छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं: पीएम मोदी खुद कर रहे मामले की निगरानी
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं: पीएम मोदी खुद कर रहे मामले की निगरानी
सुप्रीम कोर्ट ने: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को लगा दी कड़ी फटकार
नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (नीट) में सामने आई गंभीर अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को कड़ी फटकार लगा दी है। शीर्ष अदालत ने दो टूक कहा कि यह बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है और लाखों छात्रों व उनके परिवारों के लिए पूरा मामला बेहद दर्दनाक और परेशान करने वाला है। सुप्रीम कोर्ट ने चिंता व्यक्त कर कहा कि छात्र अपनी युवावस्था के सबसे महत्वपूर्ण साल, अपना समय, पैसा और भावनाएं परीक्षा में लगाते हैं। इसके बाद में, यदि हर साल परीक्षा की विश्वसनीयता और शुचिता पर सवाल उठते हैं, तब यह पूरे शिक्षा तंत्र पर एक बड़ा दाग है। इस बीच, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरे विवाद पर निगरानी रख रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित होगी।
इस गंभीर स्थिति के बीच, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फाइमा) और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर एनटीए को भंग करने या उसके पूरे ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन की मांग की है। याचिकाकर्ताओं ने भविष्य में मेडिकल प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र और विश्वसनीय संस्था के गठन की वकालत की, ताकि छात्रों का खोया हुआ विश्वास बहाल हो सके।
मामले की सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने एनटीए और पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन से सीधे सवाल पूछा कि आखिर बार-बार पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियां क्यों हो रही हैं। शीर्ष अदालत ने एनटीए के पिछले दावों पर सवाल उठाकर कहा, आपने कहा था कि मजबूत और सुरक्षित व्यवस्था बनेगी। फिर हर बार ऐसी घटनाएं कैसे हो रही हैं? कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि या समिति की सिफारिशें नाकाम साबित हुई हैं या फिर उन्हें सही तरीके से लागू नहीं किया गया।
