Home Minister Shah advised the states and union territories to

गृहमंत्री शाह ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्रभावी कदम उठाने की दी सलाह

जेलों में कैदियों को कट्टरपंथी बनाने की घटनाएं आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा

-गृहमंत्री शाह ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्रभावी कदम उठाने की दी सलाह

नई दिल्ली। जेलों में कैदियों को कट्टरपंथी बनाए जाने की घटनाएं अब गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। यह प्रवृत्ति आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बन रही है इसलिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया है।
बता दें केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के गृह सचिवों से कहा है कि कारागारों में बंद कमजोर मानसिकता वाले व्यक्तियों में उग्र विचारधारा के प्रसार को रोकना और ऐसे कैदियों को मुख्यधारा में लौटाने के लिए ‘डि-रेडिकलाइजेशन’ की प्रक्रिया अपनाना अत्यंत जरुरी है। यह न केवल सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी है, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी सहायक सिद्ध होगा।
जेल में एक सीमित व नियंत्रित वातावरण होता है जहां सामाजिक अलगाव, समूह मनोवृत्ति तथा निगरानी की सीमितता जैसी परिस्थितियां अतिवादी विचारों के पनपने के लिए उपजाऊ भूमि बन जाती हैं। कई कैदी, जो पहले से ही हताशा, समाज से कटाव या हिंसात्मक प्रवृत्तियों से ग्रस्त होते हैं, ऐसे माहौल में उग्रपंथी विचारधाराओं के प्रभाव में आ जाते हैं। इसलिए गृह मंत्रालय ने चेताया है कि कुछ मामलों में उग्रपंथी बंदी हिंसात्मक गतिविधियों में लिप्त हो सकते हैं। चाहे वह जेल के स्टाफ पर हमला हो, अन्य बंदियों को नुकसान पहुंचाना हो या फिर बाहरी नेटवर्क के साथ मिलकर देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देना हो।
गृह मंत्रालय ने ‘मॉडल प्रिजन मैनुअल 2016’ और ‘मॉडल प्रिज़न्स एंड करेक्शनल सर्विसेज एक्ट, 2023’ का हवाला देते हुए बताया कि इन मॉडल दस्तावेजों में उच्च-जोखिम कैदियों, उग्रवादियों आदि को अन्य कैदियों से अलग रखने के लिए विशेष सुरक्षा वाले कारागारों की व्यवस्था की गई है। पूर्व में जारी की गई सलाहों को दोहराते हुए गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों से अपेक्षा जताई है कि वे कठोर प्रवृत्ति के बंदियों की पहचान, निगरानी और परामर्श की प्रभावी व्यवस्था करें।
गृह मंत्रालय ने सुझाव दिया कि जो कैदी उग्र विचारधाराओं का प्रचार कर अन्य कैदियों को बहकाते हैं, उन्हें सामान्य कैदियों से अलग रखा जाए। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने-अपने क्षेत्रों में स्वतंत्र हाई सिक्योरिटी प्रिजन कॉम्प्लेक्स स्थापित करने पर विचार करना चाहिए ताकि आतंकवादियों व कट्टरपंथियों को अलग रखकर उनके प्रभाव को सीमित किया जा सके। इन कैदियों पर निगरानी उपकरणों और खुफिया तंत्र की मदद से कड़ी निगरानी की जाए और भीतर चल रहे किसी भी उग्रवादी नेटवर्क की पहचान कर उसे समय रहते खत्म किया जाए।
केंद्र सरकार का मानना है कि बंदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण, शिक्षा और पुनर्वास कार्यक्रमों में जोड़कर उनकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है। साथ ही, परिवार से निरंतर संपर्क बनाए रखने की सुविधा से उनकी भावनात्मक स्थिरता को भी बल मिलेगा, जिससे फिर समाज में सफल पुनर्वास संभव हो सकेगा। कैदियों के सुधार की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम समयानुकूल और जरुरी है। अब राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे इन दिशा-निर्देशों को लागू कर कारागारों को केवल सजा के केंद्र न बनाकर, सुधार और पुनर्वास के स्थलों में रूपांतरित करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Releated

IMD की रिपोर्ट : बिहार, यूपी और दिल्ली समेत देश के 30 सब-डिवीजन में सामान्य से कम बारिश

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱IMD की रिपोर्ट: बिहार, यूपी और दिल्ली समेत देश के 30 सब-डिवीजन में सामान्य से कम बारिश नई दिल्ली: दक्षिण झारखंड और उससे सटे उत्तर-आंतरिक ओडिशा (North Interior Odisha) पर स्थित अवदाब (Depression) सोमवार को आगे बढ़ा जिसकी वजह से ओडिशा और झारखण्ड में काफी अच्छी बारिश रिकॉर्ड की गयी. […]

India Rising: Road to EWC Powered by BASF Concludes in Mumbai with CM’s Address, Benjamin Bok Secures Esports World Cup 2026 Spot

Print 🖨 PDF 📄 eBook 📱India Rising: Road to EWC Powered by BASF Concludes in Mumbai with CM’s Address, Benjamin Bok Secures Esports World Cup 2026 Spot Mumbai: CM of Maharashtra Shri. Devendra Fadnavis positions Maharashtra as a future hub for gaming and esports as India Rising: Road to EWC brings together global competition, creators […]