Shardiya Navratri 2026 The great festival of worship of Maa Durga

शारदीय नवरात्रि 2026: आज से शुरू हुआ मां दुर्गा की आराधना का महापर्व!

शारदीय नवरात्रि 2026: आज से शुरू हुआ मां दुर्गा की आराधना का महापर्व!

11 अक्टूबर से नवरात्रि का शुभारंभ, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा दशहरा

भक्ति, शक्ति और आस्था के नौ दिन!

रविवार, 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा और शुभ मुहूर्त में घटस्थापना की जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन घट यानी कलश स्थापना होगी। इसके लिए सुबह करीब चार घंटे और दोपहर में अभिजीत मुहूर्त रहेगा।
🌸 11 अक्टूबर – नवरात्रि प्रारंभ एवं कलश स्थापना
🌸 17–18 अक्टूबर – सप्तमी तिथि
🌸 19 अक्टूबर – अष्टमी एवं नवमी पूजा
🚩 20 अक्टूबर – विजयादशमी (दशहरा)

रविवार को रात 9:05 बजे तक वैधृति योग रहेगा। वैदिक ज्योतिष में वैधृति योग 27 नित्य योगों में से 27वाँ और अंतिम योग माना जाता है। संस्कृत शब्द ‘वैधृति’ का अर्थ “पूर्णतः धारण करना” या “रोकना” होता है। जब सूर्य और चंद्रमा की दीर्घ दूरियों का योग एक विशेष स्थिति (346 डिग्री 40 मिनट से 360 डिग्री 00 मिनट या सूर्य-चंद्रमा की एक नक्षत्रीय स्थिति) के अनुसार बनता है, तब वैधृति योग का निर्माण होता है। इस योग की स्वामिनी दैत्यों की माता दिति हैं और इसके अशुभ प्रभावों को बढ़ाने में राहु तथा अन्य पापी ग्रहों की स्थिति को भी देखा जाता है।

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Date : 11 October 2026 Posted By : EDITOR
शारदीय नवरात्रि 2026: आज से शुरू हुआ मां दुर्गा की आराधना का महापर्व!
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शारदीय नवरात्रि 2026: आज से शुरू हुआ मां दुर्गा की आराधना का महापर्व!

11 अक्टूबर से नवरात्रि का शुभारंभ, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा दशहरा

भक्ति, शक्ति और आस्था के नौ दिन!

रविवार, 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा और शुभ मुहूर्त में घटस्थापना की जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन घट यानी कलश स्थापना होगी। इसके लिए सुबह करीब चार घंटे और दोपहर में अभिजीत मुहूर्त रहेगा।
🌸 11 अक्टूबर – नवरात्रि प्रारंभ एवं कलश स्थापना
🌸 17–18 अक्टूबर – सप्तमी तिथि
🌸 19 अक्टूबर – अष्टमी एवं नवमी पूजा
🚩 20 अक्टूबर – विजयादशमी (दशहरा)

रविवार को रात 9:05 बजे तक वैधृति योग रहेगा। वैदिक ज्योतिष में वैधृति योग 27 नित्य योगों में से 27वाँ और अंतिम योग माना जाता है। संस्कृत शब्द 'वैधृति' का अर्थ "पूर्णतः धारण करना" या "रोकना" होता है। जब सूर्य और चंद्रमा की दीर्घ दूरियों का योग एक विशेष स्थिति (346 डिग्री 40 मिनट से 360 डिग्री 00 मिनट या सूर्य-चंद्रमा की एक नक्षत्रीय स्थिति) के अनुसार बनता है, तब वैधृति योग का निर्माण होता है। इस योग की स्वामिनी दैत्यों की माता दिति हैं और इसके अशुभ प्रभावों को बढ़ाने में राहु तथा अन्य पापी ग्रहों की स्थिति को भी देखा जाता है।

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