The laborer does not even have the money to light the stove

मजदूर के पास चूल्हे जलाने तक के पैसे नहीं, नतीजा- शहर छोड़ो, गांव भागो

मजदूर के पास चूल्हे जलाने तक के पैसे नहीं, नतीजा- शहर छोड़ो, गांव भागो

-एलपीजी संकट को लेकर राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर कसा तंज

नई दिल्ली । ईरान युद्ध के बाद एलपीजी की कमी को लेकर राहुल गांधी ने मोदी सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने कहा था कि गैस संकट को भी कोविड की तरह हैंडल करेंगे और किया भी ठीक वैसा ही। राहुल गांधी ने कहा कि जिस तरह के कोविड के दौरान नीति शून्य थी और घोषणाएं बड़ी-बड़ी की गई थीं, वैसे ही हालात आज भी हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक्स पर राहुल गांधी ने कहा कि मोदीजी ने कहा था एलपीजी गैस संकट को कोविड की तरह हैंडल करेंगे और सच में वही किया। बिल्कुल कोविड के जैसे ही नीति शून्य, घोषणा बड़ी, और बोझ गरीबों पर। 500-800 की दिहाड़ी कमाने वाले प्रवासी मज़दूरों के लिए रसोई गैस पहुंच से बाहर हो गई। रात को घर लौटते मज़दूर के पास चूल्हे जलाने तक के पैसे नहीं। नतीजा- शहर छोड़ो, गांव भागो।
राहुल गांधी ने कहा कि जो मजदूर टेक्सटाइल मिलों और फैक्ट्रियों की रीढ़ हैं। आज वही टूट रहे हैं। टेक्स्टाइल सेक्टर पहले से आईसीयू में है। विनिर्माण क्षेत्र दम तोड़ रहा है और यह संकट आया कहां से? कूटनीति की मेज पर हुई उस चूक से जिसे सरकार आज तक स्वीकार नहीं करती है। जब अहंकार नीति बन जाए अर्थव्यवस्था चरमराती है, मज़दूर पलायन करते हैं, उद्योग बर्बाद होते हैं और देश दशकों पीछे धकेल दिया जाता है। सवाल एक ही है हर संकट में सबसे पहले गरीब क्यों मरता है? चुप मत रहो। यह सिर्फ गरीब का नहीं, हम सबका सवाल है।
राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि में सोमवार को आरोप लगाया कि सरकार की ओर इस बात को लेकर अंधेरे में रखा गया कि भारत का डेटा कैसे सुरक्षित रहेगा। राहुल ने अपने व्हाट्सएप चैनल पर पोस्ट किया, भारत का डेटा भारत के लोगों का है। एआई आधारित अर्थव्यवस्था में एआई का निर्माण करना, कंपनियों का विकास करना और नौकरियां पैदा करना हमारी सबसे बड़ी ताकतों में से एक हो सकता है। उनका कहना है, इसलिए मैंने सरकार से अमेरिका के साथ हालिया व्यापार समझौते के बारे में कुछ अहम सवाल पूछे थे।
राहुल गांधी ने कहा मैंने सवाल किया था कि अमेरिका के साथ व्यापार बाधाओं को कम करने का हमारे डेटा के लिए क्या मतलब है? क्या हमारा स्वास्थ्य डेटा, वित्तीय डेटा और सरकारी डेटाबेस भारत में रहेगा? क्या भारत को अब भी विदेशी कंपनियों को यहां डेटा संग्रहीत करने और उसका उपयोग अपनी एआई बनाने के लिए करने की आवश्यकता हो सकती है?
उन्होंने कहा कि सरकार देश को यह बताने से इनकार करती है कि वह किस मुद्दे पर बातचीत कर रही है। राहुल गांधी ने कहा कि हमें वैश्विक तकनीकी दौड़ में अग्रणी होना चाहिए, लेकिन इसके बजाय हमें इस बात से अंधेरे में रखा गया कि भारत का डेटा कैसे सुरक्षित रहेगा। उनका कहना है, लोग हमारे डेटा के संबंध में पारदर्शिता और जवाबदेही के हकदार हैं। हम बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए अपने डेटा का स्वामित्व रखने और उसका उपयोग करने के हकदार हैं।

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