
Ramayana Movie Review - मूवी रिव्यू: भव्यता, भावनाओं और आस्था का संगम है ‘रामायण पार्ट 1’
रणबीर कपूर बने श्रीराम, यश का रावण अवतार प्रभावशाली
डायरेक्टर :नितेश तिवारी
रेटिंग:3.5
रणबीर कपूर ने निभाया राम का किरदार, यश के रावण अवतार ने खींचा ध्यान, साई पल्लवी की सादगी और रवि दुबे के अभिनय ने जीता दिल; शानदार विजुअल इफेक्ट्स के बीच कुछ दृश्य करते हैं निराश।
UNN @ Varsha Parikh : भारतीय सिनेमा में रामायण की कहानी को बड़े पर्दे पर नए अंदाज में पेश करने की चुनौती को निर्देशक नितेश तिवारी ने भव्य सिनेमाई रूप देने की कोशिश की है। नमित मल्होत्रा के निर्माण में बनी ‘रामायण पार्ट 1’ दर्शकों को भारतीय संस्कृति, आस्था और पौराणिक गाथा की उस दुनिया में ले जाती है, जिससे देश की कई पीढ़ियां भावनात्मक रूप से जुड़ी हुई हैं।
कहानी और प्रस्तुति
फिल्म की कहानी भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों, माता सीता के साथ उनके संबंध और रावण के साथ संघर्ष की पृष्ठभूमि पर आधारित है। अयोध्या में श्रीराम के जीवन से लेकर वनवास और माता सीता के हरण तक की घटनाओं को बड़े सिनेमाई कैनवास पर प्रस्तुत किया गया है।
निर्देशक नितेश तिवारी ने मूल कथा की भावनाओं को बनाए रखते हुए इसे आधुनिक तकनीक और भव्य दृश्यों के साथ पेश किया है। फिल्म में पारिवारिक रिश्तों, त्याग, कर्तव्य और धर्म के मूल्यों को भी प्रमुखता दी गई है। श्रीराम की भूमिका में रणबीर कपूर ने संयमित अभिनय किया है। उनके चेहरे के भाव, संवाद अदायगी और किरदार की गंभीरता फिल्म को मजबूती देते हैं। माता सीता के रूप में साई पल्लवी ने सहजता और गरिमा के साथ अपनी भूमिका निभाई है। रावण के किरदार में यश अपनी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से प्रभावित करते हैं। वहीं लक्ष्मण की भूमिका में रवि दुबे ने भी अपने अभिनय से खास छाप छोड़ी है। फिल्म में अन्य कलाकारों का योगदान भी कहानी को विस्तार देता है।
विजुअल इफेक्ट्स और संगीत फिल्म की बड़ी ताकत
फिल्म का सबसे आकर्षक पक्ष इसका भव्य दृश्यांकन है। युद्ध के दृश्य, पौराणिक संसार, महलों और प्राकृतिक दृश्यों को बड़े स्तर पर फिल्माया गया है। कई एक्शन सीक्वेंस दर्शकों को रोमांचित करते हैं। हॉलीवुड के चर्चित संगीतकार हंस जिमर और ए.आर. रहमान का संगीत फिल्म को अलग पहचान देता है। हालांकि कुछ स्थानों पर संगीत और गानों का प्रभाव अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं लगता। कुछ वीएफएक्स और कृत्रिम दिखने वाले दृश्य भी फिल्म की वास्तविकता को प्रभावित करते हैं।
फिल्म का पहला हिस्सा कुछ धीमी गति से आगे बढ़ता है। कई किरदारों के परिचय और कहानी की विस्तारपूर्ण प्रस्तुति के कारण कुछ दृश्य लंबे महसूस होते हैं। वहीं कुछ कंप्यूटर जनरेटेड दृश्य अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ पाते। हालांकि दूसरे हिस्से में एक्शन और भावनात्मक दृश्यों की गति बेहतर होती है।