Prannoy Roy Launches a New Era of Journalism with DeKoder

76 की उम्र में फिर मैदान में उतरे प्रणय रॉय Prannoy Roy, ‘DeKoder’ के साथ शुरू की नई पत्रकारिता

76 की उम्र में फिर मैदान में उतरे प्रणय रॉय Prannoy Roy, ‘DeKoder’ के साथ शुरू की नई पत्रकारिता

एक हाथ में माइक, दूसरे में मोबाइल… और दिल में वही पुराना जुनून..
वायरल हो रही उनकी एक तस्वीर में वो कहते हैं—
“पत्रकारिता के लिए सिर्फ एक माइक और एक मोबाइल ही काफी है।”

UNN: NDTV के दौर से लेकर नए सफर तक—सब कुछ बदल गया, लेकिन जुनून अब भी वैसा ही, Prannoy Roy ने एक बार फिर से “शुरुआत” चुन ली है। कभी NDTV के जरिए भारतीय पत्रकारिता को नई पहचान देने वाले प्रणय रॉय आज फिर जमीन पर लौट आए हैं—लेकिन इस बार बिना बड़े स्टूडियो, बिना भारी-भरकम टीम के। ‘DeKoder’ से फिर लिखी नई कहानी.
कोलकाता में चुनावी माहौल के बीच, जब कैमरों की भीड़ और बड़े चैनलों का शोर है, वहीं प्रणय रॉय अकेले खड़े हैं—अपनी नई पहल DeKoder के साथ। खुद वीडियो शूट करते हुए, खुद रिपोर्टिंग करते हुए… जैसे पत्रकारिता को फिर से उसकी “जड़ों” तक ले जाने की कोशिश हो। एक वक्त था जब चुनावी नतीजों की रात “इवेंट” बन जाती थी, श्रेय अगर किसी को जाता है, तो वो प्रणय रॉय ही हैं।

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Date : 16 April 2026 Posted By : EDITOR
76 की उम्र में फिर मैदान में उतरे प्रणय रॉय Prannoy Roy, ‘DeKoder’ के साथ शुरू की नई पत्रकारिता
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76 की उम्र में फिर मैदान में उतरे प्रणय रॉय Prannoy Roy, ‘DeKoder’ के साथ शुरू की नई पत्रकारिता

एक हाथ में माइक, दूसरे में मोबाइल… और दिल में वही पुराना जुनून..
वायरल हो रही उनकी एक तस्वीर में वो कहते हैं—
“पत्रकारिता के लिए सिर्फ एक माइक और एक मोबाइल ही काफी है।”

UNN: NDTV के दौर से लेकर नए सफर तक—सब कुछ बदल गया, लेकिन जुनून अब भी वैसा ही, Prannoy Roy ने एक बार फिर से “शुरुआत” चुन ली है। कभी NDTV के जरिए भारतीय पत्रकारिता को नई पहचान देने वाले प्रणय रॉय आज फिर जमीन पर लौट आए हैं—लेकिन इस बार बिना बड़े स्टूडियो, बिना भारी-भरकम टीम के। ‘DeKoder’ से फिर लिखी नई कहानी.
कोलकाता में चुनावी माहौल के बीच, जब कैमरों की भीड़ और बड़े चैनलों का शोर है, वहीं प्रणय रॉय अकेले खड़े हैं—अपनी नई पहल DeKoder के साथ। खुद वीडियो शूट करते हुए, खुद रिपोर्टिंग करते हुए… जैसे पत्रकारिता को फिर से उसकी “जड़ों” तक ले जाने की कोशिश हो। एक वक्त था जब चुनावी नतीजों की रात “इवेंट” बन जाती थी, श्रेय अगर किसी को जाता है, तो वो प्रणय रॉय ही हैं।

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