Russia will not allow oil shortages in its trusted partner countries

रूस (Russia) अपने भरोसेमंद साझेदार देशों में नहीं होने देगा तेल की कमी, जारी रखेगा सप्लाई

रूस (Russia) अपने भरोसेमंद साझेदार देशों में नहीं होने देगा तेल की कमी, जारी रखेगा सप्लाई

-पुतिन ने माना तेल की डिलीवरी के लिए लॉजिस्टिक्स को बदलना होगा

मॉस्को । ईरान युद्ध की वजह से जब पूरी दुनिया में तेल-गैस का संकट खड़ा हो गया, तब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एक बड़ा बयान सामने आया है। पुतिन ने साफ कहा है कि रूस अपने भरोसेमंद साझेदार देशों को एनर्जी सप्‍लाई जारी रखेगा। पुतिन का यह इशारा सीधे तौर पर भारत जैसे उन मित्र देशों की ओर है, जो वैश्विक दबाव के बावजूद रूस के साथ व्यापारिक रिश्ते बनाए हुए हैं।
ईरान-इजराइल युद्ध के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं। ऐसे में पुतिन का यह भरोसा भारत के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। पुतिन ने कहा कि हम उन देशों को ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति जारी रखेंगे जो विश्वसनीय भागीदार हैं। रूसी कंपनियों को वर्तमान स्थिति का लाभ उठाने की जरूरत है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा रूस से रियायती दरों पर खरीद रहा है। पुतिन के इस बयान से साफ है कि स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के बावजूद रूस अपने साझेदार दोस्तों को तेल की कमी नहीं होने देगा।
पुतिन ने माना कि तेल की डिलीवरी के लिए लॉजिस्टिक्स को बदलना होगा। उन्होंने कहा कि इसमें समय और पैसा जरूर लगेगा, लेकिन रूस अब उन बाजारों की ओर रुख करेगा जो ज्यादा लाभदायक और स्थिर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस अब पश्चिमी देशों के बजाय एशियाई बाजारों, खासकर भारत और चीन पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि पुतिन ने यूरोप को भी एक मौका देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अगर यूरोपीय खरीदार बिना किसी राजनीतिक दबाव के हमारे साथ दीर्घकालिक और स्थिर सहयोग करना चाहते हैं, तो हम इसके लिए तैयार हैं। हमने कभी मना नहीं किया। हालांकि उन्होंने शर्त रखी कि इसके लिए यूरोप को स्थिरता की गारंटी देनी होगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब हंगरी के पीएम विक्टर ओर्बन ने यूरोपीय संघ से अपील की है कि मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए रूसी तेल और गैस पर लगे प्रतिबंधों को हटाया जाए।
विशेषज्ञों के मुताबिक खाड़ी देशों में ईरान और अमेरिका-इजराइल द्वारा एक-दूसरे के तेल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के कारण दुनिया 1970 के दशक के बाद के सबसे बड़े ‘सप्लाई शॉक’ का सामना कर रही है। पुतिन ने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा तेल उत्पादन अगले महीने तक पूरी तरह ठप हो सकता है। ऐसे कठिन समय में पुतिन का भारत जैसे ‘भरोसेमंद दोस्तों’ के साथ खड़े रहने का वादा न केवल कूटनीतिक रूप से अहम है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को महंगाई के झटके से बचाने में भी मददगार साबित हो सकता है।

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Date : 11 March 2026 Posted By : EDITOR
रूस (Russia) अपने भरोसेमंद साझेदार देशों में नहीं होने देगा तेल की कमी, जारी रखेगा सप्लाई
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रूस (Russia) अपने भरोसेमंद साझेदार देशों में नहीं होने देगा तेल की कमी, जारी रखेगा सप्लाई

-पुतिन ने माना तेल की डिलीवरी के लिए लॉजिस्टिक्स को बदलना होगा

मॉस्को । ईरान युद्ध की वजह से जब पूरी दुनिया में तेल-गैस का संकट खड़ा हो गया, तब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एक बड़ा बयान सामने आया है। पुतिन ने साफ कहा है कि रूस अपने भरोसेमंद साझेदार देशों को एनर्जी सप्‍लाई जारी रखेगा। पुतिन का यह इशारा सीधे तौर पर भारत जैसे उन मित्र देशों की ओर है, जो वैश्विक दबाव के बावजूद रूस के साथ व्यापारिक रिश्ते बनाए हुए हैं।
ईरान-इजराइल युद्ध के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं। ऐसे में पुतिन का यह भरोसा भारत के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। पुतिन ने कहा कि हम उन देशों को ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति जारी रखेंगे जो विश्वसनीय भागीदार हैं। रूसी कंपनियों को वर्तमान स्थिति का लाभ उठाने की जरूरत है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा रूस से रियायती दरों पर खरीद रहा है। पुतिन के इस बयान से साफ है कि स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के बावजूद रूस अपने साझेदार दोस्तों को तेल की कमी नहीं होने देगा।
पुतिन ने माना कि तेल की डिलीवरी के लिए लॉजिस्टिक्स को बदलना होगा। उन्होंने कहा कि इसमें समय और पैसा जरूर लगेगा, लेकिन रूस अब उन बाजारों की ओर रुख करेगा जो ज्यादा लाभदायक और स्थिर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस अब पश्चिमी देशों के बजाय एशियाई बाजारों, खासकर भारत और चीन पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि पुतिन ने यूरोप को भी एक मौका देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अगर यूरोपीय खरीदार बिना किसी राजनीतिक दबाव के हमारे साथ दीर्घकालिक और स्थिर सहयोग करना चाहते हैं, तो हम इसके लिए तैयार हैं। हमने कभी मना नहीं किया। हालांकि उन्होंने शर्त रखी कि इसके लिए यूरोप को स्थिरता की गारंटी देनी होगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब हंगरी के पीएम विक्टर ओर्बन ने यूरोपीय संघ से अपील की है कि मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए रूसी तेल और गैस पर लगे प्रतिबंधों को हटाया जाए।
विशेषज्ञों के मुताबिक खाड़ी देशों में ईरान और अमेरिका-इजराइल द्वारा एक-दूसरे के तेल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के कारण दुनिया 1970 के दशक के बाद के सबसे बड़े ‘सप्लाई शॉक’ का सामना कर रही है। पुतिन ने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा तेल उत्पादन अगले महीने तक पूरी तरह ठप हो सकता है। ऐसे कठिन समय में पुतिन का भारत जैसे ‘भरोसेमंद दोस्तों’ के साथ खड़े रहने का वादा न केवल कूटनीतिक रूप से अहम है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को महंगाई के झटके से बचाने में भी मददगार साबित हो सकता है।

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