देश के विभाजन की विभीषिका दिलों का, परिवारों का, रिश्तों का और भावनाओं का बंटवारा
देश के विभाजन की विभीषिका दिलों का, परिवारों का, रिश्तों का और भावनाओं का बंटवारा
आज़ादी के साथ बंटा देश — भारत-पाकिस्तान विभाजन की विभिषिका ने बदली करोड़ों की ज़िंदगी
डॅा.दीप्ति सिंह हाड़ा, समाजसेवी
UNN: 14 अगस्त 1947 की रात 12 बजे जैसे ही भारत और पाकिस्तान के जन्म की घोषणा हुई, इतिहास के पन्नों में एक नया अध्याय जुड़ गया। यह अध्याय जितना आज़ादी का उत्सव था, उतना ही यह दर्द, बिछोह और हिंसा की विभिषिका का प्रतीक भी बन गया।
भारत और पाकिस्तान का गठन माउंटबेटन योजना के तहत हुआ, जिसमें देश को धार्मिक आधार पर दो हिस्सों में बांटा गया। देश के इतिहास में 14 अगस्त की तारीख आंसुओं से लिखी गई है। यही वह दिन था जब देश का विभाजन हुआ और 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान तथा 15 अगस्त, 1947 को भारत को एक पृथक राष्ट्र घोषित कर दिया गया। इस विभाजन में न केवल भारतीय उप-महाद्वीप के दो टुकड़े किये गये बल्कि बंगाल का भी विभाजन किया गया।बंगाल के पूर्वी हिस्से को भारत से अलग कर पूर्वी पाकिस्तान बना दिया गया, जो 1971 के युद्ध के बाद बांग्लादेश बना।
कहने को तो यह एक देश का बंटवारा था, लेकिन दरअसल यह दिलों का, परिवारों का, रिश्तों का और भावनाओं का बंटवारा था। भारत मां के सीने पर बंटवारे का यह जख्म सदियों तक रिसता रहेगा और आने वाली नस्लें तारीख के इस सबसे दर्दनाक और रक्तरंजित दिन की टीस महसूस करती रहेंगी।भारत से शताब्दियों से जकड़ी हुई परतंत्रता की बेड़ियां 1947 में एक लंबे स्वतंत्रता संग्राम के बाद टूट गईं । देश जन-जन की आशाओं व आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में बढ़ चला, लेकिन देश को स्वतंत्रता के साथ ही साथ विभाजन की विभीषिका भी झेलनी पड़ी। मुस्लिम लीग की मुसलमानों के लिए अलग देश की मांग ने लाखों लोगों को विस्थापित कर दिया, यह विस्थापन कोई सामान्य नहीं था। हजारों-हजार लोगों का जनसंहार हुआ, महिलाओं के साथ जघन्यतम अपराध हुए- उस दौर में भारतीय उपमहाद्वीप में मानवता त्राहिमाम कर उठी।
10 लाख से ज्यादा लोग मारे गए, एक लाख महिलाओं से रेप
स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों के विरुद्ध देश एकजुट होकर लड़ा था, उस दौर में किसी ने इस तरह के विभाजन के बारे में सोचा भी नहीं होगा। लेकिन अंग्रेजों की शातिराना कोशिशों तथा मुस्लिम लीग के सांप्रदायिक एजेंडे ने आधुनिक काल में मनुष्यता पर विभाजन द्वारा बड़ा संकट खड़ा किया। देश के बंटवारे के समय करीब 90 लाख शरणार्थी पंजाब से पाकिस्तान गए थे। विभाजन के तीन साल बाद 1950 तक उत्तर प्रदेश से चार हजार मुसलमान हर रोज पाकिस्तान जाने वाली ट्रेन में बैठकर जाते रहे। बंटवारे की त्रासदी का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस दौरान 10 लाख से ज्यादा लोग मारे गए। इसके अलावा 1.5 करोड़ विस्थापित हुए। बंटवारें का दर्द लेकर 12.5 लाख शरणार्थी भारत में आए। इस दौरान सबसे दिल दहलाने वाली घटनाएं महिलाओं के साथ हुई। बंटवारे के दौरान अनुमान के अनुसार 1 लाख महिलाओं के साथ रेप हुआ।
विभाजन और स्वतंत्रता का इतिहास
आजादी का आंदोलन खत्म होने के बाद भारत का विभाजन हुआ। ब्रिटिश सरकार द्वारा आजादी की घोषणा के बाद भारत के सभी राजनीतिक दलों ने माउंटबेटन योजना को स्वीकार कर लिया। इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने सर रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो आयोगों का गठन किया। इनका काम भारत के विभाजन की देख-रेख करना और नए गठित राष्ट्रों की अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं का निर्धारण करना था। भारत में स्वतंत्रता के समय 565 छोटी-बड़ी रियासतें थीं। जिनका भारत के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने विलय करवाया। 15 अगस्त 1947 तक जम्मू कश्मीर, जूनागढ़ व हैदराबाद जैसे कुछ अपवादों को छोड़कर सभी रियासतों ने भारत के साथ विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए थे। उस वक्त गोवा पर पुर्तगालियों और पुदुचेरी पर फ्रांसीसियों का अधिकार था।भारत का विभाजन माउण्टबेटन योजना के आधार पर किया गया था। इसके लिए भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 बनाया गया था। इस अधिनियम में कहा गया था कि 15 अगस्त 1947 को भारत व पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र देश बना दिए जाएंगे। और ब्रिटिश सरकार उन्हें सत्ता सौंप देगी। इसके बाद 14 अगस्त को पाकिस्तान अधिराज्य बना और 15 अगस्त को भारत गणराज्य की संस्थापना की गई।
