Karva Chauth – करवा चौथ – केवल परंपरा नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा और प्रेम का प्रतीक
करवा चौथ – केवल परंपरा नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा और प्रेम का प्रतीक
आलेख – मेलोडियस पीहू (Melodious pihu)
UNN: विवाह भारतीय संस्कृति में केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि दो आत्माओं, दो परिवारों और दो संस्कारों का संगम है। यह वह पवित्र बंधन है जो एक स्त्री को गृहिणी बनाता है — जो सिर्फ घर नहीं संभालती, बल्कि पूरे परिवार के सुख-दुख, प्रेम और एकता की डोर थामे रखती है। एक कुशल गृहिणी बनना केवल अच्छा खाना बनाने या घर सजाने का नाम नहीं है, बल्कि यह भावनाओं, समझदारी और रिश्तों की गहराई को पहचानने की कला भी है। हर साल जब करवा चौथ आता है, तब अनेकों महिलाएँ अपने पतियों की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए उपवास रखती हैं। लेकिन यह व्रत केवल भूखा रहने या रीति निभाने का नाम नहीं है — यह प्रेम, श्रद्धा और सच्चे समर्पण का प्रतीक है। कुशल गृहिणी वही है जो हर व्रत और त्योहार को केवल ह्लरीति या दिखावेह्व के लिए नहीं, बल्कि मन की सच्ची भावना से करती है। वह समझती है कि कोई भी व्रत या तीज केवल परंपरा नहीं, बल्कि रिश्तों में प्रेम और एकता का माध्यम है। दिखावे के लिए नहीं, श्रद्धा के लिए व्रत करें आजकल बहुत सी महिलाएँ यह सोचकर व्रत रखती हैं कि ह्लसब रख रहे हैं तो मैं भी रख लूँह्व या ह्लसोशल मीडिया पर डालने के लिए अच्छा लगेगा या पति से महंगे गिफ्ट मिलेगे उसके स्टेटस के लिए किसी को जलने या दिखावे के लिए नहीं करे जो भी करे पूरी श्रद्धा और समर्पित भाव से हमेशा याद रखिए, ईश्वर भाव देखते हैं, प्रदर्शन नही सच्ची पत्नी वही है जो अपने व्रत में श्रद्धा, संयम और सच्चे मन का भाव रखे, क्योंकि पति-पत्नी का रिश्ता समझ, सम्मान और साझेदारी का होता है। सिर्फ प्यार चाहिए नहीं, प्यार देना भी जरूरी है। पुरुष रोते नहीं, पर महसूस करते हैं — उनके दिल की कद्र करें। मतभेद हों तो बात करें, ताने नहीं दें। रिश्ते बातचीत से संवरते हैं, चुप्पी और शिकायतों से नहीं। हर रिश्ते को उतना ही सम्मान दें, जितना आप अपने लिए चाहती हैं । यही एक सच्ची और अच्छी ग्रहणी की पहचान है । प्यार से मिला हर तोहफा अनमोल होता है कई बार पत्नियाँ करवा चौथ या किसी भी मौके पर गिफ्ट को लेकर पति से नाराज या रूठ जाती हैं,

लेकिन याद रखिए —
प्यार से दिया गया हर छोटा-सा उपहार भी अनमोल होता है। कुशल गृहिणी कभी भी अपने पति से उपहार या गिफ्ट की माँग करके झगड़ा नहीं करती और नहीं व्रत है तो बाहर जा कर खाना है या महंगे रेस्टोरेंट की जिद नहीं करती ऐसे मौके पर पूरे परिवार के लिए प्यार और खुशी से घर पर ही खाना बनाए क्योंकि प्यार से बना भोजन आपके रिश्तों को और खूबसूरत बनाएगा! क्योंकि व्रत की भावना भौतिक वस्तुओं से कहीं ऊपर होती है। पति का प्यार, सम्मान और उसकी मुस्कान ही सबसे बड़ा उपहार है। उसी में हर आभूषण, हर तोहफा और हर त्यौहार की खूबसूरती छिपी होती है। इस बार ये प्रण ले की अपने पति के साथ-साथ उसके पूरे परिवार को भी पूरे दिल से प्यार और इज्जत करेगी आप अपना रिश्ता केवल पति तक सीमित नहीं रखे बल्कि उसकी सास, ससुर, ननद, देवर — सभी से भी अपना अपनापन और जुड़ाव रखे सास को माँ का दर्जा दें: सास को विरोधी नहीं, सहयोगी समझें। वह वही महिला हैं जिन्होंने आपके पति को जन्म दिया है। उनके अनुभव, उनके संस्कार आपकी जिंदगी में प्रकाश बन सकते हैं। पति के रिश्तों का सम्मान करें: पति को परिवार और अपने बीच की दीवार नहीं, बल्कि पुल बनाएं। कभी भी उन्हें उनके परिवार से दूर न करें। याद रखिए, जो पत्नी पति को उसके अपने से जोड़कर रखती है, वही उसके दिल में स्थायी स्थान पाती है। ननद और देवर से प्रेम: ननद को अपनी बहन और देवर को अपने छोटे भाई की तरह समझें। थोड़ा मजाक, थोड़ा प्यार और ढेर सारा अपनापन झ्र यही इन रिश्तों की खूबसूरती है। व्रत और त्यौहार झ्र आत्मिक जुड़ाव का माध्यम हर तीज, हर व्रत केवल रिवाज नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और रिश्तों के प्रति समर्पण का प्रतीक है। करवा चौथ जैसे व्रत हमें सिखाते हैं कि , सच्चा प्रेम त्याग में है, दिखावे में नहीं। जब कोई पत्नी अपने पति के लिए पूरे दिन बिना खाए-पिए उपवास रखती है, तो वह यह नहीं दिखाती कि वह कमजोर है, बल्कि यह बताती है कि उसका प्रेम कितना गहरा, शुद्ध और ईमानदार है। और जब पति इस भावना को समझता है, तो दोनों के बीच केवल रिश्ता नहीं, बल्कि आत्मिक एकता बनती है। बच्चों के लिए आप ही सबसे बड़ा उदाहरण हैं हर पत्नी, हर माँ यह याद रखे —
आप जो करती हैं, आपके बच्चे वही सीखते हैं। अगर आप दिखावे के लिए व्रत करेंगी, गिफ्ट के लिए झगड़ेंगी, या दूसरों से तुलना करेंगी, तो वही आदतें आपके बच्चे भी आगे चलकर अपनाएँगे। इसलिए अपने व्रत और अपने रिश्तों की पवित्रता बनाए रखें। आपकी सच्चाई, श्रद्धा और विनम्रता ही आपके बच्चों का संस्कार बनेगी। वही आगे चलकर उन्हें सिखाएगी कि सम्मान और प्रेम किसी भी रिश्ते की सबसे बड़ी नींव है। अपने परिवार को सच्चे संस्कारों की छाया में रखे।
करवा चौथ का सच्चा अर्थ यही है — सिर्फ चाँद देखने या उपवास करने का नहीं, बल्कि प्यार, सम्मान और आभार का उत्सव मनाने का है। शायरी झ्र दिल से एक संदेश ना दिखावे में रहो, ना मांगो बढ़ चढ़ के कोई इनाम, करवा चौथ का व्रत है दुनियां को दो प्यार का पैगाम। प्यार से जो मिले उसे दिल से करो स्वीकार रिश्तों की गरिमा को समझ कर दो एक कुशल ग्रहणी की पहचान।
