भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम डील: ऊर्जा भविष्य का अहम पड़ाव
भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम डील: ऊर्जा भविष्य का अहम पड़ाव
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया ऑस्ट्रेलिया यात्रा में यूरेनियम आपूर्ति से जुड़ा अहम समझौता हुआ है। समझौते के तहत भारत की परमाणु ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दुनिया के विशाल यूरेनियम भंडार का करीब 32 प्रतिशत हिस्सा ऑस्ट्रेलिया के पास है, पर कानूनी अड़चनों और राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण भारत को इसका निर्यात लंबे समय से बाधित रहा।
पीएम मोदी ने समझौते को परमाणु ऊर्जा पर एक अहम कदम बताया, जिससे ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की आपूर्ति का रास्ता खुलेगा। दोनों देशों के संयुक्त बयान में कहा कि यह यूरेनियम निर्यात सिर्फ शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए होगा और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सुरक्षा प्रावधानों के तहत होगा।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने समझौते का स्वागत कर कहा कि यह ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम निर्यात की सुविधा देगा, जिससे गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता का हिस्सा बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह ऐतिहासिक समझौता वर्षों के प्रयास का परिणाम है। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 2014 में परमाणु सहयोग समझौता किया था, जिससे यूरेनियम निर्यात का मार्ग प्रशस्त किया था। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया ने 2012 में भारत पर से निर्यात प्रतिबंध हटा दिया था, बावजूद इसके भारत को चीन, जापान, ताइवान और अमरीका जैसे उन देशों की सूची में शामिल नहीं हुआ था जिन्हें वह यूरेनियम बेचता था। यह नया समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक जीत मानी जा रही है।
