Raja Shivaji Review: राजा शिवाजी’ भव्यता का कमाल
Raja Shivaji Review: राजा शिवाजी’ भव्यता का कमाल
स्टारकास्ट- रितेश देशमुख,संजय दत्त,विद्या बालन,अभिषेक बच्चन,जिनिलया डिसूजा,भाग्यश्री,महेश मांजरेकर,फरदीन खान,अमोल गुप्ते,सलमान खान
डायरेक्टर :रितेश देशमुख
रेटिंग – 3.5 स्टार्स
UNN@ वर्षा पारीख। बॉलीवुड सुपरस्टार रितेश देशमुख और जेनेलिया डिसूजा स्टारर फिल्म ‘राजा शिवाजी’ आज यानी 1 मई को सिनेमाघरों में रिलीज कर दी गई है. यह फिल्म रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर अपना जलवा बिखेर रही है. फिल्म को दर्शकों का भरपूर प्यार और सपोर्ट मिल रहा है.निर्देशक के रूप में Riteish Deshmukh एक महत्वाकांक्षी फिल्ममेकर के तौर पर उभरते हैं। Chhatrapati Shivaji Maharaj के जीवन पर आधारित इस फिल्म में उन्होंने भव्यता दिखाने में कोई कमी नहीं छोड़ी—चाहे बात शानदार सेट डिजाइन की हो या रॉयल कॉस्ट्यूम्स की। फिल्म कई जगहों पर एक विजुअल ट्रीट जैसी लगती है और हिंदी व मराठी दोनों दर्शकों को जोड़ने की कोशिश साफ नजर आती है। हालांकि, यही सिनेमैटिक अप्रोच कुछ जगहों पर कहानी की रफ्तार को धीमा भी कर देती है। खासकर टॉप एंगल शॉट्स और स्लो मोशन सीक्वेंस कई बार नैरेटिव को अनावश्यक रूप से लंबा खींचते हुए महसूस होते हैं।
कहानी
फिल्म की कहानी नौ अध्यायों में फैली है और शुरुआत शिवाजी के जन्म से पहले की घटनाओं से होती है। छत्रपति शिवाजी महाराज की मां जीजाबाई के गर्भकाल में ही सुल्तान बुरहान निजाम शाह के आदेश पर, उनके नाना लखुजी राजे जाधव और परिवार की दरबार में निर्मम हत्या कर दी जाती है। दूसरी ओर, शहाजी भोसले राजनीतिक उठापटक के बीच बीजापुर के सुल्तान मोहम्मद आदिल शाह के बंदी बन जाते हैं। ऐसे हालात में, जीजाऊ अपने बेटों शिवाजी और संभाजी को स्वराज का सपना देकर बड़ा करती हैं और उनकी पत्नी साईबाई (जेनेलिया डिसूजा) उस सपने को आगे बढ़ाती है। समय के साथ दोनों बागी घोषित कर दिए जाते हैं और उन्हें खत्म करने की साजिशें तेज हो जाती हैं, जिसमें सुल्तान की महत्वाकांक्षी बड़ी बेगम भी अहम भूमिका निभाती है। शिवाजी और संभाजी के तेवरों को कुचलने के लिए क्रूर और निर्दयी अफजल खान को बुलाया जाता है, जो धोखे से संभाजी की हत्या कर देता है। कहानी का असली रोमांच तब शुरू होता है जब अफजल खान अपनी सेना के साथ शिवाजी और उनके मुट्ठी भर मावलों की ओर बढ़ता है। आगे की कहानी शिवाजी महाराज की कूटनीति, सूझबूझ और युद्ध कौशल पर टिकी है। वे किस तरह अपनी रणनीति से अफजल खान का अंत करते हैं, यही फिल्म का सबसे रोमांचक और निर्णायक हिस्सा बनता है।
