Many times political battles are fought in the Supreme Court CJI

कई बार राजनीतिक जंग सुप्रीम कोर्ट में लड़ी जाती है इस पर विचार करना चाहिए: सीजेआई

कई बार राजनीतिक जंग सुप्रीम कोर्ट में लड़ी जाती है इस पर विचार करना चाहिए: सीजेआई

असम सीएम हिमंत के मुस्लिमों को लेकर दिए भाषण पर विपक्ष ने जताई थी आपत्ति

नई दिल्ली । असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के बयान को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि कई बार राजनीतिक जंग सुप्रीम कोर्ट में लड़ी जाती है। उन्होंने इस याचिका पर विचार करने की बात कही। विपक्ष ने सीएम सरमा के मुस्लिमों पर निशाना लगाते वीडियो और भाषण पर आपत्ति जताई थी। शीर्ष न्यायालय में सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच सुनवाई कर रही थी। सीजेआई ने कहा कि परेशानी यह है कि जब चुनाव आते हैं, जो कई बार उन्हें यहां सुप्रीम कोर्ट में लड़ा जाता है। हम इसे देखेंगे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया नेता एनी राजा की ओर से याचिका दाखिल की गई थी। उन्होंने सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के 27 जनवरी को दिए भाषण पर आपत्ति जताई थी। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट पहुंचे एडवोकेट ने कहा कि मीलॉर्ड राजनीतिक दल के सदस्य की तरफ से हेट स्पीच के खिलाफ एक याचिका दाखिल हुई है। एक वीडियो भी है, जिसमें हिमंत सरमा मुस्लिमों पर निशाना लगाते नजर आ रहे हैं।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सीएम हिमंत सरमा के भाषण के खिलाफ 2 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने कहा कि विशेष रूप से उच्च संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति की तरफ से दिए गए इस तरह के बयानों को राजनीतिक बयानबाजी या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सीएम सरमा ने 27 जनवरी को डिगबोई में एक कार्यक्रम में कहा कि ‘मिया’ समुदाय के लोगों को राज्य में मतदान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची से ‘मिया’ मतदाताओं के नाम हटाना केवल एक शुरुआती कदम है, और जब बाद में राज्य में एसआईटार किया जाएगा, तो बांग्लादेश के मुसलमानों के चार से पांच लाख वोट रद्द कर दिए जाएंगे।
सीएम सरमा ने कहा था कि हां, हम मिया समुदाय के वोट चुराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें हमारे देश में नहीं, बल्कि बांग्लादेश में वोट देना चाहिए। हम यह तय करने के लिए व्यवस्था कर रहे हैं कि वे असम में वोट न दे सकें। उन्होंने कहा था कि अगर मिया समुदाय को इस संबंध में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, तो हमें क्यों चिंतित होना चाहिए?

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