PM Modi's high-level meeting with Puri and Jaishankar

PM मोदी की पुरी और जयशंकर के साथ हाईलेवल बैठक..क्या खत्म होने वाला देश में एलपीजी संकट

PM मोदी की पुरी और जयशंकर के साथ हाईलेवल बैठक..क्या खत्म होने वाला देश में एलपीजी संकट

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच देश में एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत चल रही है। इस दिक्कत को देखकर मोदी सरकार ने इसके प्रबंधन को लेकर एस्मा लागू किया है। इससे केंद्र सरकार ने यह तय करने की कोशिश की है कि घरेलू उपभोक्ताओं को पर्याप्त एलपीजी सिलेंडर मिलते रहे। इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने भी मंगलवार को इस मामले पर हाईलेवल मीटिंग की है। बैठक में पीएम मोदी के साथ ही पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी मौजूद थे। जंग के बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई को बाधित किया है। इससे भारत सहित कई एशियाई देशों में गैस और तेल की किल्लत हो गई है। भारतीय रिफाइनरीज को केंद्र की मोदी सरकार ने आदेश दिया है कि वे एलपीजी का उत्पादन बढ़ा दें। इसके अलावा कॉर्मशियल सिलेंडरों की बजाय घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई में इजाफा किया जाए। भारत सरकार ने बताया है कि किन सेक्टरों को 100 फीसदी सप्लाई जारी रहेगी और उसमें किसी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी।
फिलहाल केंद्र का फोकस इस बात पर है कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की सप्लाई कम ना हो। इसकी एवज में औद्योगिक यूनिट्स को सप्लाई कम की गई है। इसके अलावा कॉमर्शियल सिलेंडर भी कम दिए जा रहे हैं। होटल इंडस्ट्री ने इस पर आपत्ति भी जाहिर की है कि क्योंकि उनका काम कॉमर्शियल सिलेंडरों से ही होता है। ऐसी स्थिति में होटल इंडस्ट्री के कामकाज के ही ठप हो सकता है। अगले कुछ दिन देश में एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई के लिहाज से अहम हो सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ही भारत को आने वाले ज्यादातर तेल और गैस सप्लाई होता है।
ऐसी स्थिति में संकट गहरा गया है। भारत अपनी जरूरत का कुल 62 फीसदी एलपीजी आयात करता है। यही नहीं तेल के मामले में यह निर्भरता 85 फीसदी के करीब है। ऐसी स्थिति में ज्यादा दिनों तक यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहा, तब फिर संकट बढ़ सकता। देश में अब बड़े पैमाने पर खाना बनाने के लिए लोगों की निर्भरता एलपीजी पर बढ़ गई है। दो दशक पुरानी स्थिति नहीं है। इसके बाद गैस की किल्लत देश में बड़े गुस्से का कारण भी बन सकती है। इसकारण मोदी सरकार ने इस परेशानी को प्राथमिकता से लिया है और एस्मा लागू करके एलपीजी की सप्लाई का वर्गीकरण कर दिया है।
बात दें कि भारत अपनी गैस की जरूरत का करीब 85 फीसदी हिस्सा सऊदी अरब से खरीद रहा है। इसका आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ही होता है। अभी यह बंद है। इसकारण संकट गहराया है और सरकार फिलहाल सप्लाई के दूसरे रास्ते तलाश रही है। भारत में हर साल करीब 31.3 मिलियन टन एलपीजी की खपत होती है। बता दें कि देश में कुल एलपीजी की खपत में 87 फीसदी हिस्सा घरेलू उपभोक्ताओं का ही है। इसके बाद 13 फीसदी हिस्सा उद्योग, होटल और रेस्तरां आदि में इस्तेमाल होता है।

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Date : 11 March 2026 Posted By : EDITOR
PM मोदी की पुरी और जयशंकर के साथ हाईलेवल बैठक..क्या खत्म होने वाला देश में एलपीजी संकट
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PM मोदी की पुरी और जयशंकर के साथ हाईलेवल बैठक..क्या खत्म होने वाला देश में एलपीजी संकट

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच देश में एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत चल रही है। इस दिक्कत को देखकर मोदी सरकार ने इसके प्रबंधन को लेकर एस्मा लागू किया है। इससे केंद्र सरकार ने यह तय करने की कोशिश की है कि घरेलू उपभोक्ताओं को पर्याप्त एलपीजी सिलेंडर मिलते रहे। इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने भी मंगलवार को इस मामले पर हाईलेवल मीटिंग की है। बैठक में पीएम मोदी के साथ ही पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी मौजूद थे। जंग के बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई को बाधित किया है। इससे भारत सहित कई एशियाई देशों में गैस और तेल की किल्लत हो गई है। भारतीय रिफाइनरीज को केंद्र की मोदी सरकार ने आदेश दिया है कि वे एलपीजी का उत्पादन बढ़ा दें। इसके अलावा कॉर्मशियल सिलेंडरों की बजाय घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई में इजाफा किया जाए। भारत सरकार ने बताया है कि किन सेक्टरों को 100 फीसदी सप्लाई जारी रहेगी और उसमें किसी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी।
फिलहाल केंद्र का फोकस इस बात पर है कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की सप्लाई कम ना हो। इसकी एवज में औद्योगिक यूनिट्स को सप्लाई कम की गई है। इसके अलावा कॉमर्शियल सिलेंडर भी कम दिए जा रहे हैं। होटल इंडस्ट्री ने इस पर आपत्ति भी जाहिर की है कि क्योंकि उनका काम कॉमर्शियल सिलेंडरों से ही होता है। ऐसी स्थिति में होटल इंडस्ट्री के कामकाज के ही ठप हो सकता है। अगले कुछ दिन देश में एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई के लिहाज से अहम हो सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ही भारत को आने वाले ज्यादातर तेल और गैस सप्लाई होता है।
ऐसी स्थिति में संकट गहरा गया है। भारत अपनी जरूरत का कुल 62 फीसदी एलपीजी आयात करता है। यही नहीं तेल के मामले में यह निर्भरता 85 फीसदी के करीब है। ऐसी स्थिति में ज्यादा दिनों तक यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहा, तब फिर संकट बढ़ सकता। देश में अब बड़े पैमाने पर खाना बनाने के लिए लोगों की निर्भरता एलपीजी पर बढ़ गई है। दो दशक पुरानी स्थिति नहीं है। इसके बाद गैस की किल्लत देश में बड़े गुस्से का कारण भी बन सकती है। इसकारण मोदी सरकार ने इस परेशानी को प्राथमिकता से लिया है और एस्मा लागू करके एलपीजी की सप्लाई का वर्गीकरण कर दिया है।
बात दें कि भारत अपनी गैस की जरूरत का करीब 85 फीसदी हिस्सा सऊदी अरब से खरीद रहा है। इसका आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ही होता है। अभी यह बंद है। इसकारण संकट गहराया है और सरकार फिलहाल सप्लाई के दूसरे रास्ते तलाश रही है। भारत में हर साल करीब 31.3 मिलियन टन एलपीजी की खपत होती है। बता दें कि देश में कुल एलपीजी की खपत में 87 फीसदी हिस्सा घरेलू उपभोक्ताओं का ही है। इसके बाद 13 फीसदी हिस्सा उद्योग, होटल और रेस्तरां आदि में इस्तेमाल होता है।

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