्य की संजीवनी पिछले वर्ष 27 सितंबर 2025 को आयोजित पहले चरण में ग्रीन कमांडो ने एक ही दिन में 4,500 से अधिक घरों तक पहुंचकर ग्रामीणों को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाया था।
पहाड़ों की ऊँचाइयाँ, जंगलों की कठिन राहें और लंबी पैदल यात्राएँ आज एक बार फिर मानवीय संवेदनाओं और सेवा के संकल्प के सामने छोटी साबित हुईं। ‘मिशन ग्रीन कमांडो’ ने यह विश्वास और मजबूत किया कि जब लक्ष्य अंतिम छोर पर बसे व्यक्ति तक पहुँचना हो, तब कोई रास्ता दुर्गम नहीं होता और कोई मंजिल दूर नहीं रहती।
क्यों खास है यह क्षेत्र ??
यह इलाका अपनी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए जाना जाता है। कई बस्तियाँ ऐसी हैं, जहाँ तक पहुँचने के लिए पहले वाहन से लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, फिर ऊँची-ऊँची पहाड़ियों की चोटियों पर चढ़ते हुए, संकरी पगडंडियों और जंगलों के बीच कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। कई स्थानों पर रास्ते केवल पैदल यात्रियों के लिए ही उपलब्ध हैं। लेकिन सेवा का संकल्प जब मजबूत हो, तब दूरी और दुर्गमता दोनों ही पीछे छूट जाती हैं।

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