President Draupadi Murmu reached Gayaji, welcomed by the

गयाजी में पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री ने किया स्वागत

गयाजी में पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री ने किया स्वागत

गयाजी । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2025 में गया में श्री विष्णुपद मंदिर में पूजा-अर्चना करके बिहार का मान बढ़ाया। इस दौरान उनका स्वागत बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी और नीतिश सरकार के मंत्री प्रेम कुमार ने किया।
बात दें कि विष्णुपद मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण हिंदू तीर्थस्थल है। यह मंदिर भगवान विष्णु के पदचिह्न के लिए प्रसिद्ध है, जो एक चट्टान में स्थापित है। इस मंदिर का निर्माण 1787 में महारानी अहिल्याबाई ने फल्गु नदी के तट पर करवाया था। यह मंदिर हिंदू अनुष्ठान पिंडदान के लिए एक प्रमुख स्थल है, जहाँ लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करते हैं।
गयाजी अपने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों में भी इसका उल्लेख मिलता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु ने गयासुर की छाती पर पैर रखकर उसका वध किया था। पितृपक्ष के दौरान, दुनिया भर से लाखों लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने यहाँ आते हैं।
गयाजी शहर का संबंध गौतम बुद्ध से भी है। बोधगया, जो दुनिया के सबसे पवित्र बौद्ध तीर्थस्थलों में से एक है, यहीं स्थित है। यह वही स्थान है जहाँ गौतम बुद्ध को बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था।

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Date : 20 September 2025 Posted By : EDITOR
गयाजी में पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री ने किया स्वागत
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गयाजी में पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री ने किया स्वागत

गयाजी । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2025 में गया में श्री विष्णुपद मंदिर में पूजा-अर्चना करके बिहार का मान बढ़ाया। इस दौरान उनका स्वागत बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी और नीतिश सरकार के मंत्री प्रेम कुमार ने किया।
बात दें कि विष्णुपद मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण हिंदू तीर्थस्थल है। यह मंदिर भगवान विष्णु के पदचिह्न के लिए प्रसिद्ध है, जो एक चट्टान में स्थापित है। इस मंदिर का निर्माण 1787 में महारानी अहिल्याबाई ने फल्गु नदी के तट पर करवाया था। यह मंदिर हिंदू अनुष्ठान पिंडदान के लिए एक प्रमुख स्थल है, जहाँ लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करते हैं।
गयाजी अपने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों में भी इसका उल्लेख मिलता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु ने गयासुर की छाती पर पैर रखकर उसका वध किया था। पितृपक्ष के दौरान, दुनिया भर से लाखों लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने यहाँ आते हैं।
गयाजी शहर का संबंध गौतम बुद्ध से भी है। बोधगया, जो दुनिया के सबसे पवित्र बौद्ध तीर्थस्थलों में से एक है, यहीं स्थित है। यह वही स्थान है जहाँ गौतम बुद्ध को बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था।

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